Saturday, May 18, 2024
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जांजगीर के मरघट्टी गांव के लोगों की पहल: हाथियों ने तोड़े मकान, ग्रामीण बोले- दर्शन देने आए थे भगवान गणेश, हम नहीं लेंगे मुआवजा…

फाइल फोटो। - Dainik Bhaskar

फाइल फोटो।

  • हथिनी और नन्हे शावक ने दो दिनों तक मरघट्‌टी पंचायत में घूमकर दर्जन भर से ज्यादा किसानों की फसल और बाड़ी में लगी सब्जियों को कर दी थी बर्बाद

जांजगीर/ मरघट्‌टी पंचायत के ग्रामीणों ने वन विभाग से हाथियों द्वारा घर और फसल को पहुंचाए नुकसान का मुआवजा लेने से इनकार कर दिया। उन्होंने विभाग को पत्र लिखकर कहा है कि भगवान गणेश लंबे समय बाद उनके जिले में दर्शन देने आए थे, इसलिए वे फसल नुकसान पर एक रुपए भी मुआवजा के रूप में नहीं लेंगे। उन्होंने गांव में हाथी द्वारा किए गए नुकसान का आंकलन करने पहुंची वन कर्मियों की टीम को गांव से वापस लौटा दिया। महासमुंद, सारंगढ़ होते हुए हथिनी और नन्हा शावक 26 फरवरी की सुबह मालखरौदा के मरघट्‌टी पहुंचे थे। आते ही हथिनी और शावक ने गांव राधिका खुंटे की बाड़ी में पैरावट व सब्जी की फसल को नुकसान पहुंचाया। इसके बाद गांव के टीकाराम समेत दर्जन भर किसानों के खेतों में लगे धान की फसल को रौंदा। दोनों हाथी ने मरघट्‌टी, देवगांव, बरपाली समेत आसपास के गांव में दो दिनों तक विचरण का किसानों की खेत और बाड़ी में लगी फसल को नुकसान पहुंचाया। मिट्‌टी की दीवार तोड़ी, इसके बाद वापस सारंगढ़ की तरफ लौट गए। गांव में किसी भी प्रकार की कोई जनहानि नहीं हुई।

हाथियों का झुंड जांजगीर तक पहुंचने की खबर पाकर वाइल्ड लाइन के पीसीसीएफ भी जांजगीर पहुंचे। इस दौरान जांजगीर व रायगढ़ वन मंडल की पूरी टीम भी सुबह से हाथी और ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए तैनात थे। ग्रामीणों ने विभाग को लिखे पत्र में विभाग द्वारा की निगरानी और सुरक्षा के लिए मौके पर मौजूद वन कर्मियों का भी आभार जताया है।

सालाना 10 करोड़ तक का मुआवजा बांटती है सरकार
छत्तीसगढ़ के हाथी प्रभावित इलाकों में छत्तीसगढ़ सरकार हर साल करीब 17 से 19 हजार फसल प्रकरण पर 9 से 10 करोड़ रुपए तक फसल नुकसानी पर प्रभावितों को बांटती है। बीते दो सालों की बात करे तो छत्तीसगढ़ में साल 2018-19 में 17 हजार 708 फसल नुकसानी के प्रकरण में 9 करोड़ 8 लाख रुपए व 2019-20 में 18 हजार 788 प्रकरण में करीब 8 करोड़ रुपए का भुगतान किया। जांजगीर जिले में हाथियों का उत्पात नहीं होने के कारण ऐसे प्रकरण पर व्यय नहीं के बराबर है।

हाथी का शावक गोमर्डा अभयारण्य में
गांव में नुकसान को अंजाम देने के बाद हथिनी और शावक महासमुंद के जंगल चले थे। हाल ही में शावक को फिर गोमर्डा अभयारण्य में देखा गया, पर हथिनी उसके साथ नजर नहीं आई।

ग्रामीणों ने आंकलन तक नहीं करने दिया
विभाग के उड़नदस्ता प्रभारी अशोक मिश्रा ने बताया कि हाथी के लौटने के बाद क्षेत्र प्रभारी गांव में नुकसान का आंकलन करने पहुंचे थे, ताकि ग्रामीणों को नुकसान पर शासन के तय मापदंडों के अनुरूप क्षतिपूर्ति राशि दी जा सके, लेकिन लोगों ने उन्हें नुकसान का आंकलन ही नहीं करने दिया। सभी ने हाथी को भगवान गणेश का रूप बताते हुए एक रुपए भी मुआवजा लेने से मना कर दिया।

मुआवजा नहीं लेने का ऐसा प्रदेश में पहला मामला
“पूरे प्रदेश ऐसा पहला मामला है जिसमें हाथियों के नुकसान पर किसी गांव के ग्रामीण मुआवजा लेने से इनकार कर रहे हैं। मरघट्‌टी गांव में आए हाथी को ग्रामीणों ने भगवान गणेश का रूप बताते हुए मुआवजा नहीं लेने की बात कही है। वन्यजीवों के प्रति ऐसी भावना हाथी प्रभावित क्षेत्रों के लिए एक अच्छा उदाहरण है।”
-प्रेमलता यादव, डीएफओ जांजगीर वन मंडल

पंचायत ने मुआवजा नहीं लेने का लिया फैसला
“भगवान गणेश लंबे समय बाद हमारे गांव दर्शन देने आए थे, इसलिए पूरे पंचायत में सभी ने सर्वसम्मति से नुकसान पर एक रुपए भी मुआवजा लेने से इंकार कर दिया। इस संबंध में सभी ने डीएफओ को लिखित आवेदन भी प्रस्तुत किया है। विभाग ने जिस तत्परता दिखाई उसके लिए भी हमने आभार व्यक्त किया है।”
-तुकेश्वर प्रसाद कश्यप, सरपंच मरघट्‌टी पंचायत

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