नई दिल्ली: गृह मंत्रालय की शिकायत पर गूगल ने 3 और फर्जी लोन एप्स को प्ले स्टोर से हटा दिया है। इस महीने में अब तक 9 ऐसे ठग एप्स बंद कराए जा चुके हैं। ये एप्स न सिर्फ आपकी निजी जानकारी चुराते हैं, बल्कि लोन देने के बाद बहुत ज्यादा ब्याज मांगते हैं और प्रताड़ित करते हैं।
इस Q&A गाइड के जरिए जानिए फर्जी लोन एप्स से बचने और सुरक्षित रहने के आसान तरीके…
सवाल 1. सरकार ने किन 3 नए लोन एप्स पर कार्रवाई की है और इन पर क्या आरोप हैं?
जवाब: गृह मंत्रालय की साइबर सुरक्षा टीम (I4C) ने 19 अगस्त को गूगल को एक नोटिस भेजकर 3 फर्जी लोन ऐप्स को तुरंत हटाने के लिए कहा। इन 3 एप्स के नाम हैं: होराइजन कैश सर्विस, मनी स्कोर मॉनिटर, और जेलीक्रेडिट। आरोप है कि ये एप्स कम ब्याज पर 5 मिनट में लोन देने का लालच देकर लोगों को फंसाते थे और बाद में उनसे भारी-भरकम ब्याज और पेनाल्टी वसूलते थे।
सवाल 2. ये एप्स मोबाइल से आपकी क्या-क्या निजी जानकारी चुरा रहे थे?
जवाब: जैसे ही कोई यूजर इन एप्स को फोन में डाउनलोड करता था, ये एप्स चुपके से फोन की पूरी जानकारी चुरा लेते थे। इनमें पहचान पत्र, बैंक खाते से जुड़ी जानकारी, फोन में मौजूद कांटेक्ट लिस्ट (रिश्तेदारों और दोस्तों के नंबर), फोटो गैलरी और कैमरे का एक्सेस शामिल है। बाद में ये ठग इसी जानकारी का इस्तेमाल करके लोगों को ब्लैकमेल करते थे।
सवाल 3. गूगल ने इन एप्स पर कितनी जल्दी कार्रवाई की और किस नियम के तहत हटाया?
जवाब: सरकारी एजेंसी ने गूगल को नोटिस मिलने के सिर्फ 3 घंटे के भीतर इन तीनों एप्स को प्ले स्टोर से हटाने का आदेश दिया था। यह कार्रवाई सूचना प्रौद्योगिकी कानून की धाराओं के तहत की गई है। गूगल ने सरकार के आदेश को तुरंत मानते हुए इन तीनों एप्स को प्ले स्टोर से हटा दिया है।
सवाल 4. क्या इस महीने में ऐसे किसी और एप्स पर भी कार्रवाई हुई है?
जवाब: हां, इससे पहले 7 अगस्त को भी सरकार ने गूगल को 6 फर्जी लोन एप्स हटाने को कहा था। उन एप्स के नाम थे: लोन ऑर्बिट, हिसाब, नेक्स्स लोन, वन फंड, क्रेडिट फैक्टर और मोबाइल क्रेडिड। यानी केवल अगस्त में ही कुल 9 एपर को बंद किया है जो आम लोगों को अपना शिकार बना रहे थे।
सवाल 5. ये फर्जी एप्स लोगों को अपने जाल में कैसे फंसाते हैं?
जवाब: ये एप्स गूगल प्ले स्टोर और सोशल मीडिया पर विज्ञापन चलाते हैं। विज्ञापनों में लिखा होता है- “बिना किसी दस्तावेज, बिना सिबिल स्कोर के 5 मिनट में ₹50,000 का लोन पाएं।” जो लोग किसी जरूरत या मजबूरी में होते हैं, वे ऐसे विज्ञापन देखकर झांसे में आ जाते हैं और एप डाउनलोड कर लेते हैं।
सवाल 6. क्या सरकार लोन ऐप्स के अलावा भी अन्य फर्जी वेबसाइट्स पर कोई कदम उठा रही है?
