रायपुर : अब बिजली बिल की चिंता नहीं-जसविन्दर सिंह छाबड़ा

              • ऊर्जा उत्पादक बन चुका हैं जसविन्दर सिंह

              रायपुर: प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक योजना है जिसका उद्देश्य घरों में मुफ्त बिजली प्रदान करना है। इसके तहत छत पर सौर पैनल लगाने के लिए सब्सिडी और आसान ऋण की सुविधा दी जाती है, जिससे लोग हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली पा सकते हैं और बिजली बिल में बचत कर सकते हैं।

              ऊर्जा उत्पादक बन चुका हैं जसविन्दर सिंह

              प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना आम उपभोक्ताओं को बिजली बिल के बोझ से राहत देने के साथ-साथ उन्हें ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ा रही है। सारंगढ़ के रानीसागर निवासी जसविन्दर सिंह छाबड़ा ने इस योजना का लाभ उठाते हुए अपने घर की छत पर 6 किलोवाट क्षमता का सोलर रूफटॉप सिस्टम स्थापित कराया है। स्थापना के बाद से उनका बिजली बिल पूरी तरह शून्य हो गया है। सितंबर माह में उनका बिल 9714 रुपए ऋणात्मक आया, यानी अब वे बिजली उपभोक्ता नहीं, बल्कि ऊर्जा उत्पादक बन चुके हैं।

              बिजली बिल की चिंता से मिली मुक्ति

              हितग्राही छाबड़ा बताते हैं कि पहले हर महीने 2500 से 3000 रुपए तक बिजली बिल देना पड़ता था, जो अब पूरी तरह बंद हो गया है। अब वही राशि, घर की जरूरतों और बचत में उपयोग कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब हमें बिजली बिल की कोई चिंता नहीं रहती। मैं इस योजना के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जी का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ।” उन्होंने बताया कि उन्हें योजना के तहत 3 किलोवॉट तक एक लाख 8 हजार रुपए की सब्सिडी दी जा रही है और कम ब्याज दर पर बैंक ऋण सुविधा प्राप्त हुई, जिससे सोलर सिस्टम लगाना आसान हो गया।

              हरित ऊर्जा के उपयोग को मिल रहा है बढ़ावा

              भारत सरकार की यह महत्वाकांक्षी योजना देश के एक करोड़ घरों को मुफ्त बिजली प्रदान करने और उन्हें ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में क्रांतिकारी पहल है। इस योजना के तहत घरों की छतों पर रूफटॉप सोलर पैनल लगाए जा रहे हैं, जिनसे प्रति माह 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली प्राप्त की जा सकती है। सरकार द्वारा आकर्षक सब्सिडी दी जा रही है, जिससे नागरिकों को आर्थिक राहत के साथ-साथ स्वच्छ और हरित ऊर्जा के उपयोग को भी बढ़ावा मिल रहा है। इससे कार्बन उत्सर्जन में कमी और पर्यावरण संरक्षण को बल मिल रहा है।


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