रायपुर : पति के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी संभाल रही उमा बाई को मिला शासन का संबल

        मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक मृत्यु सहायता योजना से मिली एक लाख रुपए की आर्थिक सहायता

        तीन बेटियों की पढ़ाई और परिवार की जरूरतों को पूरा करने में मिली राहत, मुख्यमंत्री के प्रति जताया आभार

        रायपुर (BCC NEWS 24): दुर्ग जिले के ग्राम जंजगिरी निवासी श्रीमती उमा बाई साहू के लिए पति के आकस्मिक निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारियां अचानक उनके कंधों पर आ गईं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के सामने रोजमर्रा की जरूरतों के साथ तीन बेटियों की पढ़ाई और उनके भविष्य की चिंता भी चुनौती बनकर खड़ी थी। ऐसे कठिन समय में छत्तीसगढ़ शासन की मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक मृत्यु सहायता योजना परिवार के लिए आर्थिक संबल बनकर सामने आई।

        श्रीमती उमा बाई साहू के पति स्वर्गीय श्री जितेन्द्र कुमार साहू का असंगठित श्रमकार्ड खेतिहर मजदूर के रूप में पंजीकृत था। पति के निधन के बाद उमा बाई ने इसी श्रमकार्ड के माध्यम से मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक मृत्यु सहायता योजना के अंतर्गत ऑनलाइन आवेदन किया। आवेदन पर श्रम विभाग द्वारा आवश्यक प्रक्रिया पूरी करते हुए उन्हें एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई।

        संकट की घड़ी में मिली आर्थिक राहत

        पति के निधन के बाद परिवार की आय का प्रमुख सहारा समाप्त हो जाने से उमा बाई के सामने आर्थिक परेशानियां बढ़ गई थीं। ऐसे समय में शासन से मिली एक लाख रुपए की सहायता ने उन्हें परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण मदद दी। इस राशि से उन्हें अपनी तीनों बेटियों की पढ़ाई, घर-परिवार की जरूरतों और भविष्य से जुड़ी जिम्मेदारियों को संभालने में राहत मिली।

        श्रीमती उमा बाई साहू ने सहायता राशि मिलने पर कहा कि पति के निधन के बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी मेरे ऊपर आ गई थी। आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी और बेटियों की पढ़ाई एवं उनके भविष्य को लेकर चिंता बनी रहती थी। शासन से मिली एक लाख रुपये की सहायता से मुझे बहुत सहारा मिला है। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि श्रमिक परिवारों के लिए संचालित ऐसी योजनाएं मुश्किल समय में बड़ी मददगार साबित हो रही हैं।

        श्रमिक परिवारों के लिए सुरक्षा का भरोसा

        मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक मृत्यु सहायता योजना संकट की घड़ी में श्रमिक परिवारों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उमा बाई साहू की कहानी बताती है कि जरूरत के समय मिलने वाली शासकीय सहायता किस तरह परिवार को आर्थिक संकट से उबरने और आगे की जिम्मेदारियों को संभालने का आधार दे सकती है।



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