Wednesday, February 18, 2026

              BIG NEWS: कनाडा सरकार ने 2025 में 2,800 भारतीयों को देश से बाहर निकाला, 6500 भारतीय को निकालने की तैयारी; शरणार्थी नियमों का पालन नहीं करने पर कार्रवाई

              ओटावा: कनाडा सरकार ने 2025 के पहले 10 महीनों में कनाडा ने 2,831 भारतीय नागरिकों को देश से बाहर निकाला है। ये जानकारी कनाडा की कैनेडियन बॉर्डर सर्विसेज एजेंसी (CBSA) के आंकड़ों से सामने आई है।

              इसके मुताबिक पिछले साल कुल 18,785 लोगों को कनाडा से निकाला गया, जिनमें भारतीय दूसरे नंबर पर हैं। सबसे ज्यादा 3,972 लोग मेक्सिको के थे।

              इतना ही नहीं, अभी 29,542 लोगों को निकालने की प्रक्रिया चल रही है, जिनमें 6,515 भारतीय भी शामिल हैं। यानी आने वाले समय में और भारतीयों पर भी कार्रवाई हो सकती है।

              कनाडा सरकार ने बताया है कि जिन लोगों को निकाला गया, उनमें से कई पर क्रिमिनल मामले थे। लेकिन बड़ी संख्या उन लोगों की भी थी जिन्होंने शरणार्थी दावे से जुड़े नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया।

              कनाडा में तीन तरीके बाहर निकाला जाता है

              कनाडा में किसी को बाहर करने के तीन तरीके होते हैं- डिपार्चर ऑर्डर, एक्सक्लूजन ऑर्डर और डिपोर्टेशन ऑर्डर। कुछ लोगों को 30 दिन के अंदर देश छोड़ने का आदेश दिया जाता है। अगर वे नहीं जाते तो उन पर कड़ी कार्रवाई होती है।

              कुछ मामलों में एक साल या पांच साल तक दोबारा कनाडा आने पर रोक लगती है। वहीं डिपोर्टेशन ऑर्डर में बिना खास अनुमति के दोबारा एंट्री नहीं मिलती।

              1. डिपार्चर ऑर्डर- इसमें जिस इंसान पर आदेश लागू होता है उसे 30 दिनों के अंदर कनाडा छोड़ना होता है। अगर वो समय पर नहीं जाता, तो यह आदेश डिपोर्टेशन ऑर्डर में बदल जाता है।
              2. एक्सक्लूजन ऑर्डर- इसमें व्यक्ति को एक साल तक कनाडा लौटने की इजाजत नहीं होती। अगर मामला गलत जानकारी देने (मिसरिप्रेजेंटेशन) का हो, तो 5 साल तक वापसी पर रोक लग सकती है।
              3. डिपोर्टेशन ऑर्डर- यह सबसे सख्त आदेश होता है। इसमें व्यक्ति के कनाडा वापस आने पर स्थायी रोक लग जाती है। दोबारा आने के लिए लिखित इजाजत लेना जरूरी होता है।

              कनाडा के इमिग्रेशन सिस्टम में सुधार की कोशिश

              कनाडा में इमिग्रेशन इस समय बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना हुआ है। पिछले साल चुनाव के दौरान भी यही सबसे अहम मुद्दा था और अब भी सरकार और विपक्ष के बीच इसी पर बहस चल रही है। मुकाबला मुख्य रूप से लिबरल पार्टी और कंजर्वेटिव पार्टी के बीच है।

              लिबरल पार्टी के नेता पीएम मार्क कार्नी का कहना है कि इमिग्रेशन सिस्टम में सुधार की जरूरत है। उनका कहना है कि जब तक घरों की कमी की समस्या ठीक नहीं होती, तब तक इमिग्रेशन की संख्या को कंट्रोल में रखा जाएगा।

              2025 के लिए करीब 3 लाख 95 हजार लोगों को स्थायी निवास देने का टारगेट रखा गया था, जो देश की आबादी के 1% से कम है।

              सीमा सुरक्षा को लेकर भी सरकार कड़े कदम उठा रही है। 1.3 बिलियन डॉलर की योजना के तहत सीमा पर ड्रोन और नई निगरानी तकनीक लगाई गई है। जून 2025 में सरकार ने स्ट्रांग बॉर्डर एक्ट नाम का नया कानून भी पेश किया, जिसका मकसद सीमा को और मजबूत करना और इमिग्रेशन सिस्टम को ज्यादा सख्त बनाना है।

              कनाडा में हर चौथा व्यक्ति विदेशी मूल का

              कनाडा दुनिया के उन देशों में है जहाँ प्रवासियों (इमिग्रेंट) की संख्या तेजी से बढ़ी है। 2021 की आधिकारिक जनगणना के मुताबिक, कनाडा में लगभग 83.6 लाख (8.3 मिलियन) लोग विदेश में जन्मे हैं, जो देश की कुल आबादी का करीब 23% है। यह आंकड़ा स्टैटिस्टिक्स कनाडा ने जारी किया है।

              एक्सपर्ट्स का कहना है कि कनाडा की अर्थव्यवस्था और जनसंख्या वृद्धि में प्रवासियों का खास रोल रही है, लेकिन हाल के सालों में इस मुद्दे पर बहस भी तेज हुई है।

              आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, कनाडा में भारतीय मूल के लगभग 13 लाख (1.3 मिलियन) लोग रहते हैं। वहीं करीब 3 लाख (लगभग 3.03 लाख) लोग पाकिस्तानी मूल के हैं।

              कनाडा में विदेशी मूल के 83 लाख लोग रहते हैं, जिनमें से 13 लाख भारतीय मूल के हैं।

              कनाडा में विदेशी मूल के 83 लाख लोग रहते हैं, जिनमें से 13 लाख भारतीय मूल के हैं।

              कनाडा सरकार विदेशी छात्रों को PHD के लिए बुला रही

              कनाडा सरकार एक तरफ जहां शर्णार्थियों की संख्या कंट्रोल करना चाहती है, वहीं विदेशों से ज्यादा मास्टर्स और पीएचडी करने वाले छात्रों को बुलाना चाहती है।

              द ग्लोबल एंड मेल की रिपोर्ट के मुताबिक इसके लिए इमिग्रेशन विभाग सोशल मीडिया पर प्रचार कर रहा है। पोस्ट में बताया जा रहा है कि अगर छात्र कनाडा पढ़ने आएंगे तो उनके परिवार वाले भी साथ आने के लिए आवेदन कर सकते हैं।

              यह कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि पिछले एक साल में कनाडा आने वाले विदेशी छात्रों की संख्या काफी कम हो गई है। ‘इमिग्रेशन, रिफ्यूजी और सिटिजनशिप कनाडा’ के मुताबिक 2025 में पिछले साल के मुकाबले 61% कम नए छात्र आए।

              जनवरी 2024 में सरकार ने विदेशी छात्रों की संख्या पर लिमिट लगा दी थी, जिसके बाद कुल छात्रों की संख्या करीब एक-तिहाई घट गई।


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