मछली पालन आय का उत्तम साधन….

              • सरहापानी के गंगा स्व सहायता समूह को ग्रामीण तालाब जलक्षेत्र पर 10 वर्षीय पट्टा आबंटन
              • प्रतिवर्ष में 1500 किलोग्राम मछली किया जा रहा है उत्पादन
              • मत्स्य विभाग द्वारा समूह को 04 नग महाजाल और 50 प्रतिशत अनुदान पर मछली बीज  प्रदाय किया गया
              • मछली विक्रय से समूह को लगभग 2 से 3 लाख प्रतिवर्ष हो रहा है मुनाफा

              जशपुरनगर: जिले के किसानों, स्व सहायता समूहों और दूरस्थ अंचल के लोगों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और रोजगार के अवसर देने के उदेश्य से जिला प्रशासन द्वारा विभिन्न योजनाओं के माध्यम से हितग्राहियों को लाभान्वित किया जा रहा है। मछली पालन विभाग द्वारा भी विभागीय योजनाओं से लगातर किसानों और समूहों को मछली पालन के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है और आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के लिए ग्रामीण तालाब जलक्षेत्र में पट्टा और महाजाल प्रदाय किया जा रहा है।

              प्रतिवर्ष में 1500 किलोग्राम मछली किया जा रहा है उत्पादन

              इसी कड़ी में मत्स्य विभाग द्वारा दुलदुला विकासखण्ड के ग्राम सरहापानी के गंगा स्व सहायता समूह को वर्ष 2019-20 में ग्रामीण तालाब जलक्षेत्र 0.500 पर 10 वर्षीय पट्टे पर तालाब आबंटन किया गया है। जिसमें कुल 12 सदस्यों के द्वारा मत्स्य पालन किया जा रहा है। समूह को विभाग द्वारा 04 नग महाजाल और 50 प्रतिशत अनुदान पर मछली बीज भी प्रदाय किया गया है। समूह के द्वारा प्रतिवर्ष 1500 कि.ग्रा. रोहू, कतला, एवं मृगल मछली उत्पादन किया जा रहा है। जिसके विक्रय से समूह को 2 से 3 लाख लगभग प्रतिवर्ष फायदा हो रहा है। समूह द्वारा पिछले 3 वर्षो से मछली पालन का कार्य किया जा रहा है। अब समूह के सदस्य अच्छी आमदनी पाकर परिवार के साथ सुख-सुविधा के साथ जीवन यापन कर रहें है। इसके लिए उन्होंने छत्तीसगढ़ शासन और जिला प्रशासन को धन्यवाद दिया है।


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