झारखंड: प्रदेश के चाईबासा में जंगली हाथी ने मंगलवार रात 6 लोगों को कुचलकर मार डाला। यह सभी अपने घर में सो रहे थे। यह हाथी पिछले 6 दिन में इलाके के 16 लोगों की जान ले चुका है।
वन विभाग इसे पकड़ने में कामयाब नहीं हो पाया है। ऐसे में वन विभाग के अफसरों ने अनंत अंबानी के वन्यजीव संरक्षण संगठन ‘वनतारा’ से मदद मांगी है।
एक रेलवे अधिकारी ने बताया कि हाथियों की आवाजाही के कारण दक्षिण पूर्वी रेलवे के चक्रधरपुर डिवीजन में छह जोड़ी ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं।

मरने वाले सभी 6 लोग एक ही घर में थे
मंगलवार रात चाईबासा जिले के नोवामुंडी प्रखंड के जेटिया पंचायत के भरबरिया गांव में हाथी ने जिन 6 लोगों को कुचलकर मार डाला, वह एक ही घर में सो रहे थे। रात करीब 10 बजे जब सभी सो रहे थे, तभी अचानक हाथी ने घर पर हमला कर दिया। हमले में सनातन मेराल, उनकी पत्नी जोंकों कुई, उनके दो बच्चे और परिवार के दो और सदस्य मारे गए। एक बच्चा किसी तरह जान बचाकर भागने में सफल रहा। हमले में घर के दो अन्य लोग गंभीर घायल हैं।
हाथी बहुत तेजी से अपनी लोकेशन बदल रहा: डीएफओ
चाईबासा के डीएफओ आदित्य नारायण ने कहा हाथी बहुत तेजी से अपनी लोकेशन बदल रहा है, जिससे उसे लगातार ट्रेस कर पाना वन विभाग की टीमों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। पश्चिम बंगाल से विशेषज्ञ टीम को बुलाया गया है, जो हाथी को ट्रेंकुलाइज कर काबू करने में मदद करेगी।
इसके साथ ही वन्यजीव संरक्षण संगठन ‘वनतारा’ की टीम को भी बुलाया गया है। उनके आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। वन विभाग की पूरी टीम प्रभावित इलाकों में लगातार घूम रही है, ड्रोन और अन्य संसाधनों की मदद से हाथी की मूवमेंट पर निगरानी रखी जा रही है, ताकि किसी भी नए गांव में नुकसान होने से पहले अलर्ट किया जा सके।
दिनभर जंगल में छिपकर रहता है हाथी
सरकार और प्रशासन के लिए सिर दर्द बना हाथी दिनभर जंगल में छिपकर रहता है। अंधेरा होते ही वह गांवों की ओर मूव करता है। इस दौरान रास्ते में दिखने वाले घरों पर अटैक करता है। सोते हुए लोगों को भी हाथी पटक कर और घसीटकर मार रहा है।
अब थर्मल सेंसर ड्रोन से चौकसी होगी
वन विभाग की तकनीकी टीम अब हाथी का पता लगाने के लिए रात को थर्मल सेंसर ड्रोन उड़ाएगी। बुधवार शाम को तकनीकी टीम पहुंच गई है।

गोइलकेरा प्रखंड के सोवां गांव में सोमवार की रात हाथी ने घरों पर हमला किया।
इन 3 कारणों से आक्रामक हो जाता है हाथी
दलमा वन क्षेत्र के वन्य प्राणी रिसर्चर व विशेषज्ञ राजा घोष के अनुसार, हाथियों के आक्रामक होने के 3 कारण हैं-
- नर हाथियों में हार्मोनल अवस्था आती है, जिसे ‘मस्त’ कहते हैं। इस दौरान शरीर में टेस्टोस्टेरोन का स्तर 60 गुना तक बढ़ जाता है। हाथी के कनपटी से गाढ़ा गंधयुक्त तरल पदार्थ निकलता है, जिसे मद कहा जाता है। इससे वह अत्यधिक आक्रामक हो जाता है।
- कई बार नर हाथी को उसकी हरकतों के कारण हथिनी समूह से अलग कर देती है। इससे वह चिड़चिड़ा हो जाता है।
- हाथियों के हैबिटेट्स रूट पर गांवों से निकलकर लोग जंगली इलाकों में बसने लगे हैं। इससे हाथी गुस्सैल होकर हमला कर देता है।
पीड़ित परिवारों से मिले पूर्व सीएम मधु कोड़ा

नोवामुंडी प्रखंड के जेटिया पंचायत के भरबरिया गांव में शव के पास जुटी लोगों की भीड़।
पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा ने पीड़ितों के परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि वन विभाग की ओर से पहले ग्राम समिति के सदस्यों को हाथियों के झुंड को भगाने के लिए मशालें और पटाखे बांटते थे, लेकिन अब बंद कर दिया गया है। सरकार हाथी के हमलों में अनाथ हुए नाबालिग बच्चों का पुनर्वास करें और उनकी शिक्षा का खर्च वहन करें।

(Bureau Chief, Korba)




