Saturday, May 25, 2024
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कोरबा: पूर्व गृहमंत्री के बेटे का हाईवोल्टेज ड्रामा.. बीच सड़क पर लेटकर BJP नेता ने कहा- मुझे मारो; शराब के नशे में लोगों को दी गालियां

कोरबा: छत्तीसगढ़ के पूर्व गृह मंत्री एवं रामपुर विधायक ननकीराम कंवर के बेटे संदीप कंवर ने शुक्रवार रात कोरबा के नए बस स्टैंड पर जमकर हंगामा किया। बीजेपी नेता संदीप कंवर शराब के नशे में धुत होकर सड़क पर ही लेट गए। उनका हाईवोल्टेज ड्रामा देखकर लोगों की भीड़ जमा हो गई। अब उनके इस हरकत का वीडियो भी सामने आया है। मामला कोतवाली थाना क्षेत्र का है।

संदीप कंवर बस स्टैंड के पास बीच सड़क पर वाहन के सामने लेट गए। वे नशे में धुत थे और बार-बार बस ड्राइवर को नीचे उतारने की बात कह रहे थे। बताया जा रहा है कि बस चालक से किसी बात को लेकर उनका विवाद हो गया था। इस बात को लेकर वो उस ड्राइवर को बार-बार बुलाने की जिद कर रहते रहे और बस के सामने सड़क पर लेटकर लोगों को भद्दी-भद्दी गालियां दे रहे थे। वहां मौजूद लोग संदीप कंवर के हाथ-पैर जोड़ रहे थे कि वे किसी तरह से शांत हो जाएं, लेकिन वे किसी की नहीं सुन रहे थे।

सड़क पर इस तरह से लेट गए संदीप।

सड़क पर इस तरह से लेट गए संदीप।

कहा-मुझे मारो

बाद में घटना की सूचना पर कोतवाली थाना पुलिस और CSEB चौकी पुलिस की पेट्रोलिंग टीम भी मौके पर पहुंची और संदीप कंवर को मनाने की कोशिश की। ये ड्रामा काफी समय तक चलता रहा। यहां तक कि शराब के नशे में धुत संदीप कंवर ने ये भी कहा कि मुझे मारो। लोगों ने मोबाइल में इसका वीडियो बना लिया। बाद में पुलिस ने जैसे-तैसे संदीप कंवर को मनाकर उन्हें घर तक पहुंचाया।

संदीप कंवर कोरबा क्षेत्र क्रमांक- 1 से जिला पंचायत सदस्य भी हैं। ऐसे में लोगों का कहना है कि इस तरह का आचरण एक जनप्रतिनिधि को शोभा नहीं देता। अब उनके ड्रामे का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। संदीप कंवर ने नशे में धुत होकर जिस तरह से यात्रियों के साथ भी बदसलूकी और गालीगलौज की, उसकी निंदा भी लोग कर रहे हैं।

ननकीराम कवर रामपुर से बीजेपी विधायक हैं।

ननकीराम कवर रामपुर से बीजेपी विधायक हैं।

पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर के बारे में जानें

छत्तीसगढ़ के पूर्व गृहमंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता ननकीराम कंवर का जन्म 21 जुलाई 1943 में ग्राम बंधवाभांठा (सरगबुंदिया) जिला कोरबा में हुआ था। उनकी पत्नी का नाम शकुंतला देवी कंवर है, जिनसे उनका विवाह 3 जून 1963 में हुआ था। ननकीराम के दो बेटे हैं। बड़े बेटे प्रमोद कंवर और छोटे बेटे संदीप कंवर है।

ननकीराम कंवर का सियासी सफर

ननकीराम कंवर ने 1969 में राजनीति में प्रवेश लिया। उन्होंने जनसंघ सदस्य के रूप में 1972 में पहली बार चुनाव लड़ा। 1977 में पहली बार विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए। इसके बाद 1990, 1998, 2003 और पांचवीं बार 2008 में विधानसभा के लिए चुने गए। 1977-79 तक वे राज्यमंत्री, राजस्व विभाग मध्यप्रदेश शासन रहे। 1990 में ननकी मंत्री वन एवं कृषि विभाग मध्यप्रदेश शासन रहे। वे अनुसूचित जनजाति मोर्चा मध्यप्रदेश भाजपा के अध्यक्ष भी रहे। 1992-93 तक ननकीराम कंवर मंत्री जनशक्ति नियोजन, तकनीकी शिक्षा विभाग (मध्यप्रदेश शासन) रहे।

1998-2000 तक ननकीराम कंवर सदस्य, सदन समिति एवं विशेषाधिकार समिति, छत्तीसगढ़ विधानसभा रहे। 2003 में मंत्री कृषि, राजस्व, सहकारिता, पशुपालन और मत्स्य रहे। 2004 में वे पदेन सदस्य, नियम समिति छत्तीसगढ़ विधानसभा रहे। 2008 में ननकीराम कंवर गृह, जेल, सहकारिता विभाग मंत्री (छत्तीसगढ़ शासन) रहे। 2010 में वे छत्तीसगढ़ विधानसभा में सदस्य, कार्यमंत्रणा समिति रहे। 2011 में ननकी विशेष आमंत्रित सदस्य, कार्यमंत्रणा समिति छत्तीसगढ़ विधानसभा रहे।

