Monday, January 12, 2026

              ट्रम्प ने दी चेतावनी, कहा- रूस से बिजनेस करने वाले देशों पर प्रतिबंध लगाएंगे, बोले- इस पर कानून बन रहा, रूसी तेल खरीदने वालों पर 500% टैरिफ लग सकता है

              वॉशिंगटन डीसी: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रविवार को चेतावनी दी है कि रूस के साथ व्यापार करने वाले किसी भी देश पर बेहद कड़े प्रतिबंध लगाए जाएंगे।

              पत्रकारों के एक सवाल का जवाब देते हुए ट्रम्प ने कहा कि ट्रम्प प्रशासन और रिपब्लिकन पार्टी के नेता ऐसे कानून बना रहे हैं जिनका मकसद रूस पर दबाव बढ़ाना है।

              ट्रम्प ने यह भी कहा कि रूस ही नहीं बल्कि ईरान के साथ भी बिजनेस करने वाले देशों पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है।

              ट्रम्प प्रशासन ने भारत पर पहले ही 50% टैरिफ लगा रखे हैं, जो दुनिया में सबसे ऊंचे माने जा रहे हैं। इसमें 25% एक्स्ट्रा टैक्स सिर्फ इसलिए लगाया गया है क्योंकि भारत, रूस से तेल और गैस खरीदता है।

              रूसी तेल खरीदने वालों पर 500% टैरिफ लग सकता है

              हाल ही में सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने एक बिल पेश किया है जिसमें कहा गया है कि रूस के तेल को खरीदने वाले और फिर बेचने वाले देशों पर 500% टैरिफ लगाया जाए।

              सीनेटर ग्राहम और सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने मिलकर सैंक्शनिंग रशिया एक्ट 2025 पेश किया है, जिसमें उन देशों पर सेकेंडरी प्रतिबंध लगाने की बात है जो रूस से बिजनेस कर यूक्रेन जंग में उसकी आर्थिक मदद कर रहे हैं। इस एक्ट को 100 में से 85 सीनेटर ने समर्थन दिया है।

              जयशंकर बोले- भारत-रूस के विकास से दुनिया को फायदा

              ट्रम्प का रूस से बिजनेस करने वाले देशों पर प्रतिबंध लगाने वाला बयान तब आया है जब भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर रूस दौरे पर हैं। जयशंकर ने मंगलवार को रूस की राजधानी मॉस्को में रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से मुलाकात की। इस दौरान जयशंकर ने कहा कि भारत-रूस संबंध लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय संबंधों में स्थिरता की वजह रहे हैं।

              जयशंकर ने कहा- भारत और रूस का विकास न सिर्फ दोनों देशों का आपसी हित है, बल्कि यह दुनिया के हित में भी है। विदेश मंत्री ने कहा कि दोनों देशों के बीच कई द्विपक्षीय समझौते, परियोजनाएं और नई पहल शुरू होने वाली है, जिनसे ‘स्पेशल एंड प्रिविलेज्ड स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ और मजबूत होगी।

              जयशंकर का बयान अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प को भारत के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है। ट्रम्प ने इस साल अगस्त में रूस से क्रूड ऑयल खरीदने के कारण भारत पर 50% टैरिफ लगा दिया था। हालांकि, भारत ने ट्रम्प की बार-बार आपत्तियों के बावजूद रूस से तेल खरीदना जारी रखा है।

              जयशंकर बोले- दोनों देशों में नए समझौतों पर अंतिम चरण में चर्चा

              जयशंकर ने रूसी विदेश मंत्री के साथ बैठक के दौरान बताया कि दोनों देशों के बीच ऊर्जा, व्यापार, निवेश, अंतरिक्ष, विज्ञान और रक्षा सहित कई क्षेत्रों में नए समझौते और प्रोजेक्ट चर्चा के अंतिम चरण में हैं। दोनों देश जटिल वैश्विक हालात, जैसे यूक्रेन संघर्ष, पश्चिम एशिया और अफगानिस्तान की स्थिति पर भी खुलकर चर्चा कर रहे हैं।