जवाब: जी हां, सरकार अब लोन एप्स के साथ-साथ इंटरनेट पर ठगी करने वाली वेबसाइट्स पर भी कार्रवाई कर रही है। इसी महीने सरकार ने गूगल के सर्वर फायरबेस पर चल रही करीब 57 फर्जी वेबसाइट्स और डेटाबेस को बंद करने के निर्देश दिए। ये वेबसाइट्स लोगों के फोन में वायरस फैलाकर उनके बैंक खातों की जानकारी चुरा रही थीं।
सवाल 7. किसी भी लोन एप से पैसे लेने से पहले असली और फर्जी एप की पहचान कैसे करें?
जवाब: अगर आपको कभी ऑनलाइन लोन लेना हो, तो इन 3 आसान तरीकों से पहचान करें:
RBI की मंजूरी जांचें: कोई भी असली लोन एप किसी न किसी रजिस्टर्ड बैंक या NBFC से जुड़ा होता है। एप के डिटेल में उस बैंक या कंपनी का नाम जरूर लिखा होता है।
RBI वेबसाइट पर मिलाएं: RBI की वेबसाइट पर जाकर चेक करें कि कंपनी रजिस्टर्ड है। असली कंपनियों का पक्का दफ्तर, लैंडलाइन नंबर और ईमेल आईडी होती है।
सवाल 8. फोन में एप डाउनलोड करते समय किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
जवाब: सुरक्षा के लिए इन 4 बातों का हमेशा ध्यान रखें:
- गलत परमिशन न दें: अगर कोई लोन एप आपसे फोन की कांटेक्ट लिस्ट, फोटो गैलरी की परमिशन मांगे, तो एप तुरंत हटा दें। लोन देने के लिए कांटेक्ट्स की कोई जरूरत नहीं होती।
- पहले पैसे न दें: अगर लोन मिलने से पहले एप आपसे प्रोसेसिंग फीस या फाइल चार्ज के नाम पर पैसे मांगे, तो समझ जाएं कि वह ठग है। असली कंपनियां फीस काटकर पैसे देती है।
- लोगों के रिव्यूज पढ़ें: प्ले स्टोर पर एप डाउनलोड करने से पहले खराब रिव्यूज (1-स्टार) ध्यान से पढ़ें। अगर लोन एप असली होंगे तो उसके रिव्यूज भी अच्छे और ज्यादा हो सकते हैं।
- लिंक से एप डाउनलोड न करें: किसी अनजान मैसेज, वॉट्सएप या लिंक से आई APK फाइल को इंस्टॉल न करें। केवल ऑफिशियल प्ले स्टोर से ही ऐप डाउनलोड करें।
सवाल 9. अगर कोई गलती से फर्जी एप के जाल में फंस जाए, तो वह क्या करे?
जवाब: अगर कोई फर्जी एप आपको परेशान कर रहा है तो तुरंत ये कदम उठाएं:
- हेल्पलाइन पर कॉल करें: तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें।
- ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें: cybercrime.gov.in पर जाकर अपनी शिकायत दर्ज करवाएं।
- पुलिस में शिकायत करें: अपने पास के थाने की साइबर सेल में शिकायत दें।
- फोन से एप हटाएं: उस एप को तुरंत फोन से डिलीट करें।
I4C और सरकारी नियम क्या हैं?
- I4C (साइबरक्राइम सेंटर): यह गृह मंत्रालय की एक खास टीम है, जिसका काम देश में ऑनलाइन ठगी और साइबर अपराधों को रोकना है।
- सरकारी नियम (IT Act 79): इस नियम का मतलब है कि अगर सरकार किसी कंपनीको किसी गलत या खतरनाक एप के बारे में बताएगी, तो कंपनी को उसे तुरंत हटाना पड़ेगा।
आपके लिए जरूरी सलाह: कभी भी पैसों के लालच में आकर किसी भी अनजान एप को अपने मोबाइल की कांटेक्ट लिस्ट या फोटो गैलरी देखने की छूट न दें।

(Bureau Chief, Korba)





