रायपुर : आबंटी के हित में CGRERA का महत्वपूर्ण आदेश, प्रमोटर लौटाएगा ब्याज सहित 33.70 लाख रुपये

        प्लॉट का कब्जा नहीं देने और बिना पूर्व सूचना बुकिंग निरस्त करने के मामले में मिली राहत

        15.09 लाख रुपये की मूल राशि के साथ 18.61 लाख रुपये ब्याज के भुगतान का आदेश

        रायपुर (BCC NEWS 24): छत्तीसगढ़ भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (CGRERA) ने आबंटी के हितों की सुरक्षा से जुड़े एक महत्वपूर्ण प्रकरण में आदेश पारित करते हुए प्रमोटर वत्सल्य डेवलपर्स, सेजबहार, रायपुर को प्लॉट की बुकिंग के लिए आबंटी द्वारा जमा की गई राशि ब्याज सहित वापस करने के निर्देश दिए हैं। प्राधिकरण ने प्रमोटर को 15 लाख 9 हजार 300 रुपये की मूल राशि तथा 18 लाख 60 हजार 956 रुपये ब्याज सहित कुल 33 लाख 70 हजार 256 रुपये आबंटी को भुगतान करने का आदेश दिया है।

        प्रकरण के अनुसार आबंटी ने वर्ष 2012 में प्रमोटर के साथ अनुबंध कर एक आवासीय प्लॉट बुक किया था। अनुबंध की शर्तों के अनुसार आबंटी द्वारा वर्ष 2012 से 2015 के बीच प्लॉट के लिए कुल 15 लाख 9 हजार 300 रुपये की राशि प्रमोटर को अदा की गई थी। निर्धारित राशि का भुगतान किए जाने के बावजूद प्रमोटर द्वारा आबंटी को प्लॉट का कब्जा प्रदान नहीं किया गया।

        बिना पूर्व सूचना निरस्त कर दी गई थी बुकिंग

        प्रकरण में यह भी सामने आया कि प्रमोटर द्वारा आबंटी की बुकिंग बिना किसी पूर्व सूचना के निरस्त कर दी गई थी। राशि का भुगतान करने के बाद भी प्लॉट का कब्जा नहीं मिलने और बुकिंग निरस्त किए जाने पर आबंटी ने अपने हितों की रक्षा तथा जमा राशि की वापसी के लिए CGRERA के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया।

        प्राधिकरण ने प्रकरण में प्रस्तुत दस्तावेजों एवं उपलब्ध अभिलेखों का परीक्षण करने के बाद आबंटी के पक्ष में आदेश पारित किया। इसके तहत प्रमोटर को आबंटी द्वारा जमा की गई 15 लाख 9 हजार 300 रुपये की मूल राशि के साथ 18 लाख 60 हजार 956 रुपये ब्याज का भुगतान करने के निर्देश दिए गए हैं। इस प्रकार आबंटी को कुल 33 लाख 70 हजार 256 रुपये वापस किए जाएंगे।

        CGRERA के आदेश से आबंटियों के हितों की सुरक्षा को मजबूती

        प्राधिकरण का यह आदेश रेखांकित करता है कि रियल एस्टेट परियोजनाओं में प्रमोटरों के लिए आबंटियों के साथ किए गए अनुबंधों और वैधानिक दायित्वों का पालन करना आवश्यक है। निर्धारित राशि का भुगतान किए जाने के बावजूद परियोजना से संबंधित दायित्वों का निर्वहन नहीं होने अथवा आबंटी के हितों के प्रतिकूल कार्रवाई की स्थिति में आबंटी विधि के अनुरूप राहत प्राप्त करने का अधिकारी है।



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