              बता दें कि जयशंकर PM नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच अगले महीने नई दिल्ली में होने वाले 23वें वार्षिक भारत-रूस शिखर सम्मेलन की तैयारी को लेकर मॉस्को दौरे पर हैं। वे 18 नवंबर को शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की काउंसिल ऑफ हेड्स ऑफ गवर्नमेंट की बैठक में भारत का नेतृत्व करेंगे। रूसी PM मिखाइल मिशुस्तिन इसकी मेजबानी करेंगे।

              ट्रम्प बोले- रूस से तेल आयात में कटौती पर टैरिफ घटाएंगे

              डोनाल्ड ट्रम्प ने 17 नवंबर को कहा था कि अमेरिका भारत पर टैरिफ कम कर सकता है क्योंकि उसने रूस से अपने तेल आयात में कटौती की है। ट्रम्प ने कहा- भारत और अमेरिका एक नए व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के करीब पहुंच गए हैं। अब भारत ने रूसी तेल की खरीद बहुत कम कर दी है, इसलिए अमेरिका धीरे-धीरे टैरिफ कम करेगा।

              ट्रम्प का यह बयान ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के बाद आया, जिसमें दावा किया गया था कि भारत ने दिसंबर महीने की डिलीवरी के लिए रूस से कच्चे तेल की खरीद में बड़ी कटौती की है। रिपोर्ट के मुताबिक, देश की 5 प्रमुख रिफाइनरी कंपनियों ने दिसंबर के लिए कोई नया ऑर्डर नहीं दिया है।

              रिलायंस ,BPCL, HPCL ने नहीं दिए रूस को तेल के ऑर्डर

              रिलायंस इंडस्ट्रीज, भारत पेट्रोलियम, हिंदुस्तान पेट्रोलियम, मंगलौर रिफाइनरी और एचपीसीएल-मित्तल एनर्जी ने दिसंबर के लिए रूस को नया ऑर्डर नहीं दिया। ये कंपनियां इस साल अब तक भारत के रूसी आयात का दो-तिहाई हिस्सा रही हैं।

              इंडियन ऑयल (IOC) और नयारा एनर्जी ही दिसंबर के लिए रूसी तेल खरीद रही हैं। IOC गैर-प्रतिबंधित सप्लायर्स से खरीद कर रही है, जबकि नयारा जिसमें रूस की रोसनेफ्ट की 49% हिस्सेदारी है, पूरी तरह रूसी सप्लाई पर निर्भर है।

              भारत अक्टूबर में रूसी तेल का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बना

              भारत ने अक्टूबर में रूस से 2.5 बिलियन डॉलर (करीब 22.17 हजार करोड़ रुपए) वैल्यू का कच्चा तेल खरीदा, जिससे वह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार बन गया है। यह जानकारी हेलसिंकी स्थित सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (CREA) ने अपनी रिपोर्ट में दी है।

              CREA के अनुसार, चीन 3.7 बिलियन डॉलर (करीब 32.82 हजार करोड़ रुपए) के इम्पोर्ट के साथ पहले नंबर पर रहा। कुल मिलाकर, रूस से भारत का फॉसिल फ्यूल आयात 3.1 बिलियन डॉलर (करीब ₹27.49 हजार करोड़) पहुंच गया है।

              वहीं, चीन का कुल आंकड़ा 5.8 बिलियन डॉलर (करीब ₹51.44 हजार करोड़) रहा। चीन रूसी कोयले का भी सबसे बड़ा खरीदार बना रहा। उसने 760 मिलियन डॉलर का कोयला खरीदा। वहीं, भारत ने अक्टूबर में 351 मिलियन डॉलर मूल्य का रूसी कोयला और 222 मिलियन डॉलर मूल्य के ऑयल प्रोडक्ट इम्पोर्ट किए।

              भारत पर 50% टैरिफ में रूस से तेल खरीदने पर 25% पेनल्टी

              ट्रम्प भारत पर अब तक कुल 50% टैरिफ लगा चुके हैं। इसमें 25% रेसीप्रोकल यानी जैसे को तैसा टैरिफ और रूस से तेल खरीदने पर 25% पेनल्टी है। रेसीप्रोकल टैरिफ 7 अगस्त से और पेनल्टी 27 अगस्त से लागू हुआ था।

              अमेरिका ने रूस पर दबाव बनाने के लिए भारत पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं। ट्रम्प कई बार यह दावा कर चुके हैं कि, भारत के तेल खरीद से मिलने वाले पैसे से रूस, यूक्रेन में जंग को बढ़ावा देता है।


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