Monday, April 15, 2024
Homeछत्तीसगढ़वर्मी खाद उत्पादन के माध्यम से स्थानीय स्तर पर रोजगार प्राप्त कर...

वर्मी खाद उत्पादन के माध्यम से स्थानीय स्तर पर रोजगार प्राप्त कर महिलाएं हो रही आत्मनिर्भर….

  • गोधन न्याय योजना से हमें रोजगार प्राप्त हुआ और अपना कर्ज भी चुका दिया – गीता
  • आय के अन्य स्रोत प्राप्त होने से समूह के अन्य महिलाओं के जीवन में हुआ आर्थिक सुधार

बेमेतरा: छत्तीसगढ़ शासन की गोधन न्याय योजना को लेकर ग्रामीणों और किसानों में उत्साह है। इस योजना के तहत स्व सहायता समूह की महिलाएं गौठानों में गोबर से वर्मी कम्पोस्ट खाद के उत्पादन में जुटी है। जिले के सभी गौठानों में गोबर की खरीदी और वर्मी खाद तैयार करने की प्रक्रिया सुचारू रूप से चल रही है।

आय के अन्य स्रोत प्राप्त होने से समूह के अन्य महिलाओं के जीवन में हुआ आर्थिक सुधार

इसी क्रम में हम बात कर रहे हैं तहसील बेमेतरा के ग्राम झालम की महिला स्व-सहायता समूह की जो गोठान में वर्मी खाद का निर्माण कर रहे हैं। इस समूह के सदस्य श्रीमती गीता पति शंकर वैष्णव ने बताया कि उनके समूह का नाम जय मॉ सरस्वती महिला स्व-सहायता समूह है, समूह में कुल दस सदस्य है। पहले वे अपने परिवार के भरण पोषण के लिए मजदूरी और खेती-बाड़ी का कार्य करती थी, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर थी और आय का अन्य स्रोत भीं नहीं था जिसमे परिवार कर्जे में चला गया था । फिर उन्होने गांव के अन्य महिलाओं के साथ मिलकर समूह बनाया और छत्तीसगढ़ शासन की महात्वाकांक्षी गोधन न्याय योजना से जुड़ी और कृषि विभाग के आत्मा योजनांतर्गत उनके समूह को निः शुल्क केचुआ प्रदाय किया गया एवं केचुआ खाद उत्पादन हेतु प्रशिक्षण दिया गया द्य खाद बनाने की प्रक्रिया और साधनों हेतु समय-समय पर कृषि अधिकारियों के द्वारा मार्गदर्शन प्राप्त कर सफलतापूर्वक वर्मी खाद का उत्पादन समूह द्वारा किया जा रहा है।

समूह की महिलाएं केंचुआ खाद के साथ केंचुआ का भी उत्पादन कर अतिरिक्त आय प्राप्त कर रही है। अब तक 580.70 क्विंटल केंचुआ खाद का उत्पादन किया गया और 227634.00 रू. खाद का विक्रय किया गया। गीता वैष्णव कहती है कि गोधन न्याय योजना से हमें रोजगार प्राप्त हुआ और अपना कर्ज भी चुका दिया। इससे मेरी व समूह के अन्य महिलाओं के जीवन में काफी आर्थिक सुधार हुआ है। सभी महिलाएं समूह में काम कर बहुत खुश और उत्साहित है साथ ही गौठान ग्राम के अन्य समूह जैसे आदिवासी महिला स्व-सहायता समूह द्वारा सब्जी उत्पादन करके 8000 रू. लाभ प्राप्त किए।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular