बीजिंग: चीन और ताइवान के बीच फिर से तनाव बढ़ गया है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने नए साल के भाषण में कहा कि ताइवान चीन का हिस्सा है और दोनों के बीच खून का रिश्ता है।
उन्होंने कहा कि चीन और ताइवान का एक होना समय की मांग है और इसे कोई रोक नहीं सकता। ताइवान की सरकार ने इसे बहुत उकसाने वाला कदम बताया और कहा कि इससे पूरे क्षेत्र में अशांति फैल सकती है।
चीन हमेशा से कहता आया है कि ताइवान उसका हिस्सा है और जरूरत पड़ी तो सेना के दम पर उसे अपने साथ मिला लेगा। वहीं अमेरिका ने भी चीन की इस हरकत की आलोचना की है। अमेरिकी विदेश विभाग ने चेतावनी देते हुए कहा कि चीन की बातें बेवजह तनाव बढ़ा रही हैं।
अमेरिका की लंबे समय से चली आ रही नीति को दोहराते हुए विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कहा कि अमेरिका ताइवान जलडमरूमध्य (ताइवान और चीन के बीच का समुद्री क्षेत्र) में मौजूदा शांति को भंग करने के किसी भी कदम का विरोध करता है।
ट्रम्प बोले- जिनपिंग मेरे अच्छे दोस्त, चीन ताइवान पर हमला नहीं करेगा
अमेरिका पिछले कई दशकों से ताइवान की मदद करता आ रहा है ताकि वह अपनी रक्षा खुद कर सके।
वहीं ट्रम्प ने चीन को लेकर नरम रुख दिखाया है। उन्होंने कहा कि वे चीन के सैन्य अभ्यासों से परेशान नहीं है। चीन पिछले 20 साल से ऐसे अभ्यास करता रहा है। ट्रम्प ने कहा कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग से उनके अच्छे संबंध हैं और उन्हें लगता है कि चीन ताइवान पर हमला नहीं करेगा।
चीन ने ताइवान के आसपास सैन्य अभ्यास किया था
चीन ने ताइवान के आसपास अपना सबसे बड़ा और सबसे करीबी सैन्य अभ्यास किया है। चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के मुताबिक, इस अभ्यास में नौसेना, वायुसेना और रॉकेट फोर्स को एक साथ तैनात किया गया है। इसका नाम “जस्टिस मिशन 2025” रखा गया।
यह अभ्यास 29 और 30 दिसंबर 2025 को दो दिनों तक चला और 31 दिसंबर को खत्म हो गया। इसमें चीन की सेना ने दर्जनों रॉकेट दागे, सैकड़ों लड़ाकू विमान, नौसेना के जहाज और तटरक्षक बलों को तैनात किया।
अभ्यास में ताइवान के मुख्य द्वीप को पूरी तरह घेरने और उसके प्रमुख बंदरगाहों की नाकाबंदी का अभ्यास किया गया, साथ ही समुद्री और हवाई लक्ष्यों पर सटीक हमले की प्रैक्टिस भी हुई। कुछ रॉकेट ताइवान के बहुत करीब, उसके क्षेत्रीय जलों के पास गिरे, जो अब तक का सबसे निकट अभ्यास था।
चीनी सेना बोली- यह बाहरी देशों के दखल के खिलाफ चेतावनी
चीनी सेना ने कहा है कि यह अभ्यास ताइवान की ‘अलगाववादी ताकतों’ और बाहरी देशों के दखल के खिलाफ चेतावनी है। द गार्डियन ने डिफेंस एक्सपर्ट्स के हवाले से बताया है कि इस बार चीन का अभ्यास पहले से ज्यादा बड़ा है और ताइवान के बेहद करीब किया जा रहा है।
खासकर पूर्वी तट के पास बनाए गए सैन्य जोन को अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसी दिशा से संकट के समय ताइवान को अंतरराष्ट्रीय मदद मिल सकती है।
ताइवान को अमेरिका से हथियार पैकेज मिलने से भड़का चीन
चीन के इस युद्धाभ्यास की वजह अमेरिका और ताइवान के बीच हुई हथियारों की डील मानी जा रही है। अमेरिका ने हाल ही में ताइवान को करीब 11.1 अरब डॉलर के हथियार बेचने की घोषणा की थी, जो अब तक का सबसे बड़ा रक्षा पैकेज है।
इसमें आधुनिक मिसाइल सिस्टम, रॉकेट लॉन्चर और अन्य सैन्य उपकरण शामिल हैं। इस डील से चीन भड़क गया। वह ताइवान को मिलने वाले किसी भी विदेशी सैन्य समर्थन को सीधे अपनी संप्रभुता के खिलाफ कदम मानता है।
इसके चलते उसने 26 दिसंबर को अमेरिका की 20 डिफेंस कंपनियों और 10 वरिष्ठ अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी।
दूसरी ओर जापानी प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने भी 7 नंवबर को कहा था कि अगर चीन ने ताइवान पर हमला किया तो जापान मदद के लिए अपनी सेना भेजेगा। चीन इससे बहुत नाराज हुआ था और इसे अपनी संप्रभुता पर हमला बताया।

(Bureau Chief, Korba)




