रायपुर : विशेष पिछड़ी जनजाति की लखपति दीदी लीलावती बाई समुदाय के लिए बनी प्ररेणा

        रायपुर: लखपति दीदी के नाम से अपनी पहचान बनाने वाली विशेष पिछड़ी जनजाति कोरवा समुदाय की लीलावती बाई आज क्षेत्र में अपने समुदाय के लिए एक प्रेरणा बन गई है। अब लीलावती बाई दोना-पत्तल निर्माण के व्यवसाय से 65 हजार रुपये से अधिक की वार्षिक आय अर्जित कर रही हैं। इसके अलावा, वे कृषि कार्य और लघु वनोपज के संग्रह एवं विक्रय से भी लगभग 40 हजार रुपये कमाती हैं। आज वह अपनी कमाई से प्रसन्न है और बताती है कि बिहान योजना ने उनकी जिंदगी बदल दी। लीलाबाई को देखकर क्षेत्र के अन्य महिलाएं भी जागरूक होकर बिहान योजना से आर्थिक रूप से संबल हो रहे है।

        जशपुर जिले के बगीचा विकासखंड के ग्राम पंचायत कुटमा जहाँ मुख्य रूप से विशेष पिछड़ी जनजाति के लोग निवासरत हैं। यहां की निवासी लीलावती बाई का प्रमुख आजीविका का स्रोत कृषि और मजदूरी था। उनकी आय इतनी नहीं थी कि वे अपने परिवार की आवश्यकताओं को ठीक से पूरा कर सकें। उनकी स्थिति में बदलाव आना तब शुरू हुआ जब वह राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान योजना) के अंतर्गत उन्हें मीनू लक्ष्मी महिला स्व-सहायता समूह से जोड़ा गया। इस मिशन के माध्यम से उन्हें विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता प्राप्त हुई। लीलावती बाई ने अपने समूह के साथ मिलकर दोना-पत्तल निर्माण का कार्य शुरू किया।

        उन्हें शुरुआत में योजना के अंतर्गत 15 हजार रुपये की रिवॉल्विंग फंड राशि और 60 हजार रुपये की सामुदायिक निवेश कोष राशि मिली। इसके बाद मार्च 2022 में उन्हें बैंक लिंकेज के माध्यम से 2 लाख रुपये की राशि स्वीकृत हुई। जिससे उन्होंने दोना-पत्तल निर्माण के लिए मशीन खरीदी और इसका प्रशिक्षण लिया। राष्ट्रीय आजीविका मिशन से जुड़ने से पहले लीलावती की आय सीमित थी, इससे बमुश्किल ही उनका गुजारा हो पाता था। बिहान से जुड़ने के बाद उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार आना शुरू हो गया। आज वह खुश होकर बताती है कि अब वह अपनी जरूरतों को आसानी से पूरा कर पा रही है।  



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