Chhattisgarh : अवैध कोयला खदान धंसी, 2 की मौत, चोरी-छिपे कोयला निकालने गए थे तीन लोग; पानी पीने बाहर निकले युवक की बची जान

              सरगुजा: जिले के उदयपुर में शुक्रवार शाम कोयला खदान धंसने से नाबालिग समेत 2 लोगों की दबने से मौत हो गई। रेस्क्यू कर देर रात तक दोनों के शव बाहर निकाले गए। जहां हादसा हुआ है, वहां कई दिनों से चोरी से कोयला निकाला जा रहा था।

              दरअसल, सुखरी भंडार गांव से करीब 3 किमी दूर सानीबर्रा जंगल के बांदा ढोड़गा में शुक्रवार को एक नाबालिग के साथ दो युवक अवैध रूप से कोयला निकालने के लिए पहुंचे थे। वे अवैध खदान की सुरंग में घुसकर कोयला निकाल रहे थे।

              हादसे में मृत युवक बुधलाल मझवार की तस्वीर।

              हादसे में मृत युवक बुधलाल मझवार की तस्वीर।

              पानी पीने बाहर आया तीसरा साथी बचा

              इसी दौरान अचानक खदान की छत धंसने से तिरंगा मंझवार (17) और बुधलाल मझवार (20) दब गए। उनका तीसरा साथी लक्ष्मण मंझवार किस्मत से पानी पीने के लिए बाहर निकला था, जिससे उसकी जान बच गई। उसी ने घटना की जानकारी ग्रामीणों को दी।

              सूचना मिलने पर वन विभाग और उदयपुर पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। ग्रामीणों की मदद से उन्हें देर शाम बाहर निकाला गया। उदयपुर अस्पताल में डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। शनिवार सुबह शवों का पोस्टमॉर्टम करवाकर परिजन को सौंप दिया है।

              हादसे में मृत किशोर तिरंगा मझवार की तस्वीर।

              हादसे में मृत किशोर तिरंगा मझवार की तस्वीर।

              कई दिनों से निकाला जा रहा था कोयला

              उदयपुर क्षेत्र के जंगलों के नीचे कोयले का भंडार है। बांदा ढोड़गा में जहां हादसा हुआ, वहां कई दिनों से अवैध खदान से कोयला निकाला जा रहा था। इसके लिए दो सुरंगें बनाई गई हैं। यहां से कोयला निकालकर ईंट भट्ठों में बेच दिया जाता है।

              उदयपुर थाना प्रभारी कुमारी चंद्राकर ने बताया कि अवैध खदान को वन विभाग ने बंद कर रहा है। ऐसी कोई और अवैध खदान क्षेत्र में संचालित मिली तो उसे भी बंद कराया जाएगा। बांदा ढोड़गा में करीब 150 फीट तक लंबी सुरंग है।

              एक दिन पहले वन विभाग ने दी थी चेतावनी

              बताया जा रहा है कि 11 अप्रैल को वन विभाग के कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर कोयला निकालने वालों को समझाइश देकर भगा दिया था। वनकर्मियों ने गांव में मीटिंग लेकर ग्रामीणों को कोयला निकालने के लिए खतरनाक क्षेत्र में न जाने की हिदायत भी दी थी। वन अमला इन सुरंगों को बंद कर पाता, इससे पहले ही हादसा हो गया और दो की जान चली गई।


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