Monday, January 12, 2026

              नई दिल्ली: जुलाई में भारत की बेरोजगारी दर घटकर 5.2% हुई, बीते 3 महीनों में सबसे कम, गांव के मुकाबले शहरों में बेरोजगारी ज्यादा

              नई दिल्ली: जुलाई 2025 में भारत की बेरोजगारी दर घटकर 5.2% पर आ गई है। यह पिछले 3 महीनों में सबसे कम है। जून में बेरोजगारी दर 5.6% थी। केंद्र सरकार के सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने सोमवार को बेरोजगारी दर के आंकड़े जारी किए हैं।

              रिपोर्ट के मुताबिक शहरी क्षेत्रों में नौकरियों की संख्या में इजाफा हुआ है। नई इंडस्ट्रीज जैसे आईटी, टेलिकॉम, मैन्युफैक्चरिंग और रिटेल सेक्टर ने रोजगार का ग्राफ ऊपर किया है। हालांकि गांव के मुकाबले शहरों में बेरोजगारी ज्यादा है। छोटे और मध्यम उद्योगों में भी भर्तियां बढ़ी हैं, जिससे गांव और कस्बों में रोजगार का स्तर सुधरा है।

              पुरुषों के मुकाबले महिलाओं की बेरोजगारी दर ज्यादा

              ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी दर 4.4% रही, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 7.2% है। पुरुषों की बेरोजगारी दर (4.6%) की तुलना में महिलाओं में यह दर (8.7%) ज्यादा है, खासकर शहरी क्षेत्रों में। यह डेटा बताता है कि शहरों में महिलाओं को रोजगार ढूंढने में पुरुषों की तुलना में अधिक कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।

              कामगार-जनसंख्या अनुपात (WPR) भी सुधरा

              जुलाई 2025 में, 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों के लिए श्रमिक जनसंख्या अनुपात (WPR) 52.0% है। WPR यह बताता है कि कुल आबादी में से कितने लोग वास्तव में रोजगार में हैं।

              ग्रामीण क्षेत्रों में WPR 54.4% था, जो शहरी क्षेत्रों के 47.0% से ज्यादा है। ग्रामीण क्षेत्रों में महिला WPR 35.5% था, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 23.5% था। इससे पता चलता है कि ग्रामीण भारत में महिलाओं की कार्यबल में भागीदारी शहरी महिलाओं की तुलना में अधिक है।

              श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) में बढ़ोतरी

              जुलाई 2025 में, 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों के लिए श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) 54.9% रही। LFPR का मतलब है कि काम करने के लिए उपलब्ध या काम कर रहे लोगों की कुल संख्या। शहरी क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में LFPR ज्यादा रही। गांव में ये 56.9% थी, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 50.7% रही। जेंडर के आधार पर पुरुषों की LFPR (77.1%) महिलाओं की 33.3% की तुलना में बहुत ज्यादा रही।

              यह डेटा बताता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने के इच्छुक लोगों की संख्या शहरी क्षेत्रों की तुलना में अधिक है।

              श्रम शक्ति भागीदारी दर (LFPR) क्या है?

              श्रम शक्ति भागीदारी दर ( लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट) वह प्रतिशत है, जो बताता है कि कुल जनसंख्या में से कितने लोग काम कर रहे हैं या नौकरी की तलाश में हैं। यानी, यह उन लोगों का अनुपात है जो या तो काम में लगे हैं या बेरोजगार हैं, लेकिन काम करने के लिए तैयार हैं।

              अगर 100 में से 60 लोग काम कर रहे हैं या नौकरी तलाश रहे हैं, तो LFPR 60% होगा। यह ज्यादा होगा तो इसका मतलब है कि लोग काम करने के लिए उत्साहित हैं।


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