Thursday, February 22, 2024
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सिस्टम में संक्रमण:कोरोनाकाल में जब स्कूल बंद थे तब मध्यान्ह भोजन के लिए 1 करोड़ 78 लाख रुपए के बर्तन की खरीदी

राजनांदगांव. बंटवाने के आदेश को लेकर ब्लॉक अफसर कंफ्यूज हैं। इसलिए बर्तन डंप हैं।

  • संकुल समन्वयकों ने बर्तन की डिमांड ही नहीं की, बावजूद इसके कम वजन वाले बर्तन भेज दिए गए
  • कई स्कूलों में वितरण भी नहीं हुआ: वजन कम होने पर डीईओ ने कंपनी को बर्तन वापस ले जाने के लिए कहा, बाद में खुद ही वितरण करने जारी कर दिया आदेश

राजनांदगांव/ स्कूलों में मध्यान्ह भोजन का संचालन स्व-सहायता समूह के माध्यम से कराया जाता है। भोजन बनाने और वितरण की पूरी व्यवस्था समूह के सदस्य संचालित करते हैं। जरूरत के हिसाब से बर्तनों की खरीदी भी लोकल स्तर पर होती है पर जिले में कोरोना संकट काल के दौरान शिक्षा विभाग की ओर से बिना कोई डिमांड के बड़े पैमाने पर बर्तनों की खरीदी कर संकुलों में सप्लाई का आदेश दे दिया गया।

इन बर्तनों की खरीदी और सप्लाई तब की गई जब स्कूल बंद थे। बताया गया कि प्रत्येक स्कूल में 12 हजार रुपए तक के बर्तनों की सप्लाई की गई है। इस हिसाब से एक करोड़ 78 लाख रुपए तक की सप्लाई बताई जा रही है। गुणवत्ता ठीक नहीं होने की शिकायत पर डीईओ ने टीम बनाकर जांच कराई तो प्रत्येक बर्तन में वजन की कमी पाई गई। डीईओ ने रिपोर्ट के आधार पर बर्तनों को वापस ले जाने कंपनी को लिखा।

आप भी जानिए, वजन में कितना अंतर
डीईओ की ओर से बनाई गई टीम के सदस्यों ने जांच में पाया कि भगौना गंज बर्तन का वजन 3.150 किग्रा होना था पर ठेकेदार ने 2.456 किग्रा का बर्तन भेजा। प्रत्येक नग बर्तन में यही कमी पाई गई। स्टील की कढ़ाई का वजन 5.500 किग्रा होना था पर भेजे गए कढ़ाई का वजन 2.502 किलो ग्राम निकला। 2 लीटर के जग का वजन 0.500 किग्रा होना था। वहीं स्टील तगाड़ी का वजन 1.400 किग्रा देना था पर ठेकेदार ने 1.214 किलो ग्राम बर्तन की सप्लाई की।

मामले में कब कौन सा आदेश हुआ
ब्लॉक अफसरों का कहना है कि बिना डिमांड के बर्तन भेजे गए थे। किसी की शिकायत के बाद जांच हुई तो डीईओ ने 20 अगस्त 2020 को कंपनी को बर्तनों को वापस ले जाने पत्र लिखा था पर कंपनी की ओर से कम वजन वाले बर्तनों को वापस नहीं ले जाया गया। इसके बाद डीईओ की ओर से 12 जनवरी 2021 को इन्हीं बर्तनों को बंटवाने का आदेश दिया तो ब्लॉक अफसर असमंजस आ गए। इसके चलते कई स्कूलों में बर्तन पहुंचा ही नहीं है।

कमेटी ने पकड़ी गड़बड़ी
मध्यान्ह भोजन के लिए बर्तनों की सप्लाई महासमुंद की मेसर्स क्रिस्टल इंडस्ट्रीज की ओर से की गई है। कंपनी को 1211 प्राथमिक स्कूल, 280 मिडिल स्कूल में बर्तन सप्लाई का ठेका मिला। कंपनी की ओर से प्रेशर कुकर, भगौना (गंज), स्टील कढ़ाई, जग, स्टील तगाड़ी की सप्लाई की गई है। बर्तनों की क्वालिटी को लेकर सवाल उठने पर डीईओ ने हर ब्लॉक में जांच टीम बनवाई थी।

बीईओ ने कहा- डीईओ दफ्तर से आई सूची
ब्लॉक अफसरों ने बर्तनों की डिमांड की कोई सूची डीईओ दफ्तर में नहीं भेजी थी। वितरण का आदेश आया तो डीईओ की ओर से स्कूलों की सूची भी भेजी गई। सूची में शामिल स्कूलों में ही बर्तनों को पहुंचाना है पर इनमें से ज्यादातर स्कूलों में पहले से ही बर्तन मौजूद हैं। शाला विकास प्रबंधन समिति, ग्राम पंचायत और समूह की ओर से बर्तनों की उपलब्धता कराई गई है।

डीईओ बोले-13 लाख रुपए की कटौती की
डीईओ एचआर सेाम का कहना है कि जांच में वजन और बर्तनों की संख्या कम पाए जाने के बाद ठेकेदार का 13 लाख रुपए की कटौती की गई। बर्तनों की सप्लाई शासन स्तर से हुई थी। स्कूलों में वितरण करने का आदेश दिया गया है। स्कूलों में बर्तन पहुंच गया होगा। आगे की जानकारी ली जाएगी।

  • Krishna Baloon
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