नई दिल्ली: पाकिस्तान की पंजाब असेंबली में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और उपप्रधानमंत्री इशाक डार को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित करने का प्रस्ताव पेश किया गया है।
जियो न्यूज के मुताबिक PML-N के विधायक राणा मुहम्मद अरशद ने प्रस्ताव पेश किया। इसमें कहा गया है कि पाकिस्तान के नेताओं की मध्यस्थता से ही अमेरिका-ईरान के बीच 2 हफ्ते का सीजफायर हो पाया और इससे क्षेत्र में शांति और स्थिरता का रास्ता तैयार हुआ।
8 अप्रैल को अमेरिका ने ईरान से सीजफायर का ऐलान किया था। ट्रम्प ने बताया था कि उन्होंने यह फैसला प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ आसिम मुनीर की अपील के बाद लिया था। ईरान ने भी इसकी पुष्टि की थी।
पाकिस्तान की पंजाब विधानसभा में पेश प्रस्ताव में ईरान जंग में सीजफायर का क्रेडिट प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और उपप्रधानमंत्री इशाक डार को दिया गया।
पाकिस्तानी नेताओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहे जाने की मांग
प्रस्ताव में कहा गया कि प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ट्रम्प से बातचीत कर 2 हफ्ते का समय मांगा, ताकि कूटनीतिक प्रयासों को मौका मिल सके। अमेरिकी पक्ष ने इसे स्वीकार किया। उपप्रधानमंत्री इशाक डार ने अमेरिका और अन्य पक्षों से बातचीत लगातार जारी रखी और दोनों देशों को बातचीत की टेबल पर लाने में अहम भूमिका निभाई।
प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव वैश्विक शांति के लिए बड़ा खतरा बन सकता था और अंतरराष्ट्रीय संकट में बदल सकता था। ऐसे में पाकिस्तान के नेतृत्व की कूटनीतिक पहल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा जाना चाहिए और उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नॉमिनेट किया जाना चाहिए।
दावा- अमेरिका ने पाकिस्तानी PM को जंग रोकने का पोस्ट भेजा

