नई दिल्ली: भारत अब ‘नॉन-कंटैक्ट वारफेयर’ की तैयारी कर रहा, अनंत शस्त्र समेत 6 प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू, सरकार इन पर 2.19 लाख करोड़ खर्च करेगी

              नई दिल्ली: ईरान जंग के बीच भारत अब ‘नॉन-कंटैक्ट वारफेयर’ यानी बिना आमने-सामने आए लड़ी जाने वाली जंग के लिए खुद को तैयार कर रहा है। सरकार अपनी सैन्य शक्ति को भविष्य की जरूरतों के मुताबिक ढालने के लिए सबसे बेहतर रक्षा तकनीकों पर तेजी से काम कर रही है।

              भारत ने न केवल 5th जेनरेशन(AMCA), बल्कि अब आधिकारिक तौर पर 6th जेनरेशन के फाइटर जेट्स के डिजाइन पर भी काम शुरू कर दिया है। साथ ही स्वदेशी एस-400 (LRSAM) जैसी लंबी दूरी की मिसाइल सिक्योरिटी सिस्टम, ड्रोन को तबाह करने वाले ‘अनंत शस्त्र’ (QRSAM) पर भी युद्धस्तर पर काम शुरू हो चुका है।

              संसद में पेश की गई रक्षा समिति की रिपोर्ट्स में इसका खुलासा हुआ है। भारत फाइटर जेट्स के लिए शक्तिशाली स्वदेशी इंजन, नौसेना के लिए अभेद सुरक्षा कवच और AI व साइबर डिफेंस जैसे प्रोजेक्ट्स डेवलप कर रहा है। इसके अलावा अस्त्र, नाग और ध्रुवास्त्र जैसी मिसाइलों के मार्क-II वेरिएंट पर काम हो रहा है।

              उड़ते हुए कमांड सेंटर की तरह काम कर सकेगा ‘6th जेन’ विमान

              देश का रक्षा दृष्टिकोण अब ‘नॉन-कॉन्टैक्ट वॉरफेयर’ की चुनौतियों को देखते हुए आक्रामक और रक्षात्मक प्रौद्योगिकियों के बीच एक सटीक संतुलन बनाने पर केंद्रित है।

              भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान अपनी क्षमताओं को साबित किया था। अब 5th जेनरेशन के विमानों और 6th जेनरेशन की सोच (जैसे हाइपरसोनिक स्पीड और सी4आईएसआर सिस्टम) के साथ भविष्य के युद्धक्षेत्र के लिए पूरी तरह तैयार है।

              डिफेंस इन्वेस्टेमेंट के लिए 2 लाख करोड़ से ज्यादा आवंटित

              देश को मॉडर्न वॉरफेयर में सक्षम बनाने के लिए सरकार ने इसके लिए भारी-भरकम बजट का प्रावधान किया है। रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए डिफेंस इन्वेस्टमेंट में खर्च के लिए में 2,19,306.47 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

              यह पिछले वर्ष के बजट अनुमान से 21.84% अधिक है। इसका बड़ा हिस्सा केवल सशस्त्र बलों के मॉडर्नाइजेशन और नए हथियारों की खरीद के लिए सुरक्षित रखा गया है।

              ये टारगेट्स प्राइयॉरिटी पर…

              • AI-साइबर डिफेंस: डीआरडीओ के बजट का बड़ा हिस्सा एआई हथियारों, साइबर सुरक्षा को बेहतर बनाने, दुश्मन के ऐसे ही हमलों को रोकने की तकनीक पर खर्च होगा।
              • नौसेना का सुरक्षा कवच: समुद्र में दुश्मनों के हमलों को नाकाम करने के लिए ‘एडवांस्ड टॉरपीडो डिफेंस सिस्टम’ व ‘एंटी-ड्रोन सिस्टम’ तैयार किया जा रहा है। ‘इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर’ सिस्टम पर भी जोर।
              • अनंत शस्त्र: यह एक ‘क्विक रिएक्शन सरफेस-टू-एयर मिसाइल’ सिस्टम है। यह विशेष रूप से दुश्मन के कई ड्रोन्स और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले खतरों को पलक झपकते ही नष्ट करने के लिए तैयार की गई है।
              • स्वदेशी S-400: रूस की S-400 की तर्ज पर भारत खुद का ‘लॉन्ग रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल’ सिस्टम विकसित कर रहा है। यह लंबी दूरी तक दुश्मन के विमानों और मिसाइलों को मार गिराने में सक्षम होगा। इसका उद्देश्य देश को दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइलों और लड़ाकू विमानों से सुरक्षित करना है।
              • 5th जेनरेशन के विमान: स्वदेशी 5th जेनरेशन के विमान ‘एएमसीए’ (एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) का डिजाइन तैयार हो चुका है। संसदीय रिपोर्ट के अनुसार, अब यह ड्राइंग बोर्ड से निकलकर विकास के चरण में है। वर्तमान में इसके निर्माण की जिम्मेदारी तय करने पर विचार चल रहा है।

              रक्षा बजट में 10 साल में सबसे बड़ा इजाफा, फाइटर जेट्स और इंजनों के लिए 64 हजार करोड़

              1 फरवरी को पेश हुए बजट पर ऑपरेशन सिंदूर का साफ असर दिखा। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने रक्षा बजट में पिछले 10 सालों का सबसे बड़ा इजाफा किया है। उन्होंने तीनों सेनाओं के लिए कुल 7.84 लाख करोड़ रुपए दिए हैं। यह 2025-26 के मुकाबले करीब 1 लाख करोड़ रुपए ज्यादा है। यानी कुल 15% की बढ़ोतरी हुई है।

              22 अप्रैल 2025 को पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। सरकार के मुताबिक 6 मई से शुरू हुआ यह ऑपरेशन आज भी चल रहा है। माना जा रहा है कि इसी के चलते डिफेंस बजट में बढोतरी की गई है।


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