बलरामपुर: जिले के वाड्रफनगर वन परिक्षेत्र अंतर्गत पिछले 40 दिनों के भीतर 35 जंगली हाथियों का दल जमकर उत्पात मचा रहा है। जंगली हाथियों का दल दिन में जंगल में रहकर आराम करते हैं और शाम होते ही भोजन की तलाश में रिहायशी इलाके की तरफ आ रहे हैं। जंगली हाथियों के दल की मौजूदगी अभी भी इसी क्षेत्र में हैं, जिसकी वजह से ग्रामीण भयभीत हैं।
दरअसल, जंगली हाथियों के दल वाड्रफनगर शहर से महज 1 किलोमीटर की दूरी पर 35 हाथियों की दल ने जंगल में पिछले 40 दिनों से अपना डेरा डाल रखा है। शाम होते ही गांव और शहरों की ओर हाथी निकल आते हैं।
वन विभाग के नर्सरी में बने घर के साथ ट्यूबवेल को तोड़ा
बीते दो दिन पहले हाथियों का दल अचानक शहर में वन विभाग के नर्सरी में घुसकर फलदार वृक्ष के साथ अन्य फसलों को खाने के साथ-साथ तबाह भी किया। नर्सरी परिसर में लगे ट्यूबवेल को भी उखाड़ फेंका। इतना ही नहीं नर्सरी परिसर में बने घर को भी तहस-नहस कर तोड़ दिए। गनीमत थी कि नर्सरी में बने घर पर उस दौरान कोई चौकीदार नहीं था।
दर्जनों गांव के करीब 400 किसान के फसल हुए तबाह
वाड्रफनगर वन परिक्षेत्र की मदनपुर ककनेसा पनसारा कोटरकी वाड्रफनगर नगर पंचायत कैलाशपुर मेंडारी गुरुमुखी सहित दर्जनों गांव में 400 किसानों की 300 एकड़ में लगी फसल को तबाह को रौंद कर नुकसान पहुंचा रहे हैं।

इन फसलों में गेहूं चना मक्का बाजार सरसों जैसे फसल शामिल हैं। इसकी वजह से किसानों की मुसीबत बढ़ चुकी है, उन्हें लाखों का नुकसान हो रहा है। लगातार हाथियों के आतंक से परेशान ग्रामीण वन विभाग से हाथियों को भगाने की अपील कर रहे हैं।
हाथियों के डर से पांच स्कूलों को भी किया गया था बंद
बता दें कि करीब 23 फरवरी 2024 को हाथियों के डर से वाड्रफनगर वन परिक्षेत्र के ककनेसा गांव से लगे आसपास के पांच स्कूलों को जिला शिक्षा अधिकारी के द्वारा बंद कर दिया गया था। पांचों स्कूलों में छुट्टी घोषित कर रिहायशी इलाकों में भी वन विभाग के द्वारा मुनादी करा कर लोगों से जंगल की ओर और घर से बगैर काम के नहीं निकलने की अपील की गई थी।

वन विभाग लगातार हाथियों को भगाने में हो रही है नाकाम
हाथियों को भगाने वन विभाग की टीम स्थानीय लोगों की मदद से बम, पटाखे और मसाल जलाकर रिहायशी इलाकों से दूर भागने की तमाम कवायद कर रही है। लेकिन सारी कोशिशें नाकाम साबित हो रही है। वन विभाग पूरी तरह से अब बेबस नजर आ रही है, जिसका खामियाजा क्षेत्र के किसान भुगत रहे हैं।

(Bureau Chief, Korba)




