वॉशिंगटन डीसी: ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ शिकंजा और कसने की तैयारी में है। अमेरिका ईरान के आसपास अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहा है।
मंगलवार को दिए एक भाषण में ट्रम्प ने दावा किया कि अमेरिका का एक और नौसैनिक बेड़ा ईरान की दिशा में आगे बढ़ रहा है। हालांकि, इसकी उन्होंने ज्यादा जानकारी नहीं दी। उन्होंने उम्मीद जताई कि ईरान को नए समझौते पर सहमत किया जा सकता है।
एक हफ्ते पहले भी ट्रम्प ने इसी तरह का बयान देते हुए कहा था कि एक बड़ा अमेरिकी सैन्य बेड़ा ईरान की तरफ बढ़ रहा है। बीबीसी फारसी की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी युद्धपोत ‘USS अब्राहम लिंकन’ मिडिल ईस्ट में पहुंच चुका है।
USS अब्राहम लिंकन अमेरिकी नौसेना का एक न्यूक्लियर-पावर्ड एयरक्राफ्ट कैरियर है। यह दुनिया के सबसे बड़े और सबसे ताकतवर वॉरशिप में से एक माना जाता है।
अमेरिका ने ईरान के आगे 4 शर्तें रखी
ट्रम्प ने एक्सियोस को दिए एक अलग इंटरव्यू में कहा कि ईरान के साथ स्थिति अभी बदल रही है। उन्होंने दावा किया कि ईरान अब बातचीत के लिए तैयार हो सकता है। ट्रम्प ने कहा, ‘ईरान के पास वेनेजुएला से बड़ा आर्मडा (बेड़ा) है।’
उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के अधिकारी कई बार संपर्क कर चुके हैं और वे डील करना चाहते हैं। ट्रम्प का मानना है कि ईरान बात करने के लिए उत्सुक है।
एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने पत्रकारों को बताया कि अमेरिका बातचीत के लिए तैयार है। अगर ईरान संपर्क करता है और शर्तें मानता है तो बात होगी। इस महीने अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने समझौते के लिए शर्तें बताई हैं-
- यूरेनियम एनरिचमेंट पर पूर्ण प्रतिबंध
- पहले से संवर्धित यूरेनियम को हटाना
- लंबी दूरी की मिसाइलों की संख्या सीमित करना
- क्षेत्रीय प्रॉक्सी बलों को मदद देना बंद करना।
ईरान के खिलाफ पहले कार्यकाल से आक्रामक रहे ट्रम्प
ट्रम्प ने अपने पहले कार्यकाल (2017-2021) में ईरान के साथ 2015 के परमाणु समझौते संयुक्त व्यापक कार्य योजना ( JCPOA) से अमेरिका को पूरी तरह बाहर निकाल लिया था।
यह समझौता ओबामा प्रशासन के समय में जुलाई 2015 में हुआ था, जिसमें ईरान, अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, रूस, चीन और यूरोपीय संघ शामिल थे। समझौते के तहत ईरान ने अपनी परमाणु गतिविधियों पर कई सख्त सीमाएं लगाई थीं, जैसे:
- यूरेनियम संवर्धन को 3.67% तक सीमित रखना (बम बनाने के लिए 90% से ज्यादा चाहिए)।
- संवर्धित यूरेनियम का स्टॉक बहुत कम रखना।
- सेंट्रीफ्यूज मशीनों की संख्या सीमित करना।
- अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) को निरीक्षण की पूरी अनुमति देना।
ईरान पर मैक्सिमम प्रेशर की नीति अपनाते हैं ट्रम्प
इसके बदले में ईरान को अमेरिका और अन्य देशों ने लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों में छूट दी, खासकर तेल निर्यात, बैंकिंग और व्यापार पर। इससे ईरान की अर्थव्यवस्था को फायदा हुआ था।
ट्रम्प ने चुनाव प्रचार में ही इस समझौते को दुनिया का सबसे खराब समझौता कहा था। उनका कहना था कि यह समझौता ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षा को सिर्फ टालता है, खत्म नहीं करता।
