छत्तीसगढ़ : फर्जी सहायक संचालक ने टेंडर दिलाने के नाम पर लिए 15 लाख, युवती ने लौटाने को कहा तो करने लगा छेड़छाड़, गिरफ्तार

              आरोपित शेषमणि मिश्रा। (फाइल फोटो)

              रायपुर। खुद को महिला एवं बाल विकास विभाग का असिस्टेंट डायरेक्टर बताकर युवती को इंटीरियर डेकोरेशन का काम दिलाने का झांसा देकर उससे छेड़छाड़ और दुष्कर्म की कोशिश करने वाले फर्जी अधिकारी को विशेष कोर्ट ने अलग-अलग धाराओं में दो साल की कैद और आठ हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है। वहीं अर्थदंड की राशि नहीं देने पर आरोपित को दो माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।

              जानकारी के अनुसार युवती स्वजन के साथ 31 दिसंबर, 2019 को वीआइपी रोड स्थित एक होटल में नए साल की पार्टी में गई थी। वहां आरोपित ने पत्नी से परिचय कराते हुए खुद को महिला एवं बाल विकास विभाग का सहायक संचालक बताकर 15 लाख रुपये ले लिए।

              टेंडर नहीं मिलने पर युवती ने जब शेषमणि से रकम वापस मांगी तो उसने झांसा देकर युवती को चार सितंबर, 2020 को दोपहर दो बजे विधानसभा रोड स्थित अंबुजा माल के पास बुलवाया। जब युवती वहां पहुंची तो आरोपित ने राशि लौटाने की बात कहकर अपनी कार में बिठाया और सुनसान इलाके में ले जाकर छेड़छाड़ करने लगा।

              विरोध करने पर गाली-गलौज कर जान से मारने की धमकी देकर कपड़े फाड़ दिए और दुष्कर्म का प्रयास किया। किसी तरह कार से उतरने के बाद पीड़िता घर पहुंची। डर के मारे उसने स्वजन को घटना की जानकारी नहीं दी। दो दिन बाद अपनी सहेली को घटनाक्रम का ब्योरा देने के बाद पीड़िता ने आदिम जाति कल्याण पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई। जहां पुलिस ने प्रकरण की जांच करने के बाद आरोपित को गिरफ्तार कर जेल भेजा, फिर कोर्ट में आरोप पत्र पेश किया।

              10 गवाहों के बयान पर सिद्ध हुआ आरोप

              विशेष न्यायाधीश पंकज कुमार सिन्हा ने मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से पेश 10 गवाहों का बयान दर्ज किया। पुलिस की ओर से पेश ठोस साक्ष्यों और गवाहों के बयान व प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए न्यायाधीश ने आरोपित शेषमणि मिश्रा को दोष सिद्ध ठहराते हुए धारा 354 में दो वर्ष कठोर कारावास व दो हजार रुपये अर्थदंड, धारा 354 (क) में दो वर्ष कठोर कारावास और दो हजार रुपये अर्थदंड, धारा 294 में तीन माह कठोर कारावास व पांच सौ रुपये अर्थदंड, धारा 506 में छह माह कठोर कारावास और पांच सौ रुपये अर्थदंड और अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम में क्रमश: एक-एक वर्ष के कठोर कारावास के साथ एक-एक हजार रुपये अर्थदंड की सजा से दंडित करने का फैसला सुनाया। अर्थदंड की राशि भुगतान नहीं करने पर दो-दो हजार के एवज में दो-दो माह, एक-एक हजार के एवज में एक-एक माह और पांच-पांच सौ रुपये के एवज में पंद्रह-पंद्रह दिन का अतिरिक्त कठोर कारावास की सजा भुगतनी होगी।


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