रायपुर : विश्व रेडियो दिवस 2026

          भरोसे की तरंगों पर जनसंवाद का सशक्त सेतु

          परंपरा से तकनीक तक अटूट विश्वास

          रायपुर (BCC NEWS 24): प्रतिवर्ष 13 फरवरी को मनाया जाने वाला विश्व रेडियो दिवस जनसंचार के उस प्रभावी, विश्वसनीय और सर्वसुलभ माध्यम को समर्पित है, जिसने समय, परिस्थिति और तकनीकी परिवर्तन के बावजूद अपनी प्रासंगिकता बनाए रखी है। यूनेस्को द्वारा 3 नवंबर 2011 को आयोजित 36वें महासम्मेलन में इस दिवस को आधिकारिक मान्यता प्रदान की गई। 13 फरवरी 1946 को संयुक्त राष्ट्र रेडियो की स्थापना की स्मृति में यह तिथि निर्धारित की गई, जिसे दिसंबर 2012 में संयुक्त राष्ट्र महासभा का समर्थन प्राप्त हुआ। रेडियो को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, सूचना तक समान पहुँच और लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ करने वाले माध्यम के रूप में वैश्विक पहचान प्राप्त है।

          भरोसे की तरंगों पर जनसंवाद का सशक्त सेतु

          भारत में रेडियो प्रसारण का इतिहास लगभग एक शताब्दी पुराना है। वर्ष 1927 में मुंबई और कोलकाता से प्रारंभ हुआ प्रसारण वर्ष 1936 में ऑल इंडिया रेडियो (आकाशवाणी) की स्थापना के साथ राष्ट्रीय स्वरूप में विकसित हुआ। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान राष्ट्रीय चेतना जागृत करने से लेकर स्वतंत्रता पश्चात् कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, मौसम पूर्वानुमान, बाजार भाव तथा शासकीय योजनाओं की जानकारी के प्रसार तक रेडियो ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। विशेषकर ग्रामीण एवं आदिवासी अंचलों में आज भी यह जनसंचार का सबसे भरोसेमंद माध्यम है।

          डिजिटल युग में भी रेडियो की प्रभावशीलता अक्षुण्ण है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम ने रेडियो को राष्ट्रीय संवाद का सशक्त मंच प्रदान किया है। इस कार्यक्रम के माध्यम से नवाचार, सामाजिक पहल, महिला सशक्तिकरण, युवा उपलब्धियों और सकारात्मक परिवर्तन की कहानियाँ देशभर में प्रसारित हो रही हैं।

          छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार द्वारा रेडियो को जनसंवाद और जनकल्याण का प्रभावी माध्यम बनाया गया है। दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि मार्गदर्शन एवं जनहितकारी योजनाओं की जानकारी नियमित रूप से प्रसारित की जा रही है। सामुदायिक रेडियो और आकाशवाणी के कार्यक्रम राज्य की लोकसंस्कृति, बोली-बानी एवं परंपराओं के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, जिससे शासन और जनता के बीच विश्वास का और मजबूत हुआ है।

          वर्ष 2026 की थीम “रेडियो और कृत्रिम बुद्धिमत्ता” इस तथ्य को रेखांकित करती है कि तकनीकी नवाचारों के साथ भी रेडियो का मानवीय स्पर्श, विश्वसनीयता और सरलता उसकी सबसे बड़ी शक्ति है। परंपरा और आधुनिकता के समन्वय के साथ रेडियो भविष्य में भी समाज, लोकतंत्र और संस्कृति को जोड़ने का माध्यम बना रहेगा।


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