रायपुर : पद्मश्री डॉ सुरेंद्र दुबे को समर्पित ओपन माइक मंच पर प्रदेश भर के कलाकारों ने दी प्रस्तुति

              • बच्चों से लेकर बुजुर्गों ने भारी उत्साह के साथ आयोजन में लिया हिस्सा

              रायपुर: रायपुर साहित्य उत्सव में पद्मश्री डॉ सुरेंद्र दुबे को समर्पित ओपन माइक मंच तीनों दिन आकर्षक प्रस्तुतियों से गुलजार रहा ।गीत,संगीत,नृत्य,कहानियों,कविताओं से गुलजार रहा। प्रदेश भर से आए युवा कलाकारों ने अपनी मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। इस मंच की खास बात यह रही कि 5 साल के नन्हे बच्चों से लेकर 70 वर्ष के बुजुर्गों ने उत्साह से हिस्सा लिया। 

              कुछ प्रस्तुतियां बेहद खास रहीं जिनमें आकर्ष दीवान ने नवाब सादिक जंग बहादुर “हिल्म” द्वारा रचित लोकप्रिय कव्वाली “कन्हैया याद है कुछ भी हमारी” गाकर माहौल में सूफी रंग भर दिया। वहीं जब 5 साल के अविरल ने  “चोला माटी के राम”गीत गाया तो दर्शकों की भीड़ उमड़ पड़ी और लोग अपने मोबाइल लेकर अविरल का गीत रिकॉर्ड करने लगे।6 साल की तान्या संगोई ने हारमोनियम के साथ मीर अली मीर जी के गीत “नंदा जाही का रे” गीत प्रस्तुत किया और दर्शकों की तालियाँ बटोरी। रायपुर के ओमकार कोसले ने रामधारी सिंह दिनकर जी की कविता “रश्मि रथी” का धारा प्रवाह पाठन कर दर्शकों का दिल जीत लिया।राजनांदगांव से आई शीतल जैन पारख ने अपनी कहानी में सब्ज़ियों के माध्यम से स्त्री के जीवन  के विभिन्न पड़ावों को समझाने के लिए माँ और बेटी के संवाद को रेखांकित किया। रायपुर की रोली साहू ने जब दीप जले आना गाकर ख़ूब तालियाँ बटोरी बिलासपुर से आई 13 वर्षीय नन्ही कथक “नृत्यांगना अनिका बाजपेयी ने श्री कृष्ण की माखन चोरी पर आधारित प्रस्तुति दी। वहीं रुचि देवांगन ने कथक में ही श्री कृष्ण की आराधना पर आधारित प्रस्तुति दी। कुशल मोहता ने अपनी बांसुरी से राग देस की सुमधुर प्रस्तुति दी। इसके अलावा प्रदेश भर से आए कवियों ने विभिन्न विषयों पर काव्य पाठ किया।


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