Saturday, February 14, 2026

              CG: बृहस्पत सिंह को बयानबाजी पर कांग्रेस का नोटिस… हार के बाद की थी सैलजा को हटाने की मांग, पार्टी ने 3 दिन में मांगा जवाब; इधर हार पर जयसिंह अग्रवाल भी भड़के.. उन्होंने क्या कहा पढ़े

              रायपुर: कांग्रेस ने अपने पूर्व विधायक बृहस्पत सिंह को बयानबाजी को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी किया है। कांग्रेस की करारी हार के बाद बृहस्पत ने TS सिंहदेव, कुमारी सैलजा जैसे बड़े नेताओं को हार का जिम्मेदार बताया था।

              कांग्रेस के प्रभारी महामंत्री मलकीत सिंह गैदू ने नोटिस जारी कर बृहस्पत से जवाब मांगा है। बृहस्पति को 3 दिन के भीतर जवाब देना होगा। पार्टी के बड़े नेताओं में बयानबाजी की वजह से खासी नाराजगी है। माना जा रहा है कि संगठन उन पर कार्रवाई कर सकता है।

              कांग्रेस की ओर से जारी किया गया नोटिस।

              कांग्रेस की ओर से जारी किया गया नोटिस।

              क्या है नोटिस में

              बृहस्पत को जारी नोटिस में लिखा गया है कि चुनाव परिणाम के बाद प्रदेश प्रभारी और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के ऊपर सार्वजनिक रूप से लगाए गए तथ्यहीन आरोप समाचार पत्र और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। हमें इसकी जानकारी मिली है आपके द्वारा लगाए गए आरोपों से पार्टी की छवि धूमिल हो रही है। तीन दिन के भीतर प्रदेश कांग्रेस कमेटी को अपना जवाब लिखित में भेजें।

              अब पढ़िए क्या कहा था बृहस्पत सिंह ने

              रायपुर में पूर्व विधायक बृहस्पत सिंह ने राहुल गांधी से कुमारी सैलजा को हटाने तक की मांग की थी। उन्होंने कहा कि टीएस सिंहदेव को सैलजा हीरो की तरह प्रमोट करती रहीं। सैलजा ने डैमेज कंट्रोल करने के लिए कुछ नहीं किया। उन्होंने कभी ये तक जानने का प्रयास नहीं किया कि क्या चल रहा है। इसलिए कांग्रेस की ऐसी दशा हुई है।

              इधर जय सिंह अग्रवाल भी भड़क गए

              पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने बिना नाम लिए भूपेश बघेल पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि, विधायकों की परफॉर्मेंस का सर्वे सरकार का मुखिया करवाता है। उस सर्वे पर कभी चर्चा नहीं हुई, जो फर्जी सर्वे था। सरकार पिछले चुनाव में मिले जनादेश की कद्र नहीं कर पाई।

              कोरबा में एक बैठक के दौरान जयसिंह ने कहा कि, इस चुनाव में कांग्रेस में एकजुटता नहीं थी। इस बार का चुनाव सेंट्रलाइज था। मंत्रियों को पावर नहीं मिल पाया। एक ताकत केन्द्रीयकृत रही और कुछ लोगों के साथ पांच साल सरकार चलाती रही। जिले में मंत्रियों का जो प्रभाव था, उसे बाधित किया गया।


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