Friday, February 20, 2026

              BIG NEWS: ट्रम्प ने फिर भारत-पाकिस्तान संघर्ष रुकवाने का दावा किया, बोले- मैंने दोनों देशों को 200% टैरिफ की चेतावनी दी, तब लड़ाई रोकने के लिए माने, संघर्ष में 11 फाइटर जेट्स गिरे थे

              वॉशिंगटन डीसी: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गुरुवार को वॉशिंगटन में फिर से भारत-पाकिस्तान संघर्ष रुकवाने का दावा किया। उन्होंने कहा कि मैंने दोनों देशों पर 200% टैरिफ लगाने की चेतावनी दी थी। इसके बाद वे संघर्ष रोकने के लिए माने। अमेरिकी राष्ट्रपति ने ये बात ‘बोर्ड ऑफ पीस’ कार्यक्रम में कही।

              ट्रम्प ने कहा कि उस समय दोनों देशों के बीच हालात बहुत खराब थे, लड़ाई तेज हो गई थी और विमान गिराए जा रहे थे। मैंने दोनों नेताओं (मोदी और शहबाज शरीफ) को फोन किया। मैंने दोनों से साफ कह दिया था कि अगर वे झगड़ा खत्म नहीं करेंगे तो मैं उनके साथ कोई ट्रेड डील नहीं करूंगा।

              ट्रम्प के मुताबिक दोनों देश लड़ना चाहते थे, लेकिन जब पैसे का मामला आया और नुकसान की बात सामने आई तो वे मान गए। ट्रम्प ने दावा किया कि इस संघर्ष के दौरान 11 महंगे फाइटर जेट्स गिराए गए थे। हालांकि, उन्होंने ये नहीं बताया कि ये फाइटर जेट्स किस देश के थे।

              ट्रम्प 75 से ज्यादा बार भारत-पाकिस्तान के बीच जंग रुकवाने का दावा कर चुके हैं। वहीं, भारत लगातार यह कहता रहा है कि भारत-पाकिस्तान के मुद्दों में किसी तीसरे देश की मध्यस्थता स्वीकार नहीं की जाएगी।

              शरीफ ने ट्रम्प को ‘दक्षिण एशिया का रक्षक’ बताया

              ट्रम्प ने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने उनके चीफ ऑफ स्टाफ के सामने यह बात मानी थी कि उनकी पहल से भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित युद्ध टल गया।

              ट्रम्प के मुताबिक, अगर यह टकराव नहीं रुकता तो करीब 2.5 करोड़ लोगों की जान खतरे में पड़ सकती थी। उन्होंने दावा किया कि उनकी वजह से दोनों देशों के बीच हालात काबू में आए और बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान टल गया।

              इस दौरान ट्रम्प ने शहबाज शरीफ से खड़े होने के लिए कहा वो खड़े हो गए। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। इस दौरान शहबाज शरीफ ने ट्रम्प को दक्षिण एशिया की हिफाजत करने वाला बताया।

              ट्रम्प बोले- अप्रैल में चीन दौरे पर जाऊंगा

              चीन को लेकर ट्रम्प ने कहा कि उनका राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बहुत अच्छा रिश्ता है। उन्होंने बताया कि वह अप्रैल में चीन जाने वाले हैं। उन्होंने कहा कि पिछली बार जब वे चीन गए थे तो राष्ट्रपति शी ने उनका शानदार स्वागत किया था।

              ट्रम्प ने कहा कि उन्होंने इतने सारे सैनिक एक साथ कभी नहीं देखे थे, जो बिल्कुल एक ही कद के थे। उन्होंने मजाक में कहा कि अगर वे हेलमेट उतार देते तो उनके सिर पर बिलियर्ड खेला जा सकता था।

              भारत बोर्ड ऑफ पीस की पहली बैठक में शामिल हुआ

              ट्रम्प के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पहली बैठक में भारत ने गुरुवार को ऑब्जर्वर देश के तौर पर हिस्सा लिया। भारत की तरफ से भारतीय दूतावास में तैनात चार्ज द’अफेयर्स (सीनियर अधिकारी) नमग्या सी खम्पा ने हिस्सा लिया।

              भारत ने अभी तक यह साफ नहीं किया है कि वह बोर्ड का फुल टाइम मेंबर बनेगा या नहीं। भारत ने पिछले महीने दावोस में इसके लॉन्च कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लिया था।

              ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की बैठक में गाजा के पुनर्निर्माण के लिए 1.5 लाख करोड़ रुपए के राहत पैकेज का ऐलान किया गया है। ट्रम्प ने कहा कि 9 सदस्य देश गाजा राहत पैकेज के लिए 63 हजार करोड़ रुपए (7 अरब डॉलर) देंगे। जबकि, अमेरिका खुद 90 हजार करोड़ रुपए (10 अरब डॉलर) देगा।

              बोर्ड ऑफ पीस की गुरुवार को हुई मीटिंग में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के साथ दुनियाभर के नेता एक मंच पर नजर आए।

              बोर्ड ऑफ पीस की गुरुवार को हुई मीटिंग में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के साथ दुनियाभर के नेता एक मंच पर नजर आए।

              बोर्ड ऑफ पीस क्या है?

              ट्रम्प ने पहली बार सितंबर 2025 में गाजा युद्ध खत्म करने की योजना पेश करते हुए इस बोर्ड का प्रस्ताव रखा था। रॉयटर्स के मुताबिक, अमेरिका ने करीब 60 देशों को इस बोर्ड में शामिल होने का न्योता भेजा है।

              पिछले हफ्ते दुनिया के नेताओं को भेजे गए न्योते में बताया गया कि इस बोर्ड की भूमिका सिर्फ गाजा तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर संघर्षों को सुलझाने में भी काम करेगा।

              बोर्ड के मसौदे (चार्टर) में कहा गया है कि जो देश तीन साल से ज्यादा समय तक इस बोर्ड का सदस्य बनना चाहते हैं, उन्हें 1 अरब डॉलर का योगदान देना होगा।

              ट्रम्प खुद इस बोर्ड के अध्यक्ष हैं

              ट्रम्प खुद इस बोर्ड के अध्यक्ष हैं। वे चाहते हैं कि यह बोर्ड सिर्फ गाजा के युद्धविराम तक सीमित न रहे, बल्कि दूसरे मुद्दों पर भी काम करे। हालांकि, इससे कुछ देशों को चिंता है कि इससे ग्लोबल डिप्लोमेसी में UN की भूमिका कमजोर हो सकती है।

              ट्रम्प ने कहा कि जब यह बोर्ड पूरी तरह बन जाएगा, तब यह बड़े फैसले ले सकेगा और जो भी काम होगा, वह UN के सहयोग से किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि UN में बहुत क्षमता है, लेकिन उसका अब तक पूरा इस्तेमाल नहीं हो पाया है।

              संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के पांच स्थायी सदस्यों में से अमेरिका के अलावा किसी भी देश ने अभी तक इस बोर्ड में शामिल होने की पुष्टि नहीं की है।


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