Saturday, April 20, 2024
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रीपा ने स्थानीय लोगों के लिए आर्थिक समृद्धि के द्वार खोले….

  • महात्मा गांधी ग्रामीण अद्यौगिकी पार्क बहनाटांगर में स्थानीय ग्रामीणों को मिला रोजगार
  • पोल निर्माण, सरसों तेल पेराई, मुर्गी-हैचरी, टोमेटो कैचप, मुर्रा उत्पादन और बोरा प्रिटिंग से महिलाओं को मिला आजीविका का आधार
  • पुस्कर सरस्वती समूह के द्वारा अब तक 4 लाख 20 हजार का पोल विक्रय किया गया
  • बाड़ी की सब्जियों से महिलाओं को अतिरिक्त आमदनी हो रही है

जशपुरनगर: ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए छत्तीसगढ़ शासन के मंशानुसार पत्थलगांव विकासखण्ड के बहनाटांगर गोठान में महात्मा गांधी ग्रामीण अद्यौगिकी पार्क का निर्माण किया जा रहा है। रीपा के तहत् गांव के लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है और सहायता समूह की महिलाएं पोल निर्माण, सरसों तेल का उत्पादन, सामुदायिक बाड़ी, मुर्गी, हेचरी, मुर्रा उत्पादन, टोमेटो कैचप का कार्य बेहतर तरीके से कर रही है। साथ ही वर्मी खाद पैकेजिंग के लिए बोरा प्रिटिंग निर्माण का कार्य भी किया जा रहा है।

महात्मा गांधी ग्रामीण अद्यौगिकी पार्क बहनाटांगर में स्थानीय ग्रामीणों को मिला रोजगार

बाड़ी की सब्जियों से महिलाओं को अतिरिक्त आमदनी हो रही है
कलेक्टर डॉ. रवि मित्तल के मार्गदर्शन और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री जितेन्द्र यादव के दिशा-निर्देश में समूह की महिलाएं विभिन्न आजीविका मूलक गतिविधियों से जुड़कर आत्मनिर्भर बन गई है।

पोल निर्माण एवं मुर्रा उत्पादन- पोल निर्माण का कार्य बहनाटांगर की पुष्कर सरस्वती समूह के द्वारा 2019 से गौठान में किया जा है। जिसका विक्रय गौठानों के साथ अन्य व्यापारियों को भी मांग अनुसार किया गया है। इस कार्य से समूह के सदस्यों को नया रोजगार मिला है तथा 6 हजार पोल निर्माण से 4 लाख 20 हजार रूपए समूह को आमदनी हो चुकी है। पुस्कर सरस्वती समूह पोल निर्माण के अतिरिक्त सामुदायिक बाड़ी और बकरी पालन करके भी अतिरिक्त आय अर्जित कर रही हैं। इसी प्रकार समूह द्वारा मुर्रा उत्पादन का कार्य भी किया जा रहा है। महिलाओं के लिए मुर्रा मशीन की भी सुविधा उपलब्ध कराई गई है।

सरसों तेल पेराई– रीपा के तहत सरसों तेल उत्पादन करके पूजा स्व सहायता समूह की महिलाएं सरसों तेल पेराई का कार्य कर रही है। चक्रीय निधि एवं सामुदायिक निवेश निधि के सहयोग से तेल पेराई का कार्य बेहतर किया जा रहा है। तेल की शुद्धता के कारण स्थानीय लोग के साथ अन्य दुकानों में इसकी मांग निरंतर बनी हुई है और महिलाएं अच्छी आय अर्जित कर रही है।

सामुदायिक बाड़ी – महिला शक्ति स्व सहायता समूह की महिलाएं सामुदायिक बाड़ी के कार्य से जुड़ी हैं और हर्री साग-सब्जी का उत्पादन करके स्थानीय बाजारों में विक्रय किया जा रहा है। साग-सब्जी की मांग बारह मासी लोगों में बनी रहती है इस कारण सीजन अनुसार उगाई गई बाड़ी की सब्जियॉ हाथों-हाथ बिक जाती है। अच्छी आमदनी होने के कारण महिलाएं इस कार्य को रूचि लेकर कर रही है।

मुर्गी-हेचरी का कार्य – जय माता स्व सहायता समूह की महिलाओं के द्वारा मुर्गी के अण्डे से चूजा उत्पादन का कार्य किया जा रहा है। इनके द्वारा मुर्गी के चूजे का गौठानों में मांग के अनुसार भेजा जा रहा है और स्वयं भी मुर्गी पालन से जुड़कर आर्थिक आमदनी अर्जित कर रहें हैं।

टोमेटो कैचप- संस्कार स्व सहायता समूह की महिलाओं के द्वारा टोमेटो कैचप का निर्माण भी किया जा रहा है। कैचप का विक्रय सी-मार्ट और स्थानीय स्तर पर किया जा रहा है। जिला प्रशासन के द्वारा रीपा के तहत् समूह की महिलाओं को आजीविका का साधन मिला है और उनके द्वारा तैयार सामग्रियों का सी-मार्ट, स्थानीय बाजार, आश्रम-छात्रावासों के साथ जिला और राज्य स्तरीय प्रदर्शनी में भी विक्रय किया जा रहा है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के जिला मिशन प्रबंधक श्री विजय शरण प्रसाद ने जानकारी देते हुए बताया कि बहनाटांगर गौठान में महिलाए विभिन्न आजीविका से जुड़ी हैं।

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