ईरान ने समझौते में बुरे इरादे से हिस्सा लिया और पहले अपना परमाणु हथियार कार्यक्रम छिपाया था। उन्होंने कहा था कि समझौता ईरान के अन्य बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम, क्षेत्रीय प्रॉक्सी ग्रुप्स को समर्थन, आतंकवाद और अमेरिकियों की हिरासत पर रोक नहीं लगाता।
8 मई 2018 को ट्रम्प ने व्हाइट हाउस में जॉइंट कॉन्प्रीहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन (JCPOA) से बाहर निकलने की घोषणा की। इसके साथ ही उन्होंने उन सभी प्रतिबंधों को फिर से लागू कर दिया जो समझौते के तहत हटाए गए थे। इसके बाद ट्रम्प प्रशासन ने ‘मैक्सिमम प्रेशर’ नीति अपनाई, जिसके तहत-
- ईरान के तेल निर्यात को शून्य करने की कोशिश की गई।
- ईरान के ऊर्जा, शिपिंग, वित्तीय क्षेत्रों पर सख्त प्रतिबंध लगाए।
- 1500 से ज्यादा नए प्रतिबंध लगाए गए, जिसमें ईरान के साथ व्यापार करने वाली विदेशी कंपनियों को भी अमेरिकी बाजार से बाहर करने की धमकी दी गई।
- ट्रम्प का दावा था कि इससे ईरान परमाणु कार्यक्रम छोड़ेगा और क्षेत्र में शांति आएगी।
ईरान पर पहले भी हमला कर चुका है अमेरिका
ईरान ने बातचीत की इच्छा जताई है, लेकिन शर्तों को सिरे से खारिज कर दिया है। ट्रम्प ने जून में ईरान के परमाणु ठिकानों पर अमेरिकी हमलों का जिक्र किया।
उन्होंने दावा किया कि तीन सुविधाओं पर हमले से ईरान की परमाणु क्षमता पूरी तरह नष्ट हो गई है। ये ठिकाने फोर्डो, नतांज और इस्फहान थे। उन्होंने कहा, “22 साल से लोग यह करना चाहते थे।”
ट्रम्प ने अभी यह नहीं बताया कि ईरान पर और सैन्य कार्रवाई की जाएगी या नहीं। हालांकि उन्होंने पहले कहा था कि अगर ईरान प्रदर्शनकारियों की हत्या करता है तो कार्रवाई होगी।
मिडिल ईस्ट में 30,000 से 40,000 अमेरिकी सैनिक तैनात
मिडिल ईस्ट (CENTCOM) में अभी अमेरिकी सैन्य मौजूदगी काफी मजबूत है। मिडिल ईस्ट और पर्शियन गल्फ में लगभग 30,000 से 40,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं।
फिलहाल मिडिल ईस्ट में करीब 6 नौसैनिक जहाज मौजूद हैं, जिनमें 3 गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर शामिल हैं, जो बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस और अन्य ऑपरेशन के लिए सक्षम हैं।
अमेरिका के USS अब्राहम लिंकन को जानिए…
राष्ट्रपति ट्रम्प ने शुक्रवार को कहा कि अमेरिकी जंगी जहाज USS अब्राहम लिंकन अरब सागर में ईरान पहुंच चुका है। ईरान के कई शहर इसकी स्ट्राइक रेंज में हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक यह अरब सागर में अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENCOM) की जोन में आ चुका है। साथ ही अमेरिका का C 37-B एयरक्राफ्ट भी ईरान के उत्तर में तुर्कमेनिस्तान के अशगाबाद बेस पहुंच गया है।
USS अब्राहम लिंकन पहले साउथ चाइना सी में तैनात था। 18 जनवरी को यह मलक्का स्ट्रेट पार कर हिंद महासागर में दाखिल हुआ।
ईरान ने भी अमेरिका को पलटवार की चेतावनी दी
अमेरिका की धमकी के बाद एक वरिष्ठ ईरानी सैन्य अधिकारी जनरल अली अब्दोल्लाही अलीअबादी ने चेतावनी दी थी कि अगर अमेरिका ने हमला किया तो मिडिल ईस्ट में उसके सभी सैन्य अड्डे और इजराल के केंद्र ईरान के निशाने पर होंगे।
दूसरी तरफ इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के कमांडर मोहम्मद पाकपुर ने कहा कि उनकी सेना की उंगली ट्रिगर पर है। गुरुवार को एक लिखित बयान में पाकपुर ने कहा कि ईरान की सेना पहले से ज्यादा तैयार है।
