रियाद: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प मिडिल ईस्ट दौरे के पहले दिन सऊदी अरब पहुंच गए हैं। इस दौरान सऊदी की वायुसेना ने उन्हें एयर स्पेस में एस्कॉर्ट किया।
क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने ट्रम्प का एयरपोर्ट पर स्वागत किया। इस दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति को सऊदी की पारंपरिक कॉफी पिलाई गई।
दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के बाद ट्रम्प की यह पहली औपचारिक विदेश यात्रा है। इससे पहले वे पोप फ्रांसिस के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए 26 अप्रैल को वेटिकन पहुंचे थे।
ट्रम्प कल यानी 14 मई को खाड़ी नेताओं के शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे और फिर कतर जाएंगे। 15 मई को ट्रम्प अपने दौरे के आखिरी दिन UAE पहुंचेंगे।
ट्रम्प के सऊदी दौरे की 6 तस्वीरें….

ट्रम्प के विमान की सऊदी के लड़ाकू विमानों ने एयर स्पेस में एंटर करने के बाद एस्कॉर्ट किया।

रियाद एयरपोर्ट पर ट्रम्प का विमान एयरफोर्स वन लैंड हुआ।

क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ट्रम्प का स्वागत करने पहुंचे।

ट्रम्प अपने स्पेशल विमान एयरफोर्स वन से बाहर निकले।

ट्रम्प को सऊदी की पारंपरिक कॉफी पिलाई गई।

डोनाल्ड ट्रम्प और क्राउन प्रिंस के बीच औपचारिक बातचीत हुई।
ट्रम्प ने 2017 सऊदी जाकर परंपरा तोड़ी
अमेरिका में राष्ट्रपति बनने के बाद कनाडा-मेक्सिको या फिर यूरोपीय देश की यात्रा करने की परंपरा है। बराक ओबामा ने पहले विदेशी दौरे पर कनाडा की यात्रा की थी। उनसे पहले जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने अपने पहले विदेशी दौरे पर मेक्सिको की यात्रा की थी।
ट्रम्प ने 2017 में राष्ट्रपति बनने के बाद सबसे पहले सऊदी अरब पहुंच कर इस परंपरा को तोड़ा था। पिछले राष्ट्रपति जो बाइडेन अपने पहले दौरे पर ब्रिटेन गए थे।
दूसरी बार राष्ट्रपति बनने पर ट्रम्प ने सबसे पहले MBS को फोन किया
ट्रम्प ने दूसरी बार राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के बाद सबसे पहले सऊदी प्रिंस सलमान को ही फोन किया था। शपथ ग्रहण के कुछ दिन बाद ट्रम्प से उनके पहले विदेशी दौरे को लेकर मीडिया ने सवाल किया था।
इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा था कि जो देश अमेरिका में सबसे ज्यादा निवेश करेगा, वे वहां का पहला दौरा करेंगे।
इसके बाद सऊदी सरकार ने एक बयान जारी कर कहा था कि उनका देश अगले चार सालों के भीतर अमेरिका में 600 अरब डॉलर (50 लाख करोड़ रुपए) के निवेश के लिए तैयार है।
हालांकि, ट्रम्प ने कहा था कि वो इसे बढ़ाकर 1 ट्रिलियन डॉलर होते देखना चाहते, जिसमें ज्यादा से ज्यादा अमेरिकी मिलिट्री इक्विपमेंट की खरीद भी शामिल है।
सऊदी अरब के सॉवरेन वेल्थ फंड और पब्लिक इन्वेस्टमेंट फंड (PIF) में 925 अरब डॉलर की भारी भरकम रकम है। सऊदी ने इसके जरिए पहले ही अमेरिका में कई इन्वेस्टमेंट कर रखे हैं। वहीं, UAE ने भी अगले 10 साल में अमेरिका के AI, सेमीकंडक्टर, एनर्जी और इन्फ्रा सेक्टर में 1.4 ट्रिलियन डॉलर निवेश करने की इच्छा जताई है।
ट्रम्प के सऊदी अरब से अच्छे रिश्ते
ट्रम्प ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान सऊदी अरब समेत खाड़ी देशों के साथ बेहतर रिश्ते कायम किए थे। ट्रम्प के पद छोड़ने के बाद भी सऊदी अरब ने ट्रम्प के दामाद और पूर्व सहयोगी जेरेड कुशनर की एक फर्म में 2 अरब डॉलर (17 हजार करोड़ रुपए) का निवेश किया था।
कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि जब जमाल खाशोज्जी की हत्या के बाद सऊदी अरब और अमेरिका के संबंधों पर असर पड़ा तो कुशनर ने इसे संभालने में मदद की थी।
ट्रम्प सऊदी अरब की यह यात्रा ऐसे मौके पर कर रहे हैं, जब उनके टैरिफ ने दुनिया भर में उथल पुथल मचा रखी है। इस साल के शुरुआती तीन महीनों में अमेरिका के आर्थिक प्रोडक्शन में गिरावट आई है, जो पिछले तीन सालों में पहली गिरावट है।
इजराइल-सऊदी अरब के बीच रिश्ता बेहतर करना चाहते हैं ट्रम्प
ट्रम्प ने पिछले कार्यकाल में सऊदी अरब और इजराइल के बीच रिश्ते बेहतर करने की कोशिश की थी। ट्रम्प चाहते हैं कि सऊदी अरब, इजराइल को मान्यता दे। वहीं सऊदी अरब का कहना है कि पहले फिलिस्तीन अलग देश बने जिसकी राजधानी पूर्वी यरुशलम हो और उनके बीच सीमा 1967 से पहले जैसी हो।
दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के बाद ट्रम्प ने उम्मीद जताई है कि सऊदी अरब अब्राहम अकॉर्ड को मानेगा। इस समझौते के तहत सऊदी अरब एक देश के तौर पर इजराइल को मान्यता देगा।
ट्रम्प ने अपने पहले कार्यकाल में इजराइल और कई इस्लामिक देशों के बीच रिश्ते बेहतर कराए थे। बहरीन, UAE, मोरक्को और सूडान ने ट्रम्प के दौर में ही इजराइल से संबंध कायम किए थे।

(Bureau Chief, Korba)





