नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को एक्सप्रेस ग्रुप द्वारा आयोजित छठवें रामनाथ गोयनका व्याख्यान को संबोधित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बिहार के नतीजे, हमें ये सबक देते हैं कि आप आज किस तरह की सरकार चला रहे हैं। उन्होंने कहा-
RJD की सरकार को बिहार के लोगों ने 15 साल मौका दिया। लालू यादव चाहते तो विकास कर सकते थे, लेकिन उन्होंने जंगलराज चुना। बिहार के लोग इस विश्वासघात को सहन नहीं कर सकते थे। मैं हर दल और राज्य की सरकार से कहना चाहूंगा कि सरकारों की प्राथमिकता सिर्फ विकास होनी चाहिए।
बिहार के नतीजे आने के बाद लोग कहते हैं कि मोदी और भाजपा हमेशा इलेक्शन मोड में रहते हैं। मैं कहता हूं कि इलेक्शन नहीं, इमोशनल मोड होना जरूरी होता है। मन में बेचैनी होती है कि एक मिनट भी नहीं गंवाना है। उसके नतीजे हमें चुनाव परिणाम के दिन दिखाई देते हैं।
मोदी ने कहा कि 21वीं सदी के 25 साल तेजी से बीते। एक से बढ़कर एक चुनौती आईं, लेकिन वे भारत की रफ्तार नहीं रोक पाईं। पिछले 4-5 साल चुनौती भरे रहे हैं। 2020 में कोरोना महामारी आई। इससे पूरे विश्व में चिंताएं बढ़ी, पूरा विश्व निराशा की ओर जाने लगा।
कुछ समय बाद हमारे पड़ोसी देशों में उथल-पुथल हुई। इसके बावजूद हमारी इकोनॉमी तेजी से बढ़ी। 2023 में दुनिया में स्थिति बिगड़ी तब भी हमारी इकोनॉमी बढ़ी है। आज भी हमारी ग्रोथ 7 फीसदी के करीब है।

मोदी की स्पीच की बड़ी बातें…
हमारे एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट प्लान को देखिए। पहले की सरकारों ने इन जिलों को पिछड़ा मान कर छोड़ दिया था। अधिकारियों को सजा देने के लिए इन जिलों को जाना जाता था। अगर ये जिले पिछड़े ही रहते तो भारत अगले 100 साल में भी विकसित नहीं हो पाता।
हमने राज्य सरकारों को ऑनबोर्ड लिया। सारे पैरमीटर्स को जाना। यंग माइंड्स को वहां नियुक्त किया। इन जिलों को पिछड़ा नहीं, एस्पिरेशनल माना। आज ये जिले अपने ही राज्यों के जिलों से बेहतर कर रहे हैं।
छत्तीसगढ़ के बस्तर में जब पत्रकारों को वहां जाना पड़ता था। तब प्रशासन से ज्यादा दूसरे दलों से वहां जाने की परमिशन लेनी पड़ती थी। अब वहां के युवा बस्तर ओलंपिक का आयोजन कर रहे हैं। पूरे देश में माओवादवाद, नक्सलवाद का दायरा तेजी से सिमट रहा है। कांग्रेस में ये लगातार बढ़ रहा था।
भारत के 94 करोड़ लोग सोशल सिक्योरिटी के दायरे में आ चुके हैं। 10 साल पहले केवल 25 करोड़ इसके दायरे थे। केवल इनके पास सरकार की सामाजिक न्याय का फायदा पहुंच रहा था। हमने केवल इसका दायरा नहीं बढ़ाया। हम लगातार सेचुरेशन पर काम रहे हैं। जिससे कोई भी इस लाभ से छूटे नहीं।
बिहार के नतीजों के साथ एक और बात बहुत अहम रही है। कोई भी लोकतंत्र में लोगों की बढ़ती भागीदारी को नजरअंदाज नहीं कर सकता है। इस बार बिहार में सबसे ज्यादा वोटर टर्नआउट रहा है। महिलाओं को टर्नआउट पुरुषों से ज्यादा 9 फीसदी रहा है। बिहार के नतीजों ने बताया है कि भारत के लोगों की आशाएं कितनी ज्यादा हैं। लोग उन राजनीतिक दलों पर विश्वास करते हैं जो लोगों की एस्पीरेशन को प्राथमिकता देते हैं।
उन्होंने कहा कि 21वीं सदी के इस कालखंड में भारत जब आगे बढ़ रहा है तब रामनाथ का विजन हमारी बहुत बड़ी प्रेरणा है। आज दुनिया डर रही है। भारत वाइब्रेंट ताकत की ओर बढ़ रहा है। भारत इमर्जिंग मार्केट ही नहीं है। भारत एक मॉडल मार्केट है। लोकतंत्र में लोगों की भागीदारी भी एक कसौटी होती थी। लोग कितने आशावादी, आश्वस्त हैं, ये चुनाव के दौरान दिखता है।
एक्सप्रेस ग्रुप के संस्थापक रामनाथ गोयनका के नाम पर स्थापित यह व्याख्यान मीडिया, लोकतंत्र और जवाबदेही पर गहन संवाद का प्रमुख मंच माना जाता है। यह व्याख्यान उन व्यक्तियों को मंच देता है जिन्होंने बदलाव की दिशा तय की हो और समकालीन चुनौतियों पर गंभीर, आलोचनात्मक सोच को बढ़ावा दिया हो।

(Bureau Chief, Korba)