इजराइल के अर्थव्यवस्था मंत्री नीर बरकात ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अगर ईरान ने इजराइल के खिलाफ फिर से कोई हमला किया, तो उसे पहले से “सात गुना ज्यादा ताकत” से जवाब दिया जाएगा।
ईरान में सत्ता परिवर्तन करना चाहते हैं ट्रम्प
डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान में सत्ता परिवर्तन की खुलकर वकालत कर चुके हैं। उन्होंने पिछले हफ्ते पोलिटिको से कहा, “ईरान में नए नेतृत्व के बारे में सोचने का वक्त आ गया है।”
उन्होंने ईरानी नागरिकों से विरोध प्रदर्शन जारी रखने और संस्थानों पर कब्जा करने की अपील भी की थी। हालांकि अगले दिन ट्रम्प ने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि बंदियों को फांसी देने की योजना फिलहाल रोकी गई है।
दूसरी ओर, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने ट्रम्प पर ईरान में हिंसा भड़काने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ईरानी जनता को हुए नुकसान और मौतों के लिए जिम्मेदार हैं।
इसके जवाब में ट्रम्प ने खामेनेई पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि ईरान की तबाही के लिए वही जिम्मेदार हैं और वहां डर और हिंसा के जरिए शासन चलाया जा रहा है।
ईरान में 19 दिन प्रदर्शन हुए, 5000 प्रदर्शनकारियों की मौत हुई थी
ईरान में 28 दिसंबर से शुरू हुई हिंसा 15 जनवरी तक चली थी। यह कई कारणों से भड़की। ये प्रदर्शन अब तक के सबसे बड़े प्रदर्शनों में से एक माने जा रहे हैं। इनमें 5000 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई थी।
यह हिंसा महंगाई के खिलाफ भड़की थी। ईरानी मुद्रा रियाल की कीमत इतिहास में सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया था। 1 अमेरिकी डॉलर की कीमत लगभग 1,455,000 से 1,457,000 रियाल (ओपन मार्केट रेट) हो गई है। चाय, ब्रेड जैसी रोजमर्रा की चीजें भी बहुत महंगी हो गईं। कई लोग पुरानी राजशाही (शाह का शासन) वापस लाने की मांग कर रहे थे।

यह तस्वीर प्रदर्शन के दौरान की है। ईरानी सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की तस्वीर जलाती एक ईरानी लड़की।
सऊदी अरब बोला- हमारा एयरस्पेस ईरान पर हमले के लिए बंद है
ईरान और अमेरिका के विवाद के बीच सऊदी अरब ने ईरान के खिलाफ किसी भी हमले के लिए अपने एयरस्पेस या जमीन का इस्तेमाल नहीं करने का आदेश जारी किया है। सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से मंगलवार को फोन पर बात की।
सऊदी प्रेस एजेंसी के मुताबिक, क्राउन प्रिंस ने कहा कि सऊदी अरब ईरान की संप्रभुता का सम्मान करता है। उन्होंने कहा हम ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कार्रवाई के लिए अपने हवाई क्षेत्र या क्षेत्र का इस्तेमाल किसी को नहीं करने देंगे।
क्राउन प्रिंस ने कहा कि सऊदी अरब बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने और स्थिरता बढ़ाने की कोशिश का समर्थन करता है। ईरानी राष्ट्रपति पेजेशकियन ने सऊदी अरब की इस मजबूत स्थिति के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने ईरान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने के लिए शुक्रिया अदा किया।
पेजेशकियन ने कहा कि इस्लामी देशों की एकता और एकजुटता ही क्षेत्र में स्थायी सुरक्षा, स्थिरता और शांति की गारंटी दे सकती है।

(Bureau Chief, Korba)





