Tuesday, May 28, 2024
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BCC News 24: कोरबा- जूते की रैक में छिपकर बैठा था कोबरा.. गुस्से से सांप को फुफकारते सुन डर गए घरवाले, पालतू बिल्ली के कारण बची जान

छत्तीसगढ़: कोरबा में जूते के रैक में कोबरा सांप छिपकर बैठा था, जिसे रेस्क्यू कर लिया गया है। इन दिनों कोरबा में लगातार घरों और स्कूलों से सांप निकल रहे हैं, जिससे लोगों में दहशत है। अब जूते-चप्पलों के बीच छिपे कोबरा को देख घर के लोगों के रोंगटे खड़े हो गए।

जूते-चप्पल की रैक में घुसा कोबरा।

जूते-चप्पल की रैक में घुसा कोबरा।

पालतू बिल्ली के कारण चला सांप का पता

मामला रामपुर इलाके के एक घर का है, जहां मकान मालिक राजेश बरवे का परिवार उस समय सकते में आ गया, जब उन्हें जूते-चप्पल की रैक से सांप के फुफकारने की आवाज आई। उनकी पालतू बिल्ली लगातार वहां खड़ी थी, क्योंकि उसे वहां किसी के होने का अहसास था। जब बिल्ली की हरकतों को घर के लोगों ने नोटिस किया, तब वे वहां पहुंचे और वहां से आ रही आवाज को सुनकर समझ गए कि यहां सांप घुसा है।

पहले भी कई बार घुस चुके हैं जहरीले सांप

राजेश बरवे के घर में पहले भी कई बार कोबरा सांप घुस चुका था, जिसके चलते उनकी पत्नी अनीता बरवे ने तुरंत स्नेक रेस्क्यू टीम को खबर की, जिसके बाद स्नेक कैचर जितेंद्र सारथी अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। वहां उन्होंने जूते-चप्पलों की रैक में कोबरा को देखा, जो बहुत गुस्से में था और अपने फन को फैलाकर बार-बार उससे हमला करने की कोशिश कर रहा था। उसके फुफकारने की आवाज इतनी भयानक थी कि घरवाले बुरी तरह से डर गए। वो अपने पास रेस्क्यू टीम को नहीं आने दे रहा था। जैसे-तैसे स्नेक कैचर जितेंद्र सारथी ने उसे निकाला और बड़ी मशक्कत के बाद बोतल में बंद कर दिया, जिसके बाद घरवालों ने राहत की सांस ली।

पालतू बिल्ली के कारण बची जान

राजेश बरवे की पत्नी अनीता ने बताया इससे पहले भी हमारे घर में कई बार कोबरा, डोडिया, धामन सांप घुस चुके हैं, लेकिन हमारी पालतू बिल्ली की वजह से हमारी जान बच जाती है। उन्होंने कहा कि सांप का पता चलते ही जितेन्द्र सारथी तुरंत हमारे घर आ जाते हैं, जिसके कारण आज तक कोई बड़ी दुर्घटना नहीं हुई, इसलिए हम उनका आभार जताते हैं।

जितेंद्र सारथी ने अनुभव किया साझा

स्नेक कैचर जितेन्द्र सारथी ने बताया कि हमारे काम में एक सेकेंड की गलती और मौत निश्चित है। उन्होंने कहा कि हमारे काम में बहुत खतरा है, लेकिन किसी को तो पहल करनी होगी मानव जीवन के साथ-साथ इन बेजुबान जीवों को बचाने लिए, ताकि दोनों अपने-अपने स्पेस में सुरक्षित रह सकें। स्नेक कैचर जितेंद्र सारथी के योगदान के लिए इस 15 अगस्त को जिला प्रशासन ने उन्हें सम्मानित भी किया।

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