Friday, February 13, 2026

              छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में बड़ी कार्रवाई… ED ने पूर्व सीएम के बेटे की 61.20 करोड़ की संपत्ति अटैच की, कहा- सिंडिकेट का प्रमुख था चैतन्य बघेल, अवैध कमाई को रियल एस्टेट बिजनेस में लगाया

              रायपुर: छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व सीएम भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की 61.20 करोड़ रुपए की संपत्ति अटैच की है। ईडी के अधिकारियों के मुताबिक, अटैच की गई संपत्तियों में 364 आवासीय प्लॉट और कृषि भूमि के टुकड़े शामिल हैं।

              जिनकी कीमत 59.96 करोड़ रुपए है। इसके अलावा 1.24 करोड़ रुपए की चल संपत्तियां बैंक बैलेंस और फिक्स्ड डिपॉजिट भी जब्त की गई हैं। शराब घोटाला मामले में अब तक कुल 276 करोड़ की संपत्ति अटैच की जा चुकी है।

              वहीं कांग्रेस ने इसे विद्वेषपूर्ण कार्रवाई बताया है। संचार विभाग प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि पैतृक संपत्ति को अटैच किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ की जनता कभी माफ नहीं करेगी।

              पूर्व CM भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य को ईडी ने 8 जुलाई 2025 को गिरफ्तार किया था।

              पूर्व CM भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य को ईडी ने 8 जुलाई 2025 को गिरफ्तार किया था।

              शराब घोटाले में 2500 करोड़ की अवैध कमाई

              ईडी ने यह जांच एसीबी ईओडब्ल्यू रायपुर द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। एफआईआर में आईपीसी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धाराएं लगाई गई थीं।

              जांच में पता चला कि इस घोटाले से राज्य सरकार के खजाने को भारी नुकसान हुआ और करीब 2500 करोड़ रुपए की अवैध कमाई का खेल चला।

              चैतन्य बघेल सिंडिकेट का प्रमुख था

              ईडी की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है कि चैतन्य बघेल शराब सिंडिकेट के सर्वोच्च स्तर पर था। उसकी स्थिति और राजनीतिक प्रभाव के कारण वही पूरे नेटवर्क का नियंत्रक और फैसले लेने वाला व्यक्ति था।

              सिंडिकेट द्वारा इकट्ठा की गई अवैध रकम का हिसाब वही रखता था। कलेक्शन, चैनलाइजेशन और वितरण से जुड़े सभी प्रमुख फैसले उसके डायरेक्शन पर लिए जाते थे।

              ईडी ने बताया कि चैतन्य ने शराब घोटाले से कमाई गई रकम को अपने रियल एस्टेट बिजनेस में लगाया। तस्वीर पेशी के दौरान की है।

              ईडी ने बताया कि चैतन्य ने शराब घोटाले से कमाई गई रकम को अपने रियल एस्टेट बिजनेस में लगाया। तस्वीर पेशी के दौरान की है।

              अवैध कमाई को ‘विठ्ठल ग्रीन’ में लगाया गया

              ईडी ने बताया कि चैतन्य ने शराब घोटाले से कमाई की गई रकम को अपने रियल एस्टेट बिजनेस में लगाया और उसे वैध संपत्ति के रूप में दिखाने की कोशिश की।

              उसने यह पैसा अपनी फर्म एम/एस बघेल डेवलपर्स के तहत संचालित प्रोजेक्ट ‘विठ्ठल ग्रीन’ में लगाया। ईडी ने चैतन्य बघेल को 18 जुलाई 2025 को गिरफ्तार किया था और वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में है।

              पहले भी हो चुकी है 215 करोड़ की कुर्की

              ईडी ने 18 जुलाई 2025 को चैतन्य बघेल को गिरफ्तार किया था और वे वर्तमान में न्यायिक हिरासत में हैं। इससे पहले पूर्व IAS अनिल टूटेजा, अरविंद सिंह, त्रिलोक सिंह ढिल्लन, अनवर ढेबर, आबकारी विभाग के अधिकारी अरुण पति त्रिपाठी (ITS) और कवासी लखमा (पूर्व आबकारी मंत्री और वर्तमान विधायक) को भी ईडी ने गिरफ्तार किया था। इनकी संपत्ति भी अटैच की गई थी।

              प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), रायपुर ज़ोनल कार्यालय ने 10 नवंबर को मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के प्रावधानों के तहत छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की चल रही जांच के संबंध में चैतन्य बघेल की 61.20 करोड़ रुपए मूल्य की संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क (अटैच) किया है।

              अलग-अलग धाराओं में मामला दर्ज

              ईडी ने यह जांच भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB)/आर्थिक अपराध शाखा (EOW), रायपुर, छत्तीसगढ़ द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। यह एफआईआर भारतीय दंड संहिता (IPC), 1860 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की अलग-अलग धाराओं के तहत राज्य के शराब घोटाले के संबंध में दर्ज की गई थी।

              पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से राज्य के कोष को भारी नुकसान हुआ और लाभार्थियों ने लगभग 2500 करोड़ रुपए की अवैध आय अर्जित की।

              सिंडिकेट के नियंत्रक, अंतिम निर्णय लेने वाले व्यक्ति थे चैतन्य

              PMLA के तहत की गई जांच में यह सामने आया कि चैतन्य बघेल शराब सिंडिकेट के शीर्ष पर थे। तत्कालीन मुख्यमंत्री के बेटे होने के कारण वे इस सिंडिकेट के नियंत्रक और अंतिम निर्णय लेने वाले व्यक्ति थे।

              वे सभी अवैध रूप से एकत्र किए गए धन का हिसाब रखते थे। सिंडिकेट द्वारा एकत्रित, चैनलाइज और वितरित की जाने वाली अवैध रकम (POC) से संबंधित सभी प्रमुख निर्णय उनके निर्देश पर लिए जाते थे।

              ईडी की जांच में यह भी स्थापित हुआ कि चैतन्य बघेल खुद इस अवैध आय (POC) के प्राप्तकर्ता थे, जिसे उन्होंने अपने रियल एस्टेट व्यवसाय के माध्यम से लेयरिंग कर ‘वैध’ संपत्तियों के रूप में दिखाया।

              उन्होंने शराब घोटाले से प्राप्त धन का उपयोग अपने रियल एस्टेट प्रोजेक्ट “विठ्ठल ग्रीन” (जो कि उनकी स्वामित्व फर्म एम/एस बघेल डेवलपर्स के तहत संचालित थी) के डेवलपमेंट में किया।

              जानिए क्या है छत्तीसगढ़ का शराब घोटाला

              छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में ED जांच कर रही है। ED ने ACB में FIR दर्ज कराई है। दर्ज FIR में 2 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के घोटाले की बात कही गई है।

              ED ने अपनी जांच में पाया कि तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में IAS अफसर अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी AP त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के सिंडिकेट के जरिए घोटाले को अंजाम दिया गया था।

              A, B और C कैटेगरी में बांटकर किया गया घोटाला

              A: डिस्टलरी संचालकों से कमीशन

              2019 में डिस्टलरी संचालकों से प्रति पेटी 75 रुपए और बाद के सालों में 100 रुपए कमीशन लिया जाता था। कमीशन को देने में डिस्टलरी संचालकों को नुकसान ना हो, इसलिए नए टेंडर में शराब की कीमतों को बढ़ाया गया। साथ ही फर्म में सामान खरीदी करने के लिए ओवर बिलिंग करने की राहत दी गई।

              B: नकली होलोग्राम वाली शराब को सरकारी दुकानों से बिकवाना

              • डिस्टलरी मालिक से ज्यादा शराब बनवाई। नकली होलोग्राम लगाकर सरकारी दुकानों से बिक्री करवाई गई। नकली होलोग्राम मिलने में आसानी हो, इसलिए एपी त्रिपाठी के माध्यम से होलोग्राम सप्लायर विधु गुप्ता को तैयार किया गया। होलोग्राम के साथ ही शराब की खाली बोतल की जरूरत थी। खाली बोतल डिस्टलरी पहुंचाने की जिम्मेदारी अरविंद सिंह और उसके भतीजे अमित सिंह को दी गई।
              • खाली बोतल पहुंचाने के अलावा अरविंद सिंह और अमित सिंह को नकली होलोग्राम वाली शराब के परिवहन की जिम्मेदारी भी मिली। सिंडिकेट में दुकान में काम करने वाले और आबकारी अधिकारियों को शामिल करने की जिम्मेदारी एपी त्रिपाठी को सिंडिकेट के कोर ग्रुप के सदस्यों ने दी।
              • शराब बेचने के लिए प्रदेश के 15 जिलों को चुना गया। शराब खपाने का रिकॉर्ड सरकारी कागजों में ना चढ़ाने की नसीहत दुकान संचालकों को दी गई। डुप्लीकेट होलोग्राम वाली शराब बिना शुल्क अदा किए दुकानों तक पहुंचाई गई। इसकी एमआरपी सिंडिकेट के सदस्यों ने शुरुआत में प्रति पेटी 2880 रुपए रखी थी। इनकी खपत शुरू हुई, तो सिंडिकेट के सदस्यों ने इसकी कीमत 3840 रुपए कर दी।
              • डिस्टलरी मालिकों को शराब सप्लाई करने पर शुरुआत में प्रति पेटी 560 रुपए दिया जाता था, जो बाद में 600 रुपए कर दिया गया था। ACB को जांच के दौरान साक्ष्य मिला है कि सिंडिकेट के सदस्यों ने दुकान कर्मचारियों और आबकारी अधिकारियों की मिलीभगत से 40 लाख पेटी से अधिकारी शराब बेची है।

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