नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने ड्रग्स नियमों में बदलाव किया, अब सिरप दवाओं के लिए डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन जरूरी, निगरानी बढ़ाने के लिए सख्ती

        नई दिल्ली: कफ सिरप सहित सभी सिरप आधारित दवाएं अब बिना डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के नहीं खरीदी जा सकेंगी। दरअसल केंद्र सरकार ने ड्रग्स नियमों में बदलाव किया है।इसके तहत सिरप को अब उस लिस्ट से हटा दिया गया है जिसके तहत आने वाली दवाएं सीधे दुकान से खरीदी जा सकती हैं। यह बदलाव लागू हो गया है।

        सरकार ने यह फैसला कफ सिरप और अन्य लिक्विड दवाओं की निगरानी बढ़ाने के लिए लिया है। कुछ देशों में दूषित कफ सिरप से बच्चों की मौत के बाद इन दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी थी।

        सरकार का कहना है कि इससे सिरप आधारित दवाओं पर निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण मजबूत होगा। साथ ही निर्माता और विक्रेता को लाइसेंसिंग और क्वालिटी कंट्रोल से जुड़े सख्त नियमों का पालन करना ही होगा।

        सिरप शब्द को लिस्ट से हटाया

        यह बदलाव ड्रग्स (पांचवां संशोधन) नियम, 2026 के तहत किया गया था। संशोधित नियमों की अधिसूचना आधिकारिक गजट में प्रकाशित होते ही लागू हो गई। नई व्यवस्था के तहत ड्रग्स रूल्स, 1945 की अनुसूची K में बदलाव किया गया है। इस अनुसूची में उन दवाओं को रखा गया था जिन्हें कुछ नियमों में छूट दी गई थी। अब इस सूची से “सिरप” शब्द हटा दिया गया है।

        आम लोगों से सुझाव और आपत्तियां मांगी थीं

        • मंत्रालय ने बताया कि इस बदलाव से पहले 29 दिसंबर 2025 को मसौदा अधिसूचना जारी कर आम लोगों और संबंधित पक्षों से सुझाव और आपत्तियां मांगी गई थीं।
        • सरकार ने कहा कि नियमों में संशोधन से पहले देश की सर्वोच्च वैधानिक तकनीकी सलाहकार संस्था Drugs Technical Advisory Board (DTAB) से परामर्श किया गया था। अधिसूचना में कहा गया कि केंद्र सरकार ने ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 की धारा 12 और 33 के तहत प्राप्त अधिकारों का उपयोग करते हुए यह संशोधन किया था।
        • ड्रग्स रूल्स, 1945, ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के तहत बनाए गए हैं। ये नियम भारत में दवाओं के निर्माण, बिक्री और वितरण को नियंत्रित करते हैं।

        तीन साल पहले क्वालिटी टेस्ट अनिवार्य किया था

        दवा सुरक्षा और गुणवत्ता को लेकर केंद्र सरकार पिछले कुछ वर्षों में कई कदम उठा चुकी है। 2022-23 में भारत में बनी कुछ कफ सिरप दवाओं को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठे थे। अफ्रीकी देशों और उज्बेकिस्तान में बच्चों की मौत के मामलों के बाद भारतीय दवाओं की गुणवत्ता पर निगरानी बढ़ाई गई थी।

        इसके बाद सरकार ने कफ सिरप के निर्यात से पहले सरकारी लैब में अनिवार्य परीक्षण की व्यवस्था लागू की। साथ ही दवा निर्माण इकाइयों के लिए गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस (GMP) मानकों को भी सख्त किया गया। कई कंपनियों के लाइसेंस निलंबित किए गए और उत्पादन इकाइयों पर कार्रवाई हुई।

        2023-24 में हुए प्रमुख बदलाव

        • कफ सिरप के निर्यात से पहले क्वालिटी टेस्ट अनिवार्य किया गया।
        • दवा निर्माण इकाइयों के लिए संशोधित GMP मानक लागू किए गए।
        • गुणवत्ता मानकों का उल्लंघन करने वाली कई दवा कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई हुई।
        • राज्यों और केंद्र के ड्रग कंट्रोल विभागों के संयुक्त निरीक्षण बढ़ाए गए।

        नया नियम इसलिए अहम

        विशेषज्ञों का मानना है कि सिरप आधारित दवाओं में तरल मिश्रण, फ्लेवरिंग एजेंट और अन्य रसायनों का इस्तेमाल होता है। ऐसे में इनके निर्माण और भंडारण में छोटी गलती भी गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है। सिरप को अनुसूची-K की छूट वाली सूची से बाहर करना सरकार की उसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

        मध्य प्रदेश में दूषित कफ सिरप से हुई थी 26 बच्चों की मौत

        मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में अक्टूबर 2025 में दूषित कफ सिरप से 26 बच्चों की मौत हो गई थी। वहीं, बच्चों की मौत का कारण बने कोल्ड्रिफ कफ सिरप बनाने वाली कंपनी श्रीसन फार्मा के डायरेक्टर गोविंदन रंगनाथन को गिरफ्तार कर लिया गया।



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