Friday, February 20, 2026

              CG : बिल्डर्स को 18.40 लाख रुपए वापस करने का आदेश, जिला उपभोक्ता आयोग का बड़ा फैसला, राशि लेकर भी नहीं दिया मकान

              सरगुजा: जिला उपभोक्ता आयोग सरगुजा ने एक बिल्डर को अग्रिम राशि लेने के बाद भी मकान नहीं बनाकर देने के मामले में 18.40 लाख रुपये वापस करने का आदेश दिया है। मेसर्स अंश बिल्डर्स के प्रोपराइटर ने शिक्षिका से वर्ष 2015 में निर्माणाधीन कॉलोनी में दो मंजिला मकान बनाकर देने का अनुबंध किया था और अग्रिम राशि ले ली थी। बिल्डर से परेशान शिक्षिका ने जिला उपभोक्ता आयोग में वाद दायर किया था।

              जानकारी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के केन्द्रीय विद्यालय महोबा में शिक्षक के पद पर पदस्थ ऋचा यादव (48) और स्वास्थ्य विभाग में ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक के पद पर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र लटोरी में पदस्थ उनके पति आलोक कुमार यादव (48) ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, सरगुजा में बिल्डर के खिलाफ परिवाद दायर किया था।

              वाद में उन्होंने बताया था कि अंश बिल्डर्स के निर्माणाधीन बरसाना रेसिडेंसी कॉलोनी अजिरमा, जिला सूरजपुर में थ्री बीएचके के दो मंजिला आवासीय मकान खरीदने के लिए वर्ष 2015 में अनुबंध कर बिल्डर को अग्रिम राशि उन्होंने दी थी।

              बैंक से होम लोन लेकर दी थी राशि

              शिक्षिका ऋचा यादव और आलोक कुमार यादव ने अंश बिल्डर्स के संचालक पंकज सिंह और उनकी पत्नी नेहा सिंह को मकान खरीदने के लिए 4.50 लाख रुपये नगद और केनरा बैंक से होम लोन लेकर 13.90 लाख रुपये अग्रिम राशि के रूप में देकर 1 नवंबर 2015 में मकान के लिए अनुबंध किया था। अनुबंध के अनुसार मेसर्स अंश बिल्डर्स को अनुबंध के अनुसार तीन माह में मकान बनाकर देना था।

              पूरी राशि वापस करने का आदेश

              मामले की सुनवाई जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग सरगुजा के अध्यक्ष राकेश पांडेय, सदस्य नवनी कांत दत्ता और अर्चना सिन्हा ने करते हुए बिल्डर्स और बैंक के विरुद्ध सेवा में कमी पाते हुए अनावेदक बिल्डर व बैंक के विरुद्ध संयुक्त और अलग-अलग आदेश पारित किया है। वसूल की गई राशि से बैंक लोन में समायोजित की जाएगी और अतिरिक्त राशि आवेदकों को दी जाएगी।

              आयोग ने अंश बिल्डर्स के संचालकों को 18.40 लाख रुपये एक माह में वापस करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही परिवादी को पहुंची आर्थिक और मानसिक क्षतिपूर्ति के रूप में 10 हजार रुपये और वाद व्यय के रूप में 5 हजार रुपये देने का भी आदेश पारित किया गया है।


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