11,669 प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा, संवेदनशील परवरिश और पोषण पर दिया जोर
रायपुर (BCC NEWS 24): राज्य में 9वें राष्ट्रीय पोषण माह 2026 के अंतर्गत बच्चों के समुचित पोषण, स्वस्थ विकास और संवेदनशील परवरिश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘परवरिश के चैम्पियन’ कार्यक्रम के तहत आज वेबीनार के माध्यम से विभागीय अमले का ऑनलाइन उन्मुखीकरण आयोजित किया गया। महिला एवं बाल विकास विभाग के संचालनालय से आयोजित इस कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जिलों से जिला कार्यक्रम अधिकारी, बाल विकास परियोजना अधिकारी, पर्यवेक्षक एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं सहित लगभग 11,669 प्रतिभागियों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम को संचालनालय, महिला एवं बाल विकास विभाग, छत्तीसगढ़ के संयुक्त संचालक श्री डी. एस. मराबी, यूनिसेफ कंसल्टेंट श्रीमती गार्गी परदेशी एवं श्री रविन्द्र कुमार यादव ने संबोधित किया। वक्ताओं ने बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य एवं समग्र विकास के लिए परिवार और समुदाय की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए संवेदनशील परवरिश के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी।
संवेदनशील परवरिश से बच्चों के बेहतर विकास पर जोर
उन्मुखीकरण के दौरान संवेदनशील परवरिश क्या है, यह क्यों आवश्यक है और इसे दैनिक व्यवहार में किस प्रकार अपनाया जा सकता है, इस पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रतिभागियों को बताया गया कि बच्चों के शारीरिक विकास के साथ-साथ उनके मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक विकास के लिए सुरक्षित, स्नेहपूर्ण एवं सहयोगी वातावरण आवश्यक है। माता-पिता एवं परिवार के सदस्यों का बच्चों के साथ संवाद, उनकी जरूरतों को समझना तथा सकारात्मक व्यवहार अपनाना संवेदनशील परवरिश का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
कार्यक्रम में ‘परवरिश के चैम्पियन की वर्णमाला’ पुस्तक के ‘प से पोषण’ विषय को केंद्र में रखते हुए आगामी पालक सत्रों के आयोजन की प्रक्रिया एवं प्रमुख संदेशों की जानकारी दी गई। बताया गया कि आंगनबाड़ी केन्द्रों के माध्यम से पालकों तक पोषण एवं संवेदनशील परवरिश से संबंधित व्यवहारिक जानकारी पहुंचाई जाएगी, ताकि परिवार बच्चों के पोषण और देखभाल से जुड़े जरूरी उपायों को दैनिक जीवन में अपना सकें।
*पहले 1000 दिनों में पोषण का विशेष महत्व
वेबीनार में बच्चों के समुचित शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिए संतुलित एवं पौष्टिक आहार के महत्व पर विशेष जोर दिया गया। प्रतिभागियों को जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान शुरू कराने, शिशु को छह माह तक केवल माँ का दूध पिलाने तथा इसके बाद उम्र के अनुरूप पूरक आहार शुरू करने के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी गई।
स्तनपान कराने वाली माताओं के पोषण को भी बच्चों के स्वास्थ्य से जोड़ते हुए उनके लिए पर्याप्त एवं पौष्टिक आहार लेने की आवश्यकता बताई गई। प्रतिभागियों को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध विभिन्न एवं विविध खाद्य पदार्थों को आहार में शामिल करने, भोजन में विविधता बनाए रखने तथा आंगनबाड़ी केन्द्रों से उपलब्ध कराए जा रहे पोषण आहार का नियमित सेवन सुनिश्चित करने के लिए प्रेरित किया गया।
आंगनबाड़ी केन्द्र बनेंगे पोषण संदेशों के प्रभावी माध्यम
कार्यक्रम के माध्यम से विभागीय मैदानी अमले को यह संदेश दिया गया कि आंगनबाड़ी केन्द्र केवल पोषण सेवाओं के वितरण का माध्यम नहीं, बल्कि बच्चों और पालकों तक स्वस्थ खान-पान, बेहतर परवरिश और पोषण संबंधी व्यवहार परिवर्तन का संदेश पहुंचाने का महत्वपूर्ण केन्द्र भी हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं पर्यवेक्षकों से पालक सत्रों के दौरान सरल और व्यवहारिक तरीके से पोषण संबंधी जानकारी साझा करने पर जोर दिया गया।
राष्ट्रीय पोषण माह के दौरान आयोजित की जा रही विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से परिवारों को बच्चों के पोषण के प्रति जागरूक करने तथा समुदाय की भागीदारी बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। ‘परवरिश के चैम्पियन’ कार्यक्रम इसी दिशा में परिवारों को बच्चों की बेहतर देखभाल एवं पोषण के लिए सक्षम बनाने की पहल है।

(Bureau Chief, Korba)







