Saturday, February 21, 2026

              CG: अंधविश्वास ने ली जान… आग से झुलसी बच्ची को अस्पताल ले जाने के बजाए घर में ही करते रहे इलाज और झाड़ फूंक, पांचवें दिन…

              जांजगीर: विज्ञान के युग में भी लोग या तो अंधविश्वास से अभी भी मुक्त नहीं हुए हैं या फिर लापरवाही में झाड़ फूंक, बैगाई, गुनियाई या खुद ही बीमारियों का इलाज कर जान गंवा रहे हैं।

              आग से जलने के बाद दस साल की बच्ची को इलाज कराने के लिए अस्पताल ले जाने के बजाए उसका घर में ही मरहम पट्‌टी करते रहे। इसका दुष्परिणाम यह हुआ कि शरीर में इन्फेक्शन फैल गया और जलने के पांचवें दिन बच्ची की मौत हो गई। मामला शिवरीनारायण थाना क्षेत्र के तुस्मा का है। नवागढ़ के अंतिम छोर पर 9 किमी दूर और शिवरीनारायण से करीब 8 किमी पहले बसे गांव तुस्मा में हुई एक दस साल की बच्ची की मौत की खबर चौंकाती है। बच्ची अपने घर में ही तिल- तिल कर मरती रही और उसके घर के लोग उसका इलाज कराने के बजाय उसे अपने घर में ही रखे रहे। तुस्मा के सड़क पारा निवासी छतराम पटेल की बेटी भावना पटेल (10 साल) खेलते समय 5 अक्टूबर को घर की रसोई में खाना बनाने के लिए बनाए गए मिट्‌टी के चूल्हे में खाना बनाने के लिए जलाई गई आग में गिर गई।

              आग में गिरने से उसके छाती के नीचे और कमर के ऊपर का हिस्सा यानि पेट में आग लगने से वह जल गई। उसके घर वाले उसका इलाज कराने के लिए उसे कहीं नहीं ले गए बल्कि मेडिकल से मल्हम, पट्‌टी आदि लाकर घर में ही इलाज करने लगे। आग से जलने के बाद सही इलाज नहीं मिलने के कारण शरीर के अंदरूनी हिस्से में इनफेक्शन फैलने लगा और पांचवे दिन 9 अक्टूबर को बच्ची भावना की तबीयत गंभीर हो गई। तब उसके घरवाले इलाज कराने के लिए बाहर ले जाने के लिए गाड़ी बुलाए लेकिन उसे इलाज के लिए ले जा पाते इससे पहले ही आग से जली भावना जिंदगी की जंग हार गई और उसकी मौत हो गई। तब पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने मृतका के पिता का बयान लिया है, जिसमें उसने चूल्हा में गिरने से आग में जलन के बाद घर में ही इलाज करने की जानकारी दी है।

              घर में ही करा रहे थे इलाज, जिससे गई उसकी जान

              तुस्मा में दस साल की बच्ची आग से जली थी। उसका इलाज उसके घर वाले घर में ही कर रहे थे, मिट्‌टी वगैरह का लेप लगाया गया था। बच्ची की मौत के बाद पुलिस को सूचना मिलने पर मर्ग कायम किया गया है। लोगों को जागरूक होना चाहिए।

              -विजय अग्रवाल, एसपी जांजगीर-चांपा


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