सुशासन और पारदर्शिता की नई मिसाल
रायपुर (विष्णु प्रसाद वर्मा, सहायक संचालक- BCC NEWS 24): छत्तीसगढ़ सरकार ने ‘सेवा के संकल्प’ के तहत राजस्व प्रशासन को पूरी तरह डिजिटल बनाकर राज्य के भू-स्वामियों को भूमि संबंधी जटिल प्रक्रियाओं और सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने से मुक्ति दिलाई है। ‘भुईयां’ और ‘भू-नक्शा’ पहल के जरिए प्रदेश के 20,298 गांवों के खसरा और 19,723 गांवों के भू-नक्शों का कंप्यूटरीकरण पूरा हो चुका है, जिससे अब शुद्ध और प्रामाणिक अभिलेख तुरंत उपलब्ध हो रहे हैं। इसके साथ ही 158 तहसीलों में ‘मॉडर्न रिकॉर्ड रूम’ बन जाने से कागजातों के गुम होने या खराब होने का डर हमेशा के लिए समाप्त हो गया है।
प्रशासनिक सुधारों की इसी कड़ी में 105 उप-पंजीयक कार्यालयों को भुईयां पोर्टल से जोड़कर ‘ऑटो नामांतरण’ (Auto Mutation) प्रणाली लागू की गई है, जिससे जमीन की रजिस्ट्री होते ही क्रेता के नाम नामांतरण की प्रक्रिया स्वतः प्रारंभ हो जाती है। भूमि विवादों के तुरंत समाधान के लिए ‘ई-कोर्ट’ व्यवस्था शुरू की गई है, जहाँ नागरिक घर बैठे ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं और केस से जुड़ी हर जानकारी तथा पेशी की तारीख सीधे मोबाइल पर SMS से प्राप्त कर सकते हैं।
इसके अलावा, भूमि उपयोग परिवर्तन को ‘ऑटो व्यपवर्तन’ के माध्यम से मात्र 15 दिनों के भीतर पूरा किया जा रहा है और गाइडलाइन दरों का निर्धारण भी स्वचालित हो गया है। किसानों की सुविधा के लिए पटवारी एवं उप-पंजीयक के डिजिटल हस्ताक्षर वाली ‘डिजिटल किसान ऋण पुस्तिका’ पोर्टल पर स्वतः तैयार हो रही है, जिसे भविष्य में सिविल कोर्ट से भी जोड़ा जाएगा। इस पूरी व्यवस्था को अंतिम व्यक्ति तक सहज बनाने के लिए खसरा और बी-1 जैसे जरूरी दस्तावेज अब व्हाट्सएप चैटबॉट पर भी उपलब्ध हैं, जिसने राज्य में पारदर्शिता और सुशासन का एक नया अध्याय शुरू किया है।

(Bureau Chief, Korba)







