Tuesday, June 25, 2024
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Z नहीं, X सिक्योरिटी के घेरे में रहेंगे MLA ईश्वर… सभी विधायकों को X सिक्योरिटी, नक्सल-दंगा प्रभावित इलाके के MLA की सुरक्षा मांग पर बढ़ेगी

रायपुर: बिरनपुर हिंसा में अपने बेटे को खोने वाले साजा विधायक ईश्वर साहू समेत प्रदेश के सभी विधायकों को X सिक्योरिटी दी गई है। दरअसल सीएम के नाम की घोषणा होने के बाद ईश्वर साहू को Z सिक्योरिटी मिलने की चर्चा हो रही थी। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रह है।

वायरल वीडियो को लेकर मीडिया की टीम ने वीआईपी सिक्योरिटी में पदस्थ एआईजी एमएल कोटवानी से चर्चा की। एआईजी कोटवानी ने बताया, कि प्रदेश में केवल एक राजनेता को Z सिक्योरिटी है, लेकिन वो MLA ईश्वर साहू नहीं है।

पूर्व सीएम रमन सिंह को जेड प्लस और भूपेश बघेल को जेड सिक्योरिटी अलॉट है।

पूर्व सीएम रमन सिंह को जेड प्लस और भूपेश बघेल को जेड सिक्योरिटी अलॉट है।

Z सिक्योरिटी इस राजनेता को अलॉट

पुलिस महकमें के अधिकारियों ने बताया, कि प्रदेश में Z सिक्योरिटी केवल पूर्व सीएम भूपेश बघेल को अलॉट है। इसके अलावा Z प्लस सिक्योरिटी पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह को दी गई है।

विधानसभा चुनाव से पहले केंद्रीय मंत्रालय ने बढ़ाई थी सुरक्षा

विधानसभा चुनाव से ठीक पहले बस्तर संभाग के 24 बीजेपी नेताओं को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक्स श्रेणी की सुरक्षा दी। जिन नेताओं को सुरक्षा दी गई है उनमें सबसे ज्यादा दंतेवाड़ा जिले के हैं। इसके अलावा बस्तर, बीजापुर, सुकमा, कोंडागांव और कांकेर जिले के नेताओं को भी केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सुरक्षा दी।

विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी नेताओं को एक्स कैटेगरी सिक्योरिटी दी गई थी।

विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी नेताओं को एक्स कैटेगरी सिक्योरिटी दी गई थी।

MLA के अलावा इन बीजेपी नेताओं को X कैटेगरी सिक्योरिटी

बस्तर जिले में पूर्व प्रदेश महामंत्री किरण देव और प्रदेश कार्यसमिति सदस्य सुधीर पांडे, दंतेवाड़ा जिले में पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष मनीष सुराना, जिला पंचायत सदस्य रामू नेताम, पूर्व जिल पंचायत अध्यक्ष कमला नाग, बारसूर मंडल अध्यक्ष जसवीर नेगी, जिला महामंत्री संतोष गुप्ता, बचेली मंडल महामंत्री कामो कुंजाम, जिला उपाध्यक्ष सत्यजीत सिंह चौहान, जिला कार्यसमिति सदस्य कुलदीप ठाकुर, कुआकोंटा मंडल अध्यक्ष सोमडू कोर्राम, जिला महामंत्री धीरेंद्र प्रताप सिंह।

बीजापुर जिला में जिला उपाध्यक्ष श्रीनिवास मुदलियार, जिला उपाध्यक्ष कमलेश मंडावी, जिला उपाध्यक्ष लव कुमार रायडू, भाजयुमो प्रदेश कार्यसमिति सदस्य फूलचंद गागड़ा, किसान मोर्चा जिलाध्यक्ष घासीराम नाग, जिला मंत्री जगार लक्ष्मैया, जिला कोषाध्यक्ष संजय लुक्कड़। सुकमा जिले में जिलाध्यक्ष धनीराम बारसे, भाजयुमो जिलाध्यक्ष संजय सोढ़ी। कोंडागांव जिले में पार्षद जसकेतु उसेंडी। कांकेर जिले में पूर्व विधायक देवलाल दुग्गा, नारायणपुर जिला प्रभारी भरत मटियारा को सुरक्षा मिली है।

X, Y और Y+ सहित 6 तरह की होती है कैटेगरी

खुफिया ब्यूरो की ओर से सुरक्षा संबंधी खतरों को देखते हुए देश के वीवीआईपी और अन्य क्षेत्रों के लोगों को यह सुरक्षा दी जाती है। सुरक्षा व्यवस्था को भी कई श्रेणियों में बांटा गया है। जैसे एक्स, वाय, वाय प्लस, जेड, जेड प्लस और एसपीजी सुरक्षा।

इस कैटेगरी में इतने जवान रहते हैं

एक्स श्रेणी की सुरक्षा: इस श्रेणी में 2 सुरक्षा गार्ड तैनात होते हैं। जिसमें एक पीएसओ (व्यक्तिगत सुरक्षा अधिकारी) होता है।

नेताओं को कमांडों की सुविधा नहीं दी जाती।

नेताओं को कमांडों की सुविधा नहीं दी जाती।

वाई श्रेणी की सुरक्षा: इसमें कुल 11 सुरक्षाकर्मी शामिल होते हैं। जिसमें दो पीएसओ (निजी सुरक्षागार्ड) भी होते हैं। इस श्रेणी में कोई कमांडो नहीं तैनात होता।

​​​​​​​वाई प्लस श्रेणी सुरक्षा: इसमें 11 सुरक्षाकर्मी मिले होते हैं। इनमें 1 या 2 कमांडो और 2 पीएसओ भी शामिल होते है। इस सुरक्षा के तहत कपिल मिश्रा को 24 घंटे दिल्ली पुलिस का एक सिपाही बतौर निजी सुरक्षा अधिकारी के तौर पर मिला है।

जेड श्रेणी की सुरक्षा: जेड श्रेणी की सुरक्षा में चार से पांच एनएसजी कमांडो सहित कुल 22 सुरक्षागार्ड तैनात होते हैं। इसमें दिल्ली पुलिस, आईटीबीपी या सीआरपीएफ के कमांडो व स्थानीय पुलिसकर्मी भी शामिल होते हैं।

जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा: स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप की सुरक्षा के बाद जेड प्लस भारत की सर्वोच्च सुरक्षा श्रेणी है। इस श्रेणी में संबंधित विशिष्ट व्यक्ति की सुरक्षा में 36 जवान लगे होते हैं। इसमें 10 से ज्यादा एनएसजी कमांडो के साथ दिल्ली पुलिस, आईटीबीपी या सीआरपीएफ के कमांडो और राज्य के पुलिसकर्मी शामिल होते हैं।

SPG सुरक्षा की शुरुआत इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 1985 में की गई थी।

SPG सुरक्षा की शुरुआत इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 1985 में की गई थी।

स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (एसपीजी) सुरक्षा: यह सुरक्षा का सबसे ऊंचा स्तर है। ये देश की सबसे पेशेवर एवं आधुनिकतम सुरक्षा बलों में से एक है। इसकी शुरुआत इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 1985 में की गई थी। यह सुरक्षा प्रधानमंत्री या पूर्व प्रधानमंत्री को दी जाती है।

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