बिलासपुर : एसईसीएल में पिछले 2 महीनों में आश्रित पेंशन के रेकॉर्ड 120 लंबित मामले निपटाए गए

              • एचआर, सतर्कता विभाग एवं सीएमपीएफ़ओ की संयुक्त पहल से मिली सफलता

              बिलासपुर (BCC NEWS 24): एसईसीएल में आश्रित पेंशन से संबंधित लंबित मामलों को प्राथमिकता से हल करने के लिए एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसके फलस्वरूप पिछले 2 महीनों में रेकॉर्ड 120 मामलों को निपटाया गया है। एसईसीएल के सतर्कता विभाग एवं मानव संसाधन (एचआर) विभाग तथा सीएमपीएफ़ओ की इस संयुक्त प्रयास से कर्मचारी कल्याण की दिशा में की गई इस पहल से सफलता मिली है। इस अभियान के तहत, एसईसीएल प्रबंधन और सतर्कता विभाग सीएमपीएफ़ओ के अधिकारियों के साथ मिलकर लंबित मामलों को तेजी से निपटाने के लिए एक कार्य योजना पर काम कर रहे हैं।

              निदेशक (एचआर) ने सीएमपीएफ़ओ कमिश्नर के साथ बैठक कर बेहतर समन्वय पर दिया है ज़ोर

              एसईसीएल निदेशक (एचआर) श्री बिरंची दास ने हाल ही में मुख्यालय बिलासपुर में सीएमपीएफ़ओ बिलासपुर एवं जबलपुर रीज़न के कमिश्नर के साथ बैठक कर लंबित मामलों निपटान को फास्ट ट्रैक करने पर ज़ोर दिया था। साथ ही सीएमपीएफ़ओ के सी-केयर्स पोर्टल में आ रही तकनीकी समस्याओं का तत्काल समाधान को लेकर भी चर्चा की थी

              संशोधित पीपीओ को लेकर जारूकता बढ़ाने के लिए किए जा रहे हैं प्रयास

              पहले के समय में जारी किए जाने वाले पीपीओ (पेंशन पेमेंट ऑर्डर) में पत्नी का नाम न होने के कारण कर्मी की मृत्यु की स्थिति में पत्नी को अपना नाम पीपीओ में दर्ज करवाने के लिए अंतिम यूनिट में जाना पड़ता था जिसमें कई बारे देरी होने एवं अन्य समस्याओं का सामना करना पड़ता था। इसे देखते हुए संशोधित पीपीओ जारी करना शुरू किया है जिसमें कर्मी के साथ उनकी पत्नी का नाम भी दर्ज किया जा रहा है। और कर्मियों को संशोधित पीपीओ जारी करवाने के लिए जागरूक किया जा रहा है।

              लंबित मामलों को निपटाने के लिए आश्रितों से सीधे संवाद स्थापित करेगा एसईसीएल

              पीएफ़/पेंशन के लंबित मामलों को निपटाने के एसईसीएल एचआर विभाग, सतर्कता विभाग एवं सीएमपीएफ़ओ द्वारा कर्मियों एवं आश्रितों से सीधे संपर्क कर उनकी समस्याओं का हल किया जाएगा। कंपनी की योजना है कि संचालन क्षेत्रों में पीएफ़ मेला का आयोजन कर बड़े स्तर पर कर्मियों की समस्याओं का समाधान किया जाए।


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