BREAKING: अमेरिका का आर्टेमिस-2 मिशन- पृथ्वी की कक्षा छोड़ चांद की ओर निकले अंतरिक्ष यात्री, 34 हजार kmph की रफ्तार से बढ़ रहे; जरा सी चूक से चंद्रमा से टकरा सकता है यान

              वॉशिंगटन: आर्टेमिस-2 मिशन अब चांद की ओर बढ़ रहा है। लॉन्च के एक दिन बाद शुक्रवार सुबह 5:19 बजे ओरियन कैप्सूल ने थ्रस्टर्स फायर किए और पृथ्वी की कक्षा छोड़ दी। अब यह अगले 4 दिन अंतरिक्ष में सफर करेगा और वहां पहुंचेगा, जहां आज तक केवल 24 इंसान पहुंच सके हैं।

              पृथ्वी के ऑर्बिट को छोड़कर चांद की तरफ जाने के लिए इंजन फायर करने की इस प्रोसेस को ‘ट्रांसलूनर इंजेक्शन बर्न’ कहते हैं। यह करीब 6 मिनट का मैन्यूवर था, जिसने यान की रफ्तार बढ़ाकर 22,000 मील प्रति घंटा यानी करीब 34 हजार किमी/घंटा कर दी।

              1 अप्रैल को सुबह 4:05 बजे 'स्पेस लॉन्च सिस्टम' (SLS) ओरियन स्पेसक्राफ्ट में सवार 4 अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर चांद की ओर रवाना हुआ था।

              1 अप्रैल को सुबह 4:05 बजे ‘स्पेस लॉन्च सिस्टम’ (SLS) ओरियन स्पेसक्राफ्ट में सवार 4 अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर चांद की ओर रवाना हुआ था।

              रास्ते में जरा सी चूक यान को चांद से टकरा सकती है

              आर्टेमिस-2 अब ‘फ्री-रिटर्न ट्रेजैक्टरी’ पर है। यानी यान अब न्यूटन के गति के पहले नियम- जो वस्तु चल रही है, वह चलती रहेगी के भरोसे आगे बढ़ रहा है। पूरे सफर के दौरान इंजन सिर्फ छोटे-मोटे सुधार के लिए ही फायर किए जाएंगे। यह हिस्सा बेहद संवेदनशील है। रास्ते में जरा सी चूक यान को चांद से टकरा सकती है या उसे अनंत अंतरिक्ष में भटका सकती है।

              मिशन प्रोग्रेस और अंतरिक्ष यात्रियों के अनुभव

              नासा बोला- अंतरिक्ष यात्री पूरी तरह स्वस्थ

              • मिशन की स्थिति: आर्टेमिस डेवलपमेंट हेड डॉ. लोरी ग्लेज ने बताया कि अंतरिक्ष यात्री पूरी तरह स्वस्थ हैं और स्पेसक्राफ्ट उम्मीद के मुताबिक बेहतरीन प्रदर्शन कर रहा है।
              • सीखने का मौका: ग्लेज ने जोर दिया कि यह एक टेस्ट फ्लाइट है, इसलिए टीम स्पेसक्राफ्ट के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी जुटाने की कोशिश कर रही है।
              • परिवार से बातचीत: अंतरिक्ष यात्रियों ने अभी तक अपने परिवार से सीधे बात नहीं की है, लेकिन नासा जल्द ही इसके लिए समय निकालेगा।

