Friday, February 20, 2026

              CG: स्वामी आत्मानंद स्कूलों की संचालन समितियां होगी समाप्त- शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल

              • स्वामी आत्मानंद स्कूल अब शिक्षा विभाग के जिम्मे
              • आर.डी. तिवारी स्कूल मरम्मत में अनियमितता की होगी जांच

              रायपुर: स्कूल शिक्षा मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा है कि छत्तीसगढ़ की महान विभूति, शिक्षाविद् और समाज सुधारक और जन जागरण के पुरोधा स्वामी आत्मानंद जी के नाम पर तत्कालीन सरकार ने राज्य भर में अंग्रेजी और हिन्दी माध्यम उत्कृष्ट स्कूल खोल कर न सिर्फ शिक्षा और विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है, बल्कि स्वामी आत्मानंद जी के नाम को भी धूमिल किया है। इन स्कूलों के संचालन की जिम्मेदारी कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित समिति के जिम्मे सौंप कर तत्कालीन सरकार ने इसका भविष्य कलेक्टरों की इच्छा पर सौंप दिया है। यह राज्य की शिक्षा व्यवस्था और विद्यार्थियों के भविष्य के लिए किसी भी स्थिति में उचित नहीं है। स्वामी आत्मानंद स्कूलों में शिक्षा की वर्तमान स्थिति, अनियमितता और कुप्रबंधन को देखते हुए हमारी सरकार ने इसके संचालन के लिए कलेक्टरों की अध्यक्षता में गठित समितियों को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का निर्णय लिया है। स्वामी आत्मानंद स्कूलों में शिक्षा-दीक्षा की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी अब शिक्षा विभाग की होगी।

              शिक्षा मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल आज विधानसभा में स्वामी आत्मानंद स्कूलों के कुप्रबंधन एवं वहां व्याप्त अनियमितता के संबंध में ध्यानाकर्षण का जवाब देने के बाद पत्रकारों से चर्चा करते हुए उक्त बातें कही। मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि स्वामी आत्मानंद पूरे देश में पूज्यनीय हैं। हम सभी के मन में उनके लिए सम्मान है। पहले ये स्कूल जिन महान हस्तियों के नाम से जाने जाते थे, उनका नाम फिर से स्वामी आत्मानंद से पहले जोड़ा जाएगा।

              मंत्री श्री अग्रवाल ने यह भी कहा कि स्वामी आत्मानंद स्कूलों को लेकर अगर कोई अनियमितता की शिकायत मिलती है, तो उसकी जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य में स्वामी आत्मानंद स्कूलों के पुनर्निर्माण और अन्य मदों में लगभग 800 करोड़ रुपए घोटाले की आशंका है। जहां भी शिकायत प्राप्त होगी, उसकी जांच कराई जाएगी। अकेले राजधानी रायपुर के आर.डी. तिवारी स्कूल में ही लगभग 4.5 करोड़ रुपए बिलिं्डग मरम्मत पर खर्च किए गए, जबकि इतनी राशि में एक नई बिलिं्डग का निर्माण हो जाता।


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