Sunday, January 11, 2026

              चेन्नई: विदेश मंत्री जयशंकर बोले- दुर्भाग्य से हमारे पड़ोसी बुरे, हमें अपने लोगों को आतंकवाद से बचाने का हक, कोई ये न बताए हमें क्या करना है

              चेन्नई: विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने कहा कि पड़ोसी बुरे भी हो सकते हैं, दुर्भाग्य से हमारे हैं। अगर कोई देश यह तय करता है कि वह जानबूझकर, लगातार और बिना पछतावे के आतंकवाद जारी रखेगा तो हमें अपने लोगों को आतंकवाद से बचाने का अधिकार है।

              विदेश मंत्री ने यह बात IIT मद्रास के एक कार्यक्रम में शुक्रवार को कही। उन्होंने कहा कि हम उस अधिकार का इस्तेमाल कैसे करेंगे, यह हम पर निर्भर है। कोई हमें यह नहीं बता सकता कि हमें क्या करना चाहिए या क्या नहीं करना चाहिए। हम खुद को बचाने के लिए जो कुछ भी करना होगा, वह करेंगे।

              बांग्लादेश पर जयशंकर ने कहा- अच्छे लोग नुकसानदायक नहीं

              बांग्लादेश में अशांति पर विदेश मंत्री ने कहा- ‘मैं अभी दो दिन पहले बांग्लादेश में था। मैं बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में भारत का प्रतिनिधित्व करने गया था। हमें कई तरह के पड़ोसी मिले हैं।

              अगर आपका कोई पड़ोसी आपके लिए अच्छा है या कम से कम आपके लिए नुकसानदायक नहीं है तो इसमें परेशानी नहीं है। जहां भी अच्छे पड़ोसी होने की भावना होती है, भारत निवेश करता है, भारत मदद करता है, भारत शेयर करता है।’

              विदेश मंत्री की स्पीच की 3 मुख्य बातें…

              • भारत दुनिया की उन पुरानी सभ्यताओं में से है, जो आज एक आधुनिक राष्ट्र के रूप में मौजूद हैं। भारत को अपने इतिहास और विरासत का स्पष्ट एहसास है, जो बहुत कम देशों में देखने को मिलता है। भारत ने जानबूझकर लोकतांत्रिक व्यवस्था को अपनाया, जिससे लोकतंत्र एक वैश्विक राजनीतिक विचार बना। भारत की जिम्मेदारी है कि वह अपने विचार, संस्कृति और इतिहास को दुनिया के सामने रखे।
              • पश्चिमी देशों के साथ साझेदारी जरूरी है और यह साझेदारी सकारात्मक तरीके से की जा सकती है। ‘वसुधैव कुटुंबकम’ का अर्थ है कि भारत ने दुनिया को कभी दुश्मन या खतरे के रूप में नहीं देखा। सीमित संसाधनों के बावजूद ज्यादा प्रभाव कैसे डाला जाए, यही भारत की विदेश नीति की सोच है। भारतीय कूटनीति अपनी ताकत, प्रतिस्पर्धा और वैश्विक संस्थानों का उपयोग करके समाधान तलाशती है।
              • वैक्सीन डिप्लोमेसी का भावनात्मक असर बहुत गहरा रहा। कई देशों में पहली वैक्सीन खेप मिलने पर लोगों की आंखों में आंसू थे। COVID के दौरान कई विकसित देशों ने जरूरत से ज्यादा वैक्सीन जमा कर ली थी। छोटे और गरीब देशों के लिए भारत की वैक्सीन मदद ‘जीवनरेखा’ जैसी थी। भारत दुनिया के सबसे कुशल वैक्सीन उत्पादकों में से एक है। वैश्विक सप्लाई चेन भारत के बाहर से आती है, इसलिए दुनिया के साथ सहयोग जरूरी है।

              विदेश मंत्री बोले- अरुणाचल भारत का हिस्सा है और रहेगा

              विदेश मंत्री ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश भारत का हिस्सा है और हमेशा रहेगा, और इस तरह की चालों से जमीन पर कुछ भी बदलने वाला नहीं है। शंघाई एयरपोर्ट पर चीनी इमिग्रेशन अधिकारियों के अरुणाचल प्रदेश की एक महिला के परेशान करने को लेकर जयशंकर ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने कहा कि हमने असल में इसका विरोध किया, और हमने यह बात भी साफ कर दी कि इस तरह की हरकतें करने से असल में कुछ भी बदलने वाला नहीं है।


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