Tuesday, February 17, 2026

              Chhattisgarh : बंद खदान में कोयला चोरी करते समय धंसी सुरंग, दबे युवक को निकालने 24 घंटे से रेस्क्यू ऑपरेशन जारी; 150 फीट नीचे उतरे थे ग्रामीण

              सूरजपुर: जिले में सालों से बंद पड़ी जयनगर भूमिगत खदान में सोमवार को सुरंग बनाकर कोयला चोरी किया जा रहा था। तभी अचानक सुरंग की छत से चट्टान धंसने से एक युवक दब गया। 24 घंटे बाद भी युवक को रेस्क्यू टीम नहीं निकाल सकी है।

              दरअसल, SECL बिश्रामपुर क्षेत्र में स्थित बाबा मस्तनाथ मंदिर के पीछे खदान है। जिसे बंद कर दिया गया है। लेकिन कोयला निकालने के लिए ग्रामीणों ने 4 जगह पर सुरंग बना रखा है। जहां सोमवार सुबह करीब 30 ग्रामीण कोयला चोरी करने घुसे थे।

              मंगलवार सुबह फिर पहुंची रेस्क्यू टीम।

              मंगलवार सुबह फिर पहुंची रेस्क्यू टीम।

              सुरंग धंसने से फंसा युवक

              एक सुरंग से सुनील सोनी (30 वर्ष) निवासी केनापारा, तेलईकछार सहित बुधियार साय (25 वर्ष) निवासी खरसुरा, नंदू सिंह (20 वर्ष) निवासी कम्दा बस्ती, शिवप्रताप निवासी नरेशपुर, संजय निवासी ग्राम खरसुरा और साधन बंगाली निवासी सिलफिली बोरियों में कोयला भरकर बाहर निकल रहे थे।

              इसी दौरान सुरंग से करीब 30 फीट दूरी पर बंद खदान की छत की चट्टान गिर गई। जिससे सुनील सोनी दब गया। जबकि बाकी लोग बाहर निकल गए। जिसके बाद घटना की सूचना ग्रामीणों को दी गई।

              सोमवार को नहीं निकला युवक, सुबह पहुंची टीम

              सोमवार को बिश्रामपुर एसआई एसआर भगत, एएसआई डीएन चौधरी पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। SECL के क्षेत्रीय महाप्रबंधक अजय तिवारी, अधिकारी और रेस्क्यू टीम बंद खदान में दबे सुनील सोनी को बाहर निकालने पहुंची। सोमवार को सफलता नहीं मिलने पर मंगलवार सुबह से टीम मौके पर डटी है।

              मौके पर मौजूद पुलिस और ग्रामीण।

              मौके पर मौजूद पुलिस और ग्रामीण।

              खतरनाक सुरंग में रेस्क्यू ऑपरेशन

              युवक को बाहर निकालने और कोई रास्ता नहीं है। इसलिए रेस्क्यू टीम खतरनाक सुरंग में घुसी है। मलबे को हटाकर युवक को निकालना चुनौती बनी हुई है। रेस्क्यू के दौरान सुरंग की छत गिरने की आशंका है। इसलिए रेस्क्यू सावधानी से चलाया जा रहा है।

              3 करोड़ में बनाई वॉल, फिर घुस रहे ग्रामीण

              एसईसीएल ने बंद खदान को सुरक्षित करने के लिए 3 करोड़ रुपए खर्च कर 11 किलोमीटर में रिटर्निंग वॉल बनाया है। इसके बावजूद ग्रामीण वॉल को क्षतिग्रस्त कर अंदर घुसकर कोयला चोरी करते हैं। ग्रामीण 150 फीट नीचे उतरकर कोयला निकालते हैं। जिसे ईंट भट्ठों में बेचा जाता है।

              सुरंग बंद कराने पर बना लेते हैं रास्ता

              ओसीएम खदान के मैनेजर वीपी सिंह ने बताया कि प्रबंधन ने कई बार रास्ता बंद किया है। लेकिन ग्रामीण कोयला चोरी करने के लिए फिर से नया रास्ता बना लेते हैं। वहीं, सुनील सोनी के साथ गए ग्रामीण युवकों ने बताया कि सुनील ही उनसे कोयला निकलवाता था और ईंट भट्ठों में बेचता था।


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