जिले में 18 मार्च तक मनाया जाएगा विश्व ग्लाकोमा सप्ताह…

              बेमेतरा: राष्ट्रीय अंधत्व एवं अल्प दृष्टि नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत कलेक्टर श्री पदुम सिंह एल्मा एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. गणेश लाल टंडन तथा सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक डॉ. संतराम चुरेन्द्र के निर्देशानुसार 12 मार्च से 18 मार्च 2023 तक ’विश्व ग्लाकोमा सप्ताह’ जिला बेमेतरा में मनाया जा रहा है। ग्लाकोमा के संबंध में 15 मार्च को जिला चिकित्सालय में लोगों में जागरूकता अभियान चला कर लोगों का इलाज एवं निःशुल्क चश्मा उपलब्ध कराया गया। डॉ. समता रंगारी, नेत्र रोग विशेषज्ञ ने ग्लाकोमा के संबंध में विस्तार से चर्चा की ग्लाकोमा (कॉचबिंद) आँख के अंदर एक ऐसी स्थिति है, जिसमें आँखों का तनाव धीरे-धीरे बढ़ता है और ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचाता है। अतः परिणाम नजर धीरे-धीरे बंद हो जाती है, सही समय पर इलाज कराने पर रोशनी जाने से रोका जा सकता है।

              विजय कुमार देवांगन सहायक नोडल अधिकारी (अंधत्व) ने बताया कि 40 वर्ष से अधिक उम्र के सभी व्यक्तियों को समय-समय पर अपनी आँखों की जांच करानी चाहिए। आंखों के अंदर लगातार एक्वस हुमर नामक तरल प्रवाहित होते रहता है। आँखों की निश्चित आकृति बनाये रखने के लिए निश्चित मात्रा का एक्वस हुमर तैयार होते रहता है और उसी मात्रा में आँखों से बाहर निकलते रहता है। यदि बाहर निकलने का रास्ता किसी वजह से बंद हो जाता है तो आँखों के अंदर तरल की मात्रा बढ़ने से आँखों का तनाव बढ़ जाता है। ये तनाव सीधा ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचाकर धीरे-धीरे नजर बंद कर देता है। अगर सही समय पर इलाज न किया जाये, तो व्यक्ति हमेशा के लिए अंधा हो सकता है। ग्लाकोमा की शिकायत 40 वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्ति को, अपने परिवार में किसी को होने से, चश्में का नंबर जल्दी-जल्दी बदलना, बी.पी. या डायबिटीक के मरीज को हो सकती है। यदि आपको आँखों से बल्ब के चारों ओर रंगीन गोले नजर आए, आँखों में दर्द महसूस हो, रोशनी कम लगे तो यह काला मोतियाबिंद (ग्लाकोमा) हो सकता है।

              ग्लाकोमा का सही समय पर पता चलने पर इसे बढ़ने से रोका जा सकता है। यदि ग्लाकोमा के कारण दृष्टि चली गई है तो उसे जांच कर उपचार किया जाये तो बची हुई दृष्टि को बचाया जा सकता है। आँखों की दृष्टि जाने से पहले ही मरीज को स्वयं जल्द-से-जल्द इसकी जांच करानी चाहिए तभी इस बीमारी को रोका जा सकता है। इस बीमारी से बचने के लिए एक बार नेत्र विशेषज्ञ से जांच अवश्य करानी चाहिए। यदि एक बार ग्लाकोमा हो जाए, तो हमें पूरी उम्र देखभाल करने की आवश्यकता पड़ती है। कार्यक्रम में रेखा कविलास, स्टॉफ नर्स, नेत्र सहायक अधिकारी विजय देवांगन, श्री सोहित साहू, अब्दुल हाशिम खान, अनिता धीवर, स्टॉफ नर्स, कृष्णा वर्मा, संतोष, चाकेन्द्र वर्मा एवं अन्य स्टॉफ उपस्थित थे।


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