स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की पहल पर प्रसूता को आईसीडी पेसमेकर निःशुल्क लगाया गया, एसीआई में कार्डियोलॉजी विभाग ने दो चरणों में किया उपचार
रायपुर (BCC NEWS 24): प्रसव के बाद गंभीर हृदय रोग से जूझ रही एक प्रसूता को पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय, रायपुर से संबद्ध डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय (मेकाहारा) स्थित एसीआई के कार्डियोलॉजी विभाग में नया जीवन मिला है। महिला पोस्टपार्टम कार्डियोमायोपैथी, कंप्लीट हार्ट ब्लॉक और वेंट्रिकुलर टैकीकार्डिया जैसी गंभीर हृदय संबंधी जटिलताओं से पीड़ित थी। उसकी स्थिति इतनी गंभीर थी कि हृदय की धड़कन लगभग 40 प्रति मिनट रह गई थी और हृदय की पंपिंग क्षमता घटकर मात्र 25 प्रतिशत रह गई थी।
मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने पहले आपातकालीन स्थिति में टेम्पररी पेसमेकर लगाया। इसके बाद मरीज की स्थिति स्थिर होने पर इम्प्लांटेबल कार्डियोवर्टर डिफिब्रिलेटर (ICD) पेसमेकर निःशुल्क प्रत्यारोपित किया गया। मरीज की आर्थिक और पारिवारिक परिस्थितियों को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्री की पहल पर निःशुल्क उपचार की व्यवस्था की गई। वहीं, चिकित्सा महाविद्यालय के डीन डॉ. विवेक चौधरी एवं अम्बेडकर अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने भी प्रसूता के केस की गंभीरता को देखते हुए कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. स्मित श्रीवास्तव को मरीज के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए और उपचार की प्रगति की विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी, ताकि उपचार की समुचित निगरानी की जा सके।
प्रसव के बाद बिगड़ी हृदय की स्थिति
डॉ. स्मित श्रीवास्तव के अनुसार, महिला की डिलीवरी कोरबा में सिजेरियन ऑपरेशन से हुई थी। प्रसव के बाद उसे सांस फूलने की शिकायत होने लगी और हृदय की धड़कन असामान्य रूप से कम हो गई। जांच में उसके हृदय में कंप्लीट हार्ट ब्लॉक पाया गया। साथ ही, प्रसव के बाद होने वाली गंभीर हृदय संबंधी बीमारी पोस्टपार्टम कार्डियोमायोपैथी के कारण हृदय की मांसपेशियों की कार्यक्षमता प्रभावित हो गई थी। इसके चलते हृदय की रक्त पंप करने की क्षमता घटकर 25 प्रतिशत रह गई थी। मरीज को वेंट्रिकुलर टैकीकार्डिया की समस्या भी हो रही थी, जिसमें हृदय के निचले कक्षों से असामान्य रूप से तेज धड़कन उत्पन्न होती है। इस दौरान उसकी धड़कन अनियंत्रित हो जाती थी और वह बेहोश हो जाती थी। यह स्थिति जानलेवा साबित हो सकती थी।
क्या है पोस्टपार्टम कार्डियोमायोपैथी
डॉ. स्मित के अनुसार, पोस्टपार्टम कार्डियोमायोपैथी गर्भावस्था के अंतिम चरण या प्रसव के आसपास विकसित होने वाली हृदय की एक गंभीर बीमारी है। इसमें हृदय की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं और शरीर में रक्त पंप करने की उसकी क्षमता कम हो जाती है। इसके कारण सांस फूलना, अत्यधिक थकान, पैरों में सूजन और हृदय गति में बदलाव जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। यह स्थिति गर्भावस्था के अंतिम महीने से लेकर प्रसव के बाद के महीनों में सामने आ सकती है। कुछ मरीजों में प्रसव के तुरंत बाद भी इसके लक्षण विकसित हो सकते हैं। समय पर पहचान और उपचार नहीं मिलने पर यह गंभीर हृदय विफलता का कारण बन सकती है।
इमरजेंसी में टेम्पररी पेसमेकर, फिर लगाया आईसीडी (ICD)
गंभीर हालत में अम्बेडकर अस्पताल पहुंचने पर कार्डियोलॉजी विभाग की टीम ने तत्काल उपचार शुरू किया। हृदय की धड़कन लगभग 40 प्रति मिनट होने और कंप्लीट हार्ट ब्लॉक की स्थिति को देखते हुए आपातकालीन रूप से टेम्पररी पेसमेकर प्रत्यारोपित किया गया। इसके साथ ही, अनियंत्रित और जानलेवा हृदय गति को नियंत्रित करने के लिए मरीज को इलेक्ट्रिक शॉक दिया गया। मरीज की स्थिति स्थिर होने के बाद भविष्य में जानलेवा वेंट्रिकुलर अतालता (Ventricular Arrhythmia) से बचाव के लिए इम्प्लांटेबल कार्डियोवर्टर डिफिब्रिलेटर (ICD)पेसमेकर प्रत्यारोपित किया गया। यह उपकरण हृदय की खतरनाक तेज धड़कन की पहचान कर आवश्यकतानुसार इलेक्ट्रिक शॉक देकर उसे सामान्य करने में मदद करता है।
इस प्रकार मरीज की जान बचाने के लिए दो महत्वपूर्ण प्रक्रियाएं की गईं:- पहली, आपातकालीन टेम्पररी पेसमेकर इम्प्लांटेशन और दूसरी, स्थिति स्थिर होने पर आईसीडी पेसमेकर का प्रत्यारोपण। चूंकि मरीज की पारिवारिक परिस्थितियां भी बेहद कठिन थीं। ऐसी परिस्थिति में मरीज के गंभीर स्वास्थ्य संकट और आर्थिक परेशानी की जानकारी स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल के संज्ञान में आई। स्वास्थ्य मंत्री की पहल पर मरीज के उपचार का पूरा खर्च उठाने की व्यवस्था की गई तथा आईसीडी पेसमेकर निःशुल्क लगाने के निर्देश दिए गए।
मरीज का संपूर्ण उपचार अम्बेडकर अस्पताल के कार्डियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. स्मित श्रीवास्तव के नेतृत्व में किया गया। निजी अस्पताल में इस उपचार की कीमत लगभग साढ़े तीन लाख रुपए होती। गंभीर हृदय संबंधी जटिलताओं को देखते हुए चिकित्सकों ने पहले आपातकालीन उपचार के माध्यम से उसकी स्थिति को नियंत्रित किया और फिर आगे के जोखिम को कम करने के लिए आईसीडी पेसमेकर प्रत्यारोपित किया। वर्तमान में मरीज की स्थिति ठीक है और वह चिकित्सकों की निगरानी में है। स्वास्थ्य में सुधार जारी रहने पर उसे जल्द ही अस्पताल से छुट्टी दिए जाने की संभावना है।

(Bureau Chief, Korba)





