हिमाचल प्रदेश: नगर निगम चुनाव में बीजेपी को प्रचंड जीत, 4 में से 3 निगम पर कब्जा; कांग्रेस से छीनी धर्मशाला-सोलन, मंडी में सिर्फ एक पार्षद जीत सकी कांग्रेस

              शिमला: हिमाचल प्रदेश में चार नगर निगम चुनाव में बीजेपी को प्रचंड जीत और सत्तारूढ़ कांग्रेस को करारी हार मिली है। बीजेपी 4 में से 3 जगह चुनाव जीती है। सत्तारूढ़ कांग्रेस केवल पालमपुर में ही जीत पाई है। मई 2021 के चुनाव में कांग्रेस 3 नगर निगम में जीती थी। तब राज्य की सत्ता में बैठी बीजेपी केवल मंडी में जीती थी।

              राजनीति के जानकार- बताते हैं कि सुक्खू सरकार लोकप्रियता की कसौटी पर खरा नहीं उतर पाई। दिसंबर 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले नगर निगम के रिजल्ट कांग्रेस के लिए अच्छा संकेत नहीं है। इन चुनाव को सत्ता का सेमिफाइनल माना जा रहा था। मगर कांग्रेस सेमिफाइनल में 3-1 से हार गई है।

              कांग्रेस को सबसे बड़ा झटका सोलन और धर्मशाला में लगा है। जहां 2021 में दोनों जगह कांग्रेस की जीत हुई थी। पालमपुर के रिजल्ट कांग्रेस के लिए थोड़ी राहत वाले जरूर है। मगर मंडी, धर्मशाला और सोलन में कांग्रेस को झटका लगा है।

              मंडी नगर निगम चुनाव में जीत के बाद जश्न मनाते हुए बीजेपी समर्थक।

              मंडी नगर निगम चुनाव में जीत के बाद जश्न मनाते हुए बीजेपी समर्थक।

              सुक्खू के 50 लाख की घोषणा भी नहीं बदल पाई माहौल

              इन चुनावों में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने खुद मोर्चा संभाला था। उन्होंने चारों नगर निगम में जाकर चुनाव प्रचार किया था। मंडी में तो उन्होंने जनता से सीधे संवाद करते हुए वार्डों को 50-50 लाख रुपए की विकास राशि देने का वादा भी किया था। कांग्रेस नेतृत्व को उम्मीद थी कि सरकार की मौजूदगी और मुख्यमंत्री की सक्रियता का लाभ मिलेगा, लेकिन नतीजे इसके उलट आए।

              विक्रमादित्य-रोहित भी चुनाव नहीं जिता पाएं

              मंडी में कांग्रेस ने PWD मंत्री विक्रमादित्य सिंह, सोलन में शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर, पालमपुर में तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी और धर्मशाला नगर निगम में एचपी टूरिज्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के चेयरमैन आरएस बाली को प्रभारी नियुक्त किया था। अन्य मंत्रियों व विधायकों को भी चुनाव जिताने की जिम्मेदारी दी गई।

              रजनी पाटिल भी प्रचार में उतरी, हार नहीं टाल सकी

              प्रदेश कांग्रेस प्रभारी रजनी पाटिल ने भी चुनाव प्रचार में पूरी ताकत झोंकी, फिर भी पार्टी को अपेक्षित समर्थन नहीं मिला। इससे साफ संकेत गया कि स्थानीय स्तर पर कांग्रेस सरकार के प्रदर्शन को लेकर मतदाताओं में संतोष का माहौल नहीं बन पाया।

              बुटेल परिवार ने बचाई कांग्रेस की प्रतिष्ठा

              इन चुनावों में पालमपुर नगर निगम ने कांग्रेस की प्रतिष्ठा जरूर बचाई है। अगर पालमपुर में भी कांग्रेस हार जाती, तो चारों नगर निगमों में उसका सफाया होता। राजनीति के जानकार मानते है कि पालमपुर में कांग्रेस की जीत स्थानीय विधायक आशीष बुटेल और उनके पिता एवं पूर्व विधायक बीबीएल बुटेल के निजी जनाधार के कारण है।

              जनता ने कांग्रेस को उखाड़ फेंकने का मन बना लिया: जयराम

              इस जीत पर नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि जनता कांग्रेस को उखाड़ फेंकना चाहती है। इसकी शुरुआत हो गई है। आने वाले समय में कांग्रेस नाम की भी नहीं रहेगी। मंडी में 14 से कांग्रेस को 1 सीट मिली है।

              क्या यह 2027 का ट्रेंड है?

              स्थानीय निकाय चुनावों को सीधे विधानसभा चुनावों का प्रतिबिंब नहीं माना जाता, लेकिन राजनीतिक संकेत जरूर निकलते हैं। तीन नगर निगमों में बीजेपी की बढ़त यह दर्शाती है कि विपक्ष अभी मजबूत स्थिति में है और सत्तारूढ़ कांग्रेस के सामने जनाधार बनाए रखने की चुनौती बनी हुई है।

              बीजेपी के लिए ये परिणाम कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने वाले हैं। वहीं कांग्रेस को संगठन और सरकार दोनों स्तर पर आत्ममंथन करना पड़ेगा कि सत्ता में होने के बावजूद वह शहरी मतदाताओं का भरोसा क्यों नहीं जीत सकी।


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