Sunday, March 1, 2026

              ट्रम्प आर्मेनिया-अजरबैजान के बीच 37 साल पुरानी जंग खत्म कराएंगे, दोनों देशों के नेताओं से आज मुलाकात; अबतक 6 जंग रुकवाने का दावा

              वॉशिंगटन डी सी: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प आर्मेनिया और अजरबैजान के बीच चल रही 37 साल पुरानी जंग खत्म कराएंगे। इसके लिए वे शुक्रवार को व्हाइट हाउस में दोनों देशों के नेताओं से मुलाकात करेंगे।

              रॉयटर्स के मुताबिक, आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पशिनयान और अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव व्हाइट हाउस में एक आधिकारिक शांति समझौते पर भी हस्ताक्षर कर सकते हैं।

              ट्रम्प ने इस मुलाकात को दोनों देशों के बीच शांति समिट बताया है। ट्रम्प अब तक दुनियाभर में 6 जंग खत्म करवाने का दावा कर चुके हैं।

              अजरबैजानी राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव (दाएं) और आर्मेनियाई प्रधानमंत्री निकोल पशिनयान (बाएं) 10 जुलाई को अबू धाबी में शांति बातचीत के लिए मिले थे।

              अजरबैजानी राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव (दाएं) और आर्मेनियाई प्रधानमंत्री निकोल पशिनयान (बाएं) 10 जुलाई को अबू धाबी में शांति बातचीत के लिए मिले थे।

              ट्रम्प का 6 देशों के बीच जंग रुकवाने का दावा

              भारत-पाकिस्तान: 22 अप्रैल को पहलगाम में आतंकी हमले के बाद दोनों देशों के बीच 7 मई को संघर्ष शुरू हुआ। यह 4 दिन चला। ट्रम्प ने इसे रुकवाने का दावा किया, हालांकि भारत ने इससे इनकार किया है।

              इजराइल-ईरान: यह जंग 13 जून को शुरू हुई, जब इजराइल ने ईरान के प्रमुख सैन्य और परमाणु ठिकानों पर हमला किया। ये जंग 12 दिनों तक चली।

              थाईलैंड-कंबोडिया: 24 जुलाई को प्रसात ता मुएन थॉम मंदिर के पास सीमा विवाद के कारण सैन्य झड़प शुरू हुई। 5 दिन बाद यह संघर्ष थम गया।

              रवांडा- कांगो: 2023 में रवांडा के M23 विद्रोही समूह ने जातीय भेदभाव के कारण कांगो में हमले शुरू किए। जून 2025 में ये हिंसा तेज हुई। इसके बाद ट्रम्प ने जून में दावा किया कि उनके प्रशासन ने रवांडा और कांगो के बीच सीजफायर कराया है।

              सर्बिया-कोसावो: 2023 में कोसोवो के बनज्स्का में सर्बियाई हमलावरों और कोसोवो पुलिस के बीच हिंसक झड़प से जंग शुरू हुई थी। ये 2025 में जारी भी जारी रही। ट्रम्प ने जून में दावा किया था कि उन्होंने हस्तक्षेप कर इस जंग को रोका था।

              मिस्र-इथियोपिया: 2020 में नील नदी पर ग्रैंड इथियोपियन रेनेसां डैम (GERD) के पानी के उपयोग को लेकर संघर्ष शुरू हुआ। जुलाई 2024 में मिस्र ने सैन्य तैनाती बढ़ाई, जिससे विवाद बढ़ा। ट्रम्प ने जून 2025 में मिस्र-इथियोपिया विवाद सुलझाने की बात कही।

              ट्रम्प बोले- पूरी दुनिया के लिए ऐतिहासिक दिन

              ट्रम्प ने इसे आर्मेनिया, अजरबैजान, अमेरिका और पूरी दुनिया के लिए ऐतिहासिक दिन बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के साथ आर्थिक अवसरों को बढ़ाने के लिए द्विपक्षीय समझौते भी किए जाएंगे।

              ट्रम्प ने कहा कि यह शिखर सम्मेलन दक्षिण काकेशस क्षेत्र की संभावनाओं को पूरी तरह खोलने में मदद करेगा।

              आर्मेनिया-अजरबैजान के बीच 1988 से विवाद

              1920 के दशक में, सोवियत संघ ने आर्मेनिया और अजरबैजान पर कब्जा कर लिया था। 1980 के दशक के दौरान सोवियत संघ का शासन कमजोर हुआ।

              इसके बाद 1988 में नागोर्नो-काराबाख की संसद ने आर्मेनिया के साथ जाने का फैसला किया। इससे इलाके में रहने वाले अजरबैजानी लोगों का गुस्सा बढ़ गया। दोनों समुदायों के बीच 1991 में हिंसक झड़पें तेज हो गई।

              आर्मेनियाई लोग ईसाई हैं, जबकि अजरबैजानी तुर्किश मूल के मुस्लिम हैं। इन धार्मिक और सांस्कृतिक अंतरों ने दोनों समुदायों के बीच अविश्वास और टकराव को बढ़ाया। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर सांस्कृतिक विरासत और मस्जिदों-चर्चों को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया।

              अबू धाबी में जुलाई में शांति बातचीत बेनतीजा रही

              दोनों देशों के बीच शांति के लिए कई बार बातचीत हुई, लेकिन अभी तक कोई बड़ा समझौता नहीं हो सका। अजरबैजान ने शांति समझौते से पहले आर्मेनिया से अपनी संविधान में बदलाव करने की मांग की थी, जिसमें काराबाख पर क्षेत्रीय दावों को हटाने की बात शामिल है।

              जुलाई में अबू धाबी में और मई में अल्बानिया में दोनों नेताओं की मुलाकात हुई थी, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने भी दोनों देशों से शांति समझौते पर जल्द हस्ताक्षर करने की अपील की थी।


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