मुंबई: साउथ कोरिया का शेयर बाजार भारत को पीछे छोड़कर दुनिया का छठा सबसे बड़ा मार्केट बन गया है। इसकी बड़ी वजह चिप बनाने वाली दिग्गज कंपनियां हैं, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल के दम पर लगातार रिकॉर्ड बना रही हैं।
ब्लूमबर्ग के अनुसार इस साल साउथ कोरिया की लिस्टेड कंपनियों की कुल मार्केट कैप 86% बढ़कर 5 ट्रिलियन डॉलर (करीब 475 लाख करोड़ रुपए) पर पहुंच गई है। वहीं, भारतीय शेयर बाजार की मार्केट कैप घटकर 4.8 ट्रिलियन डॉलर (करीब 456 लाख करोड़ रुपए) रह गई है।

भारतीय बाजार के पिछड़ने की 3 मुख्य वजहें
भारतीय शेयर बाजार के दुनिया में एक पायदान नीचे खिसकने के पीछे जानकारों ने तीन बड़े कारण बताए हैं:
- रुपए में कमजोरी: डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में आई लगातार गिरावट से ओवरऑल वैल्यूएशन डॉलर टर्म में कम हुआ है।
- विदेशी निवेशकों की रिकॉर्ड बिकवाली: भारतीय बाजार से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने रिकॉर्ड स्तर पर पैसे निकाले हैं।
- AI कंपनियों की कमी: भारतीय शेयर बाजार में ऐसी बड़ी कंपनियों की कमी है जो सीधे तौर पर ग्लोबल एआई इन्फ्रास्ट्रक्चर या चिप मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी हों।
इकोनॉमी के मामले में भारत अभी भी साउथ कोरिया से दोगुने से ज्यादा बड़ा
भले ही शेयर बाजार के वैल्यूएशन (मार्केट कैप) के मामले में साउथ कोरिया ने भारत को पछाड़ दिया हो, लेकिन देश की अर्थव्यवस्था (GDP) के आकार के मामले में भारत अब भी साउथ कोरिया से बहुत आगे है।
इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) के अनुमानों के मुताबिक, भारत की इकोनॉमी का साइज 4.15 लाख करोड़ डॉलर (4.15 ट्रिलियन डॉलर) है और यह दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। वहीं, साउथ कोरिया की GDP महज 1.93 लाख करोड़ डॉलर (1.93 ट्रिलियन डॉलर) है, जो भारत के मुकाबले आधे से भी कम है।
मार्केट कैप क्या होता है?
किसी भी देश के शेयर बाजार की ‘मार्केट कैपिटलाइजेशन’ का मतलब वहां की सभी लिस्टेड कंपनियों के शेयरों की कुल कीमत होती है। अगर किसी देश का मार्केट कैप बढ़ रहा है, तो इसका मतलब है कि वहां की कंपनियों में निवेशकों का भरोसा बढ़ रहा है।

(Bureau Chief, Korba)



