Sunday, February 8, 2026

            CG: कस्टम मिलिंग के लिए 91 लाख मीट्रिक टन धान का उठाव…

            • राज्य में 107.53 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी का नया रिकॉर्ड
            • किसान हितैषी नीतियों से बीते चार वर्षों में साल-दर-साल बढ़ा किसानों की संख्या
            • 23.42 लाख किसानों को 22067 करोड़ रूपए का भुगतान

            रायपुर: प्रदेश में धान खरीदी के अंतिम तिथि के पश्चात् अब कस्टम मिलिंग के लिए मिलर्स द्वारा तेजी के साथ धान का उठाव शुरू कर दिया गया है। मुख्यमंत्री श्री भूपेश की पहल पर पिछले वर्ष की तर्ज पर इस वर्ष भी धान खरीदी के साथ-साथ कस्टम मिलिंग के लिए उपार्जन केन्द्रों से धान का उठाव शुरू किया गया था, जिसके चलते राज्य सरकार को परिवहन व्यय में काफी कमी आयी है। इसके साथ ही धान खरीदी के बाद धान उठाव की लंबी प्रक्रिया से भी निजात मिली है। राज्य सरकार द्वारा इस वर्ष 23 लाख 82 हजार से अधिक किसानों से 31 जनवरी 2023 तक 107.53 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई है। किसानों को धान खरीदी के एवज में भुगतान हेतु बैंक लिकिंग व्यवस्था के तहत मार्कफेड द्वारा अपैक्स बैंक को 22 हजार 67 करोड़ रूपए जारी किया गया है। अब तक कुल धान खरीदी 107.53 लाख मीट्रिक टन में से कस्टम मिलिंग के लिए 97 लाख 20 हजार मीट्रिक टन धान उठाव के लिए डीओ जारी किया गया है, जिसके विरूद्ध मिलर्स द्वारा 91 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान का उठाव कर लिया गया है।

            गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ राज्य में बीते चार सालों में धान खरीदी की व्यवस्था को इतना सुदृढ़ और बेहतर किया गया है कि किसानों को धान बेचने और भुगतान प्राप्त करने में किसी भी तरह की दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ता है। यही वजह है कि बीते चार सालों में समर्थन मूल्य पर धान बेचने वालों किसानों की संख्या और धान खरीदी की मात्रा में रिकॉर्ड वृद्धि हुई है, जिसके चलते छत्तीसगढ़ सेंट्रल पूल में धान के योगदानकर्ता राज्य के रूप में दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। राज्य में धान खरीदी के आंकड़े में साल-दर-साल की रिकॉर्ड वृद्धि और राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत प्रति एकड़ के मान से उत्पादक कृषकों को दी जा रही 9 हजार रूपए की इनपुट सब्सिडी का ही परिणाम है कि राज्य की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था लगातार सुदृढ़ होते जा रही है। इस साल राज्य में 249 नई राईस मिले स्थापित हुई है, जिसके कारण राज्य में समर्थन मूल्य पर उपार्जित धान की कस्टम मिलिंग करने के लिए पंजीकृत मिलर्स की संख्या 2035 से बढ़कर अब 2284 हो गई है। बीते चार सालों में कृषि के क्षेत्र में समृद्धि और किसानों की खुशहाली का ही परिणाम है कि, राज्य में टैªक्टर खरीदने वाले ग्रामीणों और किसानों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। राज्य में चार सालों में किसानों ने 80 हजार से अधिक ट्रैक्टर की खरीदी की है।

            छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य में धान खरीदी के लिए खरीदी केन्द्रों की संख्या में वृद्धि के साथ ही पंजीकृत किसानों से धान खरीदी के लिए मैन्यूअल टोकन के साथ-साथ ऑनलाईन टोकन जारी करने की व्यवस्था ‘टोकन तुहंर हाथ‘ एप के माध्यम से किसानों को धान विक्रय के लिए बेहतर व्यवस्था कर दी है, जिसके चलते राज्य में धान खरीदी शुरूआती दिन 01 नवम्बर से लेकर आखिरी दिन 31 जनवरी तक धान खरीदी राज्य में निर्बाध रूप से जारी रही। राज्य में 24.98 लाख पंजीकृत किसानों और 32.19 लाख हेक्टेयर रकबा को देखते हुए इस साल 110 लाख मीट्रिक टन धान खरीदी का अनुमान था।

            खाद्य सचिव श्री टी.के. वर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल की मंशा के अनुरूप राज्य में बीते वर्ष की तरह इस वर्ष भी धान खरीदी के साथ-साथ कस्टम मिलिंग के लिए खरीदी केन्द्रों से मिलर्स द्वारा सीधे धान का उठाव की व्यवस्था सुनिश्चित की गई, जिसके चलते अब तक 90 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान का उठाव किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि धान खरीदी के साथ-साथ कस्टम मिलिंग के लिए धान के उठाव की व्यवस्था के चलते इस साल बमुश्किल 3 लाख मेट्रिक टन धान ही संग्रहण केन्द्रों में ले जाना पड़ेगा, जबकि बीते साल लगभग 23 लाख मेट्रिक टन धान संग्रहण केन्द्रों ले जाने की जरूरत पड़ी थी। धान का उठाव की इस व्यवस्था के चलते लगभग 150-200 करोड़ रूपए की बचत होगी। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा कस्टम मिलिंग के लिए मिलर्स को दी जानी वाली प्रोत्साहन राशि को प्रति क्विंटल के मान से 120 रूपए दिए जाने से भी कस्टम मिलिंग में तेजी आई है। इस साल 249 नये मिलर्स ने पंजीयन कराया है। इसका सीधा अर्थ यह है कि धान से छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था और औद्योगीकरण को गति मिली है, इससे रोजगार के नये अवसर भी सृजित हुए हैं।


                          Hot this week

                          Related Articles

                          Popular Categories