तेहरान/वॉशिंगटन डीसी: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की धमकी के बीच ईरान ने दावा किया है उसने जमीन और समुद्र से हमला करने वाले 1000 ड्रोन तैयार कर लिए हैं।
ईरान की सेना ने दावा किया है अगर अमेरिका हमला करता है तो उसके ड्रोन और मिसाइलों को नेटवर्क इन हमलों को नाकाम कर सकता है।
ट्रम्प ने 28 जनवरी को ईरान से परमाणु कार्यक्रम पर समझौता करने को कहा था। ऐसा न करने पर उन्होंने चेतावनी दी थी कि ईरान पर अगला हमला पहले से कहीं ज्यादा खतरनाक होगा।
ट्रम्प के मुताबिक अमेरिकी युद्धपोत ईरान की तरफ बढ़ रहे हैं। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी कहा है कि सेना राष्ट्रपति के किसी भी सैन्य आदेश के लिए तैयार है।

अमेरिकी विध्वंसक पोत USS डेलबर्ट डी ब्लैक इजराइल के दक्षिणी बंदरगाह एलाट पर पहुंचा। (तस्वीर- इजराइल टाइम्स)
ईरान ने बड़े पैमाने पर ड्रोन तैयार किए
ईरान के सेना प्रमुख मेजर जनरल अमीर हातामी ने कहा कि पिछले साल जून में अमेरिका और इजराइल के साथ हुए 12 दिन के संघर्ष के बाद सेना ने अपनी सैन्य रणनीति बदली है। इसके तहत बड़ी संख्या में ड्रोन तैयार किए गए हैं।
हातामी के मुताबिक, ये ड्रोन जमीन और समुद्र दोनों जगहों से ऑपरेट किए जा सकते हैं। इसके अलावा ईरान के पास पहले से ही बड़ी संख्या में बैलिस्टिक मिसाइलें मौजूद हैं।
ईरान ने कहा है कि वह जून, 2025 की तरह कतर के अमेरिकी ठिकानों और इजराइल पर मिसाइलें और ड्रोन दाग सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान ने हाल ही में अपने ड्रोनवाहक पोत शाहिद बाघेरी को समुद्र में तैनात किया है।

तस्वीर ईरान के ड्रोनवाहक पोत शाहिद बाघेरी की है। (फाइल फोटो)
ईरानी सेना को EU ने आतंकी संगठन घोषित किया
यूरोपियन यूनियन (EU) ने ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) को आतंकी संगठन घोषित कर दिया है। यह फैसला विरोध प्रदर्शनों पर ईरानी सरकार की हिंसक कार्रवाई के चलते लिया गया है।
रिवोल्यूशनरी गार्ड के शीर्ष कमांडरों समेत 15 अधिकारियों और 6 संगठनों पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं। इनमें ऑनलाइन कंटेंट की निगरानी करने वाली संस्थाएं भी हैं। यूरोप में इनकी संपत्तियां जब्त की जाएंगी और उनकी यात्रा पर रोक लगेगी।
EU की राजनयिक काजा कलास ने कहा कि दमन को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि IRGC को अब अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट जैसे आतंकी संगठनों के बराबर माना जाएगा।
ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और अमेरिका पहले ही IRGC को आतंकी संगठन घोषित कर चुके हैं। हालांकि ब्रिटेन ने अब तक इसे अपनी आतंकी सूची में शामिल नहीं किया है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने EU के इस फैसले को ‘दिखावटी कदम’ और ‘बड़ी रणनीतिक गलती’ बताया है। उनका कहना है कि यूरोप हालात संभालने के बजाय तनाव बढ़ा रहा है।
IRGC ईरान की सबसे ताकतवर सैन्य ताकत मानी जाती है। इसकी स्थापना 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद हुई थी। इसके पास करीब 1.90 लाख सक्रिय सैनिक हैं।

IRGC की कमान सीधे सुप्रीम लीडर खामेनेई के हाथ में होती है।
तनाव के बीच ईरानी विदेशमंत्री तुर्किये पहुंचे
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची शुक्रवार को इस्तांबुल पहुंचे। उन्होंने यहां तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिदान से मुलाकात की है।
इस यात्रा का मकसद अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव पर बातचीत करना है तुर्किये तनाव कम करने के लिए मध्यस्थता की पेशकश कर रहा है। ईरान के विदेश मंत्रालय के बयान के मुताबिक, अराघची की राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोआन से भी बैठक प्रस्तावित है।
तुर्किये के विदेश मंत्री ने दोनों पक्षों से बातचीत की मेज पर लौटने की अपील की है। फिदान ने यह भी सुझाव दिया है कि अमेरिका को ईरान से जुड़े मुद्दों को एक-एक कर सुलझाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सबसे पहले परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मसलों पर बात होनी चाहिए, न कि सभी मुद्दों को एक साथ उठाया जाए।

अराघची ने शुक्रवार को अंकारा में तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिदान से मुलाकात की।
अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में तैनाती बढ़ाई
अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी और मजबूत करते हुए अरब सागर और लाल सागर में विमानवाहक पोत USS अब्राहम लिंकन, USS थियोडोर रूजवेल्ट और कई मिसाइल विध्वंसक युद्धपोत तैनात किए हैं।
साथ ही कतर, बहरीन, सऊदी अरब, इराक और जॉर्डन के सैन्य अड्डों से वायुसेना की सक्रियता बढ़ी है। अमेरिका अब ईरान के परमाणु ठिकानों, सैन्य अड्डों व कमांड सेंटरों पर समुद्र और आसमान दोनों से हमले की स्थिति में आ गया है।
ईरान के खिलाफ पहले कार्यकाल से आक्रामक रहे ट्रम्प
ट्रम्प ने अपने पहले कार्यकाल (2017-2021) में ईरान के साथ 2015 के परमाणु समझौते संयुक्त व्यापक कार्य योजना ( JCPOA) से अमेरिका को पूरी तरह बाहर निकाल लिया था।
यह समझौता ओबामा प्रशासन के समय में जुलाई 2015 में हुआ था, जिसमें ईरान, अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, रूस, चीन और यूरोपीय संघ शामिल थे। समझौते के तहत ईरान ने अपनी परमाणु गतिविधियों पर कई सख्त सीमाएं लगाई थीं, जैसे:
- यूरेनियम संवर्धन को 3.67% तक सीमित रखना (बम बनाने के लिए 90% से ज्यादा चाहिए)।
- संवर्धित यूरेनियम का स्टॉक बहुत कम रखना।
- सेंट्रीफ्यूज मशीनों की संख्या सीमित करना।
- अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) को निरीक्षण की पूरी अनुमति देना।
मिडिल ईस्ट में 30,000 से 40,000 अमेरिकी सैनिक तैनात
मिडिल ईस्ट (CENTCOM) में अभी अमेरिकी सैन्य मौजूदगी काफी मजबूत है। मिडिल ईस्ट और पर्शियन गल्फ में लगभग 30,000 से 40,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं।
फिलहाल मिडिल ईस्ट में करीब 6 नौसैनिक जहाज मौजूद हैं, जिनमें 3 गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर शामिल हैं, जो बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस और अन्य ऑपरेशन के लिए सक्षम हैं।

(Bureau Chief, Korba)





