Friday, February 27, 2026

              अमेरिका में खाने-पीने की चीजें महंगी होने के कारण ट्रम्प बैकफुट पर आए, भारत के चाय-कॉफी-मसालों से 50% टैरिफ हटाया

              नई दिल्ली: अमेरिका ने भारत के कॉफी, चाय, मसाले, ट्रॉपिकल फ्रूट्स और फ्रूट जूस जैसे प्रोडक्ट्स पर लगे 50% रेसिप्रोकेल टैरिफ को वापस ले लिया है। इस बात की जानकारी कॉमर्स मिनिस्ट्री ने 17 नवंबर को दी है। डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) ने कहा कि इससे इंडियन एक्सपोर्टर्स को लेवल प्लेइंग फील्ड मिलेगी।

              वित्त वर्ष 2025 में भारत का अमेरिका को एग्री एक्सपोर्ट 2.5 अरब डॉलर (₹22 हजार करोड़) का था, जिसमें से 9 हजार करोड़ रुपए का एक्सपोर्ट अब टैक्स-फ्री हो गया है।

              अमेरिका ने रूसी तेल खरीदने के कारण भारत पर 50% टैरिफ लगाया था। अमेरिका में खाने-पीने की चीजों के दाम लगातार बढ़ने के कारण ट्रम्प प्रशासन ने ये कदम उठाया है।

              ट्रम्प ने शुक्रवार को कार्यकारी आदेश साइन किया था

              ट्रम्प ने शुक्रवार को एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए। इसमें बीफ, कॉफी और फलों सहित दर्जनों एग्रीकल्चर प्रोडक्ट पर लगे टैरिफ हटा दिए गए हैं। इसके पीछे मंहगाई बड़ी वजह है। ट्रम्प प्रशासन के अनुसार यह कदम उत्पादों की कीमतों को स्थिर करने के लिए उठाया गया है। इन पर लगाए गए टैरिफ का बोझ सीधे उपभोक्ताओं पर पड़ रहा था।

              द गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक खाद्य पदार्थों की कीमतें अप्रैल से सितंबर 2025 तक 2.7% बढ़ीं, जिसमें बीफ 7% और केले 7% महंगे हुए हैं। अमेरिकियों का कहना है कि उनकी मासिक लागत में एवरेज 9 हजार रुपए से 66 हजार रुपए तक बढ़ोतरी हुई है।

              ट्रेड डील भी जल्द हो सकती है

              भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील अब लगभग अंतिम चरण में है। भारत के वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने बताया कि 25% रेसिप्रोकल टैरिफ और कच्चे तेल पर अतिरिक्त 25% ड्यूटी जैसे मुद्दों पर सहमति लगभग बन चुकी है। उन्होंने कहा हम जल्द ही इसे फाइनल करेंगे। दोनों देशों के बीच ट्रेड डील पर इस साल फरवरी से बातचीत चल रही है।

              भारत ने US को FY25 में ₹7.66 लाख करोड़ का सामान बेचा

              सरकार के अनुमान से भारत के 48.2 अरब डॉलर (करीब ₹4.3 लाख करोड़) के एक्सपोर्ट्स पर हाई टैरिफ लगे हुए थे। FY25 में कुल 86.51 अरब डॉलर (करीब ₹7.66 लाख करोड़) का सामान अमेरिका भेजा गया, जिसमें टॉप फाइव कैटेगरी जैसे टेक्सटाइल्स, ज्वेलरी, इंजीनियरिंग गुड्स आदि 60 अरब डॉलर (करीब ₹5.3 लाख करोड़) के हैं।


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