पोस्ट की एडिट हिस्ट्री में ‘ड्राफ्ट- पाकिस्तानी PM का मैसेज’ लिखा हुआ है।
शहबाज शरीफ की एक सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर विवाद हो गया था। इस पोस्ट में उन्होंने अमेरिका से ईरान पर हमला न करने की समय सीमा बढ़ाने की अपील की थी। पोस्ट की एडिट हिस्ट्री में ‘ड्राफ्ट- पाकिस्तानी PM का मैसेज’ दिखने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर कई दावे किए जा रहे हैं।
लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या यह मैसेज पहले से ही तैयार किया गया था। कुछ यूजर्स का कहना है कि यह मैसेज व्हाइट हाउस के निर्देश पर लिखा गया लगता है। वहीं, कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि ट्रम्प पाकिस्तान की नीतियों को प्रभावित कर रहे हैं और यह पाकिस्तानी प्रधानमंत्री की ओर से उनकी गुलामी करने जैसा है।
पाकिस्तान ने सीजफायर के लिए क्या किया?
अमेरिका और ईरान की जंग में पाकिस्तान की कूटनीतिक कोशिशें कई हफ्तों से जारी थीं। कभी बातचीत की मेज पर और कभी परदे के पीछे…
- जंग शुरू होने के 3 हफ्ते बाद 22 मार्च को पाकिस्तानी आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने ट्रम्प और पीएम शहबाज शरीफ ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान से बात की। अगले ही दिन ट्रम्प ने ईरान के गैस प्लांट्स पर 5 दिन के लिए हमले रोक दिए।
- 29 मार्च को इस्लामाबाद में पाकिस्तान, सऊदी अरब, तुर्किये और मिस्र के विदेश मंत्रियों की मीटिंग हुई। इसकी अपडेट लेकर इशाक डार बीजिंग पहुंचे। उन्होंने चीनी विदेश मंत्री वांग यी को ब्रीफ किया।
इशाक डार ने X पर तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा- मैं अपने भाइयों सऊदी अरब, तुर्किये और मिस्र के विदेश मंत्रियों का इस्लामाबाद में स्वागत करता हूं। हमारी बातचीत क्षेत्र में बदलती स्थिति, शांति और स्थिरता को आगे बढ़ाने पर केंद्रित है।
- 5 अप्रैल को खबरें आईं कि अमेरिका, ईरान और एक मध्यस्थ देश तीनों मिलकर 45 दिन के सीजफायर प्लान पर चर्चा कर रहे हैं। इसी दिन ट्रम्प ने ईरान को लेकर गालियों भरा एक पोस्ट भी लिखा। ट्रम्प ने 48 घंटे में होर्मुज स्ट्रेट खोलने और डील करने की धमकी दी।
- इसी बीच खबर आई कि पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के सामने 2 चरणों का प्लान पेश किया। पहले चरण में सीजफायर कर होर्मुज स्ट्रेट को खोलना, फिर बातचीत से समझौता करना।
- न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, 6-7 अप्रैल की पूरी रात शरीफ और मुनीर ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची से कई बार फोन पर बात की।
- 7 अप्रैल की शाम 6 बजे ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, ‘आज रात ईरान की पूरी सभ्यता को तबाह कर देंगे, जो फिर कभी वापस नहीं आ सकेगी।’
- इसके बाद से इस्लामाबाद ने फिर से डिप्लोमेटिक चैनल एक्टिव किया। उन्होंने ईरान को बताया कि सीजफायर कर डिप्लोमेसी से मसला सुलझाना ठीक रहेगा। वहीं अमेरिका से कहा कि तेहरान बातचीत करने और होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए तैयार है।
- इस पूरे वाकये में चीन की वाइल्ड कार्ड एंट्री हुई। तीन ईरानी अधिकारियों ने बताया कि चीन ने आखिरी वक्त पर ईरानी लीडरशिप से बात की और सीजफायर करने का दबाव बनाया। दरअसल, चीन पहले ही कह चुका था कि अगर जंग खिंचती रही तो वो ईरान से ज्यादा दिन तक तेल नहीं खरीद पाएगा।
- ट्रम्प ने एक इंटरव्यू में कहा है कि बीजिंग ने तेहरान को सीजफायर के लिए समझाया और बातचीत की मेज पर आने के लिए दबाव बनाया।

ये तस्वीर सितंबर 2025 की है। तब पाक पीएम शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने अमेरिका में ट्रम्प से मुलाकात की थी।
पाकिस्तान ने क्यों दखल दिया?
अगर अमेरिका, ईरान पर बड़ा हमला करता तो पाकिस्तान पर भी मार पड़ती। दरअसल, पाकिस्तान-ईरान पड़ोसी हैं। पाकिस्तान को ईरानी शरणार्थियों का बोझ झेलना पड़ता।
कमजोर माली हालत वाला पाकिस्तान हमले से पैदा होने वाले आर्थिक संकट को नहीं झेल सकता था। जंग के कारण पाकिस्तान में डीजल के दाम 500 पाकिस्तानी रुपए के पार हो गए हैं।
हालात ऐसे हैं कि स्कूल बंद करने पड़ रहे हैं। कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम के लिए कहा गया है। दुकानों को रात 8 बजे तक बंद करने के लिए कहा गया। अगर जंग बढ़ती तो पाकिस्तान की हालत बदतर हो जाती।
इसके अलावा अगर ईरान पर हमला होता तो ईरान भी जवाबी कार्रवाई करता, जिसके निशाने पर सऊदी अरब, यूएई, कतर जैसे देश भी होते। खास बात ये है कि अगर सऊदी पर बड़े हमले होते तो पाकिस्तान को भी जंग में शामिल होना पड़ता, क्योंकि उसने सऊदी के साथ एक डिफेंस पैक्ट साइन किया है। हालांकि, पाकिस्तान ऐसा करने से बचता, जैसा उसने पहले भी किया है।

(Bureau Chief, Korba)