              अंतरिक्ष यात्रियों की जीरो ग्रेविटी से बातचीत

              • स्पेस प्लंबर: क्रिस्टीना कोच ने खुद को “स्पेस प्लंबर” बताया है। वो ओरियन कैप्सूल के टॉयलेट में आ रही शुरुआती दिक्कतों को ठीक करने में व्यस्त रही हैं।
              • सोने का अनुभव: कमांडर रीड वाइसमैन ने अंतरिक्ष में सोने को मजेदार बताया। उन्होंने मजाक में कहा कि क्रिस्टीना “चमगादड़ की तरह लटककर” सोती हैं।
              • अद्भुत नजारा:अंतरिक्ष से पूरी पृथ्वी को देखने के पल को वाइसमैन ने यादगार बताया। उन्होंने कहा कि उस शानदार नजारे को चारों अंतरिक्ष यात्री देखते रह गए।
              CSA एस्ट्रोनॉट जेरेमी हैनसेन और नासा के अंतरिक्ष यात्री रीड वाइसमैन, क्रिस्टीना कोच और विक्टर ग्लोवर नेओरियन स्पेसक्राफ्ट से बातचीत की।

              CSA एस्ट्रोनॉट जेरेमी हैनसेन और नासा के अंतरिक्ष यात्री रीड वाइसमैन, क्रिस्टीना कोच और विक्टर ग्लोवर नेओरियन स्पेसक्राफ्ट से बातचीत की।

              पांचवां दिन: चंद्रमा की ग्रेविटी में दाखिल होगा आर्टेमिस-2

              5 अप्रैल मिशन के पांचवें दिन तक धरती के गुरुत्वाकर्षण के खिंचाव की वजह से कैप्सूल की रफ्तार धीमी हो जाएगी। जैसे ही यह चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में दाखिल होगा, इसकी गति फिर से बढ़ने लगेगी और यह चांद की ओर तेजी से बढ़ने लगेगा।

              छठा दिन: बास्केटबॉल जैसा बड़ा नजर आएगा चंद्रमा

              छठे दिन ओरियन चांद की सतह से महज 6,400 किमी ऊपर से गुजरेगा। इस दौरान अंतरिक्ष यात्री चांद के उस हिस्से को अपनी आंखों से देख पाएंगे, जो पृथ्वी से कभी नजर नहीं आता। खिड़की से देखने पर चांद इतना बड़ा दिखेगा, जैसे हाथ के पास कोई बास्केटबॉल रखी हो।

              • 50 मिनट के लिए टूट सकता है संपर्क: जब ओरियन चांद के पीछे से गुजरेगा तो पृथ्वी से उसका संपर्क पूरी तरह कट सकता है। करीब 50 मिनट तक ‘कम्युनिकेशन ब्लैकआउट’ रहेगा। मिशन कंट्रोल को यान से सिग्नल नहीं मिलेगा।
              • पहली बार धरती से इतनी दूर पहुंचेंगे: इसी दिन अपोलो 13 का 1970 में बनाया गया धरती से सबसे ज्यादा दूरी का 400,171.18 km का रिकॉर्ड भी टूट सकता है। आर्टेमिस II के अंतरिक्ष यात्रियों के पृथ्वी से 402,336 किमी की दूरी तक पहुंचने की उम्मीद है।

              सातवां दिन: चांद की ग्रेविटी से पृथ्वी पर लौटेगा यान

              सातवें दिन चांद के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र से बाहर निकलकर यान वापस धरती की ओर अपना सफर शुरू कर देगा। आर्टेमिस-2 का रास्ता काफी हद तक 1970 के अपोलो-13 मिशन जैसा है।

              यह चांद के गुरुत्वाकर्षण का इस्तेमाल ‘गुलेल’ की तरह करेगा, जो यान को वापस पृथ्वी की ओर धकेल देगा। पूरे मिशन में चारों अंतरिक्ष यात्री करीब 11.02 लाख किमी का सफर तय करेंगे।

              दसवां दिन: 10 अप्रैल को प्रशांत महासागर में गिरेगा यान

              भारतीय समय के अनुसार 11 अप्रैल को सुबह 6:30 बजे ओरियन पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करेगा। 6:36 बजे यह सैन डिएगो के पास प्रशांत महासागर में ‘स्प्लैशडाउन’ करेगा। इसके बाद ह्यूस्टन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी, जिसमें मिशन की जानकारी दी जाएगी।


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