Monday, January 12, 2026

              PM मोदी ने दिल्ली में एग्जीबिशन का उद्घाटन किया, कहा- 125 साल के इंतजार के बाद बुद्ध के अवशेष भारत लाए गए, उनके लिए ये एंटीक पीस थे हमारे लिए सबकुछ

              नई दिल्ली: पीएम मोदी ने भगवान बुद्ध से जुड़े अवशेषों की भारत वापसी पर कहा कि इन अवशेषों को अपने बीच पाकर हम धन्य है। 125 साल के इंतजार के बाद भारत की विरासत लौटी है। अवशेषों का भारत से बाहर जाना फिर वापस आना एक बड़ा सबक है। गुलामी के काल में इन्हें भारत से छीना गया था।

              जो लोग इसे लेकर गए थे उनके ये केवल एंटीक थे इसलिए उन्होंने अंतरराष्ट्रीय बाजार में नीलाम करने की भी कोशिश की। भारत ने तय किया कि हम इनकी नीलामी नहीं होने देंगे। हम गोदरेज समूह का आभार व्यक्त करते हैं उनके सहयोग से ये मुमकिन हो सका कि ये अवशेष बुद्ध की भूमि पर वापस आए।

              दरअसल साल 1898 में उत्तर प्रदेश के पिपरहवा (कपिलवस्तु क्षेत्र) में खुदाई के दौरान भगवान बुद्ध के अवशेष मिले थे। यह खुदाई ब्रिटिश काल में हुई थी। खुदाई कराने वाले व्यक्ति डब्ल्यू. सी. पेपे, उस समय ब्रिटिश शासन में एक इंजीनियर थे। उस वक्त इन अवशेषों को भारत से बाहर भेज दिया गया था। इन्हें अब वापस लाया गया है।

              अवशेषों को दिल्ली के राय पिथौरा सांस्कृतिक परिसर में भगवान बुद्ध से जुड़े पवित्र पिपरहवा अवशेषों की एग्जीबिशन में रखा गया है। पीएम मोदी ने इस एग्जीबिशन का इनॉगरेशन किया।

              कार्यक्रम की 3 तस्वीरें…

              पीएम मोदी ने एग्जीबिशन का इनॉगरेशन करते हुए भगवान बुद्ध को फूल अर्पित किए।

              पीएम मोदी ने एग्जीबिशन का इनॉगरेशन करते हुए भगवान बुद्ध को फूल अर्पित किए।

              पीएम ने कार्यक्रम के दौरान देशभर से आए बौद्ध गुरुओं को सम्मानित किया।

              पीएम ने कार्यक्रम के दौरान देशभर से आए बौद्ध गुरुओं को सम्मानित किया।

              अवशेषों को दिल्ली के राय पिथौरा सांस्कृतिक परिसर में रखा गया है।

              अवशेषों को दिल्ली के राय पिथौरा सांस्कृतिक परिसर में रखा गया है।

              मोदी की स्पीच, 3 बड़ी बातें…

              • भगवान बुद्ध का ज्ञान पूरी मानवता का है। ये भाव हमने बीते कुछ महीनों में महसूस किया। ये अवशेष जिस देश में गए वहां आस्था का सैलाब उमड़ा। थाईलैंड में रखे गए अवशेषों का 40 लाख से ज्यादा लोगों ने दर्शन किया। मंगोलिया में हजारों लोग घंटो प्रतीक्षा करते रहे। कई लोग भारतीय प्रतिनिधियों को छूना चाह रहे थे क्योंकि वे बुद्ध की भूमि से आए थे। रूस में भी लाखों लोगों ने इसके दर्शन किए। भगवान बुद्ध सबके हैं, बुद्ध सबको जोड़ते हैं।
              • मैं खुद को भाग्यशाली समझता हूं, उनका मेरे जीवन में गहरा स्थान रहा है। जब मैं सरकार के दायित्वों से दूर था तब भी बौद्ध तीर्थस्थलों का दौरा करता था। नेपाल के लुंबिनी में माया देवी मंदिर में जाना अद्भुत अनुभव था। जापान और चीन में भी मैंने भगवान बुद्ध को महसूस किया। मंगोलिया में लोगों की आंखों में बुद्ध से जुड़ाव देखा।
              • मैं जहां गया मेरा प्रयास रहा कि बुद्ध की एक विरासत का प्रतीक लेकर लौटूं। भगवान बुद्ध की ये साझा विरासत प्रमाण है कि भारत डिप्लोमेसी, राजनीति से ही नहीं जुड़ता बल्कि आस्था और अध्यात्म से भी जुड़ता है। भारत उनकी परंपरा का जीवंत वाहक है।

              एग्जीबिशन से जुड़ी 4 फोटो…

              पिपरहवा अवशेष के बारे में जानें…

              पिपरहवा अवशेष भगवान बुद्ध से जुड़ी हुई पवित्र और पुरातात्विक चीजें हैं। ये अवशेष उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में स्थित पिपरहवा नामक स्थान पर खुदाई के दौरान मिले थे।

              मान्यता है कि इनमें भगवान बुद्ध की अस्थियां (धातु अवशेष) और उनसे जुड़ी प्राचीन वस्तुएं शामिल हैं, जिन्हें उनके महापरिनिर्वाण के बाद अलग-अलग स्थानों पर रखा गया था।


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