ननकीराम कंवर का भी विवादों से नाता

ननकीराम कंवर का विवादों से भी पुराना नाता रहा है। 3 साल पहले उन्होंने अपनी ही पार्टी के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह पर निशाना साधते हुए कह दिया था कि उन्हें नेता प्रतिपक्ष का पद शोभा नहीं देता। उन्होंने कहा था कि रमन सिंह 15 साल मुख्यमंत्री रह चुके हैं और अब उन्हें नेता प्रतिपक्ष जैसे छोटे पद के लिए दावेदारी नहीं करनी चाहिए।

अपनी बयानबाजी को लेकर सुर्खियों में रहते हैं कंवर।

अपनी बयानबाजी को लेकर सुर्खियों में रहते हैं कंवर।

ननकी ने खुद को बताया था सीएम पद का दावेदार

इसके अलावा उन्होंने बहुत पहले खुद को मुख्यमंत्री पद का भी दावेदार बताया था। कंवर ने बताया था कि वे 2003 में भी मुख्यमंत्री पद के दावेदार थे। उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेता राजनाथ सिंह से कहा था कि मैं सीएम क्यों नहीं बन सकता हूं? अभी तक मैंने जो भी मंत्रालय संभाले हैं, उनमें बेहतर काम किया है।

बीजेपी की हार को लेकर साधा था निशाना

इसके साथ ही ननकीराम कंवर ने 2018 में पार्टी की हार को लेकर बीजेपी पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था कि विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार की वजह जमीनी स्तर पर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में असफल होना है। ननकी ने कहा था कि उन्होंने विधानसभा चुनाव 2018 से छह-सात माह पहले ही पार्टी के आलाकमान और तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह को जमीनी हकीकत से अवगत करा दिया था। उन्होंने कहा था कि जैसा कर्म करेंगे, वैसा ही फल मिलेगा।

अपनी पार्टी के विधायक की शिकायत प्रधानमंत्री से की थी

इसके अलावा इस साल फरवरी में बीजेपी के आदिवासी विधायक ननकीराम कंवर ने अपनी ही पार्टी के विधायक सौरभ सिंह की शिकायत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से की थी। उन्होंने जांजगीर जिले के अकलतरा विधायक सौरभ सिंह की शिकायत की थी। ननकीराम ने प्रधानमंत्री को लिखे अपनी चिट्ठी में कहा था कि अन्य जिले के विधायक सौरभ सिंह द्वारा बिना जानकारी दूसरे जिले के विषय में शासी परिषद की बैठक में अनुमोदन के संबंध में की गई शिकायत निराधार एवं तथ्यहीन है।

उन्होंने कहा था कि सौरभ सिंह कोरबा जिले के शासी परिषद की बैठक में भी नहीं थे, तो उन्हें कैसे पता चला कि कोरबा जिले के खनिज न्यास मद से क्या-क्या कार्य स्वीकृत किए गए हैं। अकलतरा विधायक द्वारा किया गया शिकायत निराधार एवं तथ्य एवं दुर्भावना से ग्रस्त होकर की गई है।

कांकेर में जनपद पंचायत अध्यक्ष रामचरण कोर्राम ने भी युवकों से की थी गालीगलौज।

कांकेर में जनपद पंचायत अध्यक्ष रामचरण कोर्राम ने भी युवकों से की थी गालीगलौज।

कांकेर में भी हफ्तेभर पहले बीजेपी नेता ने नशे में किया था हाईवोल्टेज ड्रामा

करीब 8 दिन पहले कांकेर में भी बीजेपी नेता, विश्व हिंदू परिषद के जिला अध्यक्ष और जनपद पंचायत अध्यक्ष रामचरण कोर्राम ने शराब के नशे में धुत होकर अपने ही गांव पुसवाड़ा के ग्रामीणों के साथ जमकर मारपीट करने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। ऊपर से उसने बेशर्मी से कहा था कि ”ये मेरा क्षेत्र है, मैंने मारा, ठीक किया।”

मारपीट के बाद अध्यक्ष द्वारा माफी मांगने का एक ऑडियो क्लिप भी वायरल हुआ था, जिसमें वो माफी मांगता तो सुनाई दिया, लेकिन अपने मारपीट किए जाने को सही भी ठहरा रहा था। इस बात को लेकर विवाद इतना बढ़ा था कि 28 अक्टूबर को पीड़ित गौठान समिति अध्यक्ष कुछ युवकों के साथ जनपद अध्यक्ष के खिलाफ FIR दर्ज कराने पुलिस अधीक्षक के पास पहुंचे थे। एसपी शलभ कुमार सिन्हा ने जांच के बाद उचित कार्रवाई करने की बात कही थी। 

कोरबा में भी वनकर्मियों ने बीजेपी नेता की पुलिस से शिकायत की थी।

कोरबा में भी वनकर्मियों ने बीजेपी नेता की पुलिस से शिकायत की थी।

बीजेपी नेता ने वनकर्मियों को पीटा था

इससे पहले कोरबा जिले से भी ऐसा ही मामला सामने आया था। 3 महीने पहले बीजेपी नेता ने अपने साथियों के साथ मिलकर वनकर्मियों को लात-घूसों से पीटा था। इसके अलावा उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी थी। पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